No Smoking On Flights: हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। यही वजह है कि दुनिया भर में उड़ान के दौरान धूम्रपान (Smoking) पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई बार कुछ यात्री नियमों की अनदेखी कर बैठते हैं, जिसका परिणाम उन्हें कानूनी कार्रवाई के रूप में भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला एयर इंडिया की फ्लाइट में सामने आया, जहां सऊदी अरब से मुंबई आ रहे एक यात्री ने विमान के टॉयलेट में सिगरेट पी ली। जैसे ही फ्लाइट मुंबई पहुंची, उसे सुरक्षा कर्मियों ने हिरासत में लेकर पुलिस के हवाले कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नुरी बहुलेयां (34 वर्ष) केरल के अलपुझा जिले का रहने वाला है। वह सऊदी अरब के दमम से मुंबई आने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-4250 में यात्रा कर रहा था। उसकी सीट संख्या 21F थी।
उड़ान भरने के कुछ समय बाद वह विमान के टॉयलेट में गया। इसी दौरान केबिन क्रू ने टॉयलेट के बाहर धुआं निकलता देखा। जब यात्री बाहर आया तो उससे पूछताछ की गई। शुरुआत में उसने टालने की कोशिश की, लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया कि उसने अंदर सिगरेट पी थी।
पायलट ने तुरंत दिए कार्रवाई के निर्देश
घटना की जानकारी मिलते ही केबिन क्रू ने पायलट को सूचित किया। पायलट ने निर्देश दिया कि विमान के मुंबई पहुंचते ही संबंधित यात्री को एयरलाइन के सुरक्षा अधिकारियों के हवाले कर दिया जाए।
मुंबई एयरपोर्ट पर फ्लाइट की लैंडिंग के बाद एयर इंडिया के सुरक्षा कर्मियों ने यात्री को सहार पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया है। इस धारा के तहत दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप लगाए जाते हैं।
इसके अलावा उसके खिलाफ Aircraft Act, 1937 के प्रावधानों के तहत भी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। मामले की जांच जारी है।
बार-बार चेतावनी के बावजूद तोड़ा नियम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार विमान में स्पष्ट रूप से “No Smoking” के संकेत लगे हुए थे। उड़ान भरने से पहले हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में यात्रियों को कई बार यह घोषणा भी सुनाई गई थी कि विमान के अंदर धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद आरोपी ने नियमों की अनदेखी करते हुए टॉयलेट में जाकर सिगरेट पी, जिससे विमान की सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय हो गई।
विमान में स्मोकिंग पर क्यों है पूरी तरह प्रतिबंध?
उड़ते विमान में धूम्रपान केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि यात्रियों और विमान की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।
इसके प्रमुख कारण हैं:
- विमान में आग लगने का जोखिम बढ़ जाता है।
- केबिन में मौजूद ऑक्सीजन सिस्टम और इलेक्ट्रिकल वायरिंग प्रभावित हो सकती है।
- धुआं पूरे केबिन में फैलने से यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।
- स्मोक डिटेक्टर सक्रिय होने पर सुरक्षा संबंधी आपात स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
- पायलट को सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाने पड़ सकते हैं, जिससे उड़ान संचालन प्रभावित हो सकता है।
इसी वजह से विमान के प्रत्येक टॉयलेट में आधुनिक Smoke Detector लगाए जाते हैं, जो धुआं होने पर तुरंत अलर्ट जारी करते हैं।
फ्लाइट में स्मोकिंग पर कब लगा प्रतिबंध?
दुनिया भर में विमानों में धूम्रपान पर प्रतिबंध एक साथ नहीं लगा, बल्कि चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया।
- 1988: अमेरिका ने दो घंटे या उससे कम अवधि वाली घरेलू उड़ानों में स्मोकिंग पर प्रतिबंध लगाया।
- 1990: अमेरिका की अधिकांश घरेलू उड़ानों में धूम्रपान पूरी तरह बंद कर दिया गया।
- 2000: अमेरिका आने-जाने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी स्मोकिंग पर रोक लागू हो गई।
- 1990 से 2000 के दशक: यूरोप, एशिया और अन्य देशों की एयरलाइंस ने भी अपने विमानों में धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया।
आज लगभग दुनिया की सभी कमर्शियल एयरलाइंस में उड़ान के दौरान स्मोकिंग पूरी तरह गैरकानूनी है।
विमान में किन चीजों के इस्तेमाल पर रोक होती है?
यात्रियों को विमान में निम्नलिखित चीजों का उपयोग करने की अनुमति नहीं होती—
- सिगरेट
- बीड़ी
- सिगार
- पाइप
- ई-सिगरेट या वेपिंग डिवाइस
- अन्य किसी भी प्रकार के धूम्रपान उत्पाद
भारत में कई एयरलाइंस विमान के भीतर गुटखा, पान मसाला या तंबाकू थूकने जैसी गतिविधियों पर भी सख्त प्रतिबंध लागू करती हैं।
निष्कर्ष
एयर इंडिया की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उड़ान के दौरान सुरक्षा नियमों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाती। विमान में धूम्रपान करना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई करती हैं और दोषी यात्रियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया जाता है।


