FPI Buying in India: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPI) की वापसी ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। जुलाई 2026 में एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में ₹20,199 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। खास बात यह रही कि कुल निवेश का करीब 66% हिस्सा प्राइमरी मार्केट और अन्य कैटेगरी के जरिए आया, जबकि बाकी निवेश स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशकों ने भारत जैसे अपेक्षाकृत स्थिर बाजार का रुख किया है।
जुलाई में विदेशी निवेशकों ने बदला रुख
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में एफपीआई भारतीय शेयर बाजार में नेट खरीदार रहे।
निवेश का विवरण इस प्रकार रहा—
- कुल शुद्ध निवेश: ₹20,199 करोड़
- स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेश: ₹6,731 करोड़
- प्राइमरी मार्केट एवं अन्य कैटेगरी: ₹13,467 करोड़
इसका मतलब है कि कुल निवेश का लगभग 66.7% हिस्सा प्राइमरी मार्केट और अन्य माध्यमों से आया, जो यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा केवल सेकेंडरी मार्केट तक सीमित नहीं है बल्कि वे नई कंपनियों और दीर्घकालिक अवसरों पर भी दांव लगा रहे हैं।
डेट मार्केट में भी दिखी जबरदस्त दिलचस्पी
सिर्फ इक्विटी बाजार ही नहीं, बल्कि डेट मार्केट में भी विदेशी निवेशकों की सक्रियता देखने को मिली।
NSDL के मुताबिक जुलाई में जनरल लिमिट कैटेगरी के तहत विदेशी निवेशकों ने ₹29,211 करोड़ का निवेश किया। इससे साफ संकेत मिलता है कि वैश्विक निवेशक भारतीय बॉन्ड मार्केट को भी आकर्षक मान रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी क्यों बढ़ी?
जियोजीत इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, विदेशी निवेशकों की खरीदारी के पीछे कई अहम कारण हैं।
1. दक्षिण कोरिया और ताइवान में बढ़ी अस्थिरता
दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में हाल के समय में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। खासकर चिप सेक्टर में अधिक निवेश (Concentration Risk) ने विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में उन्होंने भारत जैसे मजबूत और अपेक्षाकृत स्थिर बाजार को प्राथमिकता दी।
2. रुपये की मजबूती
भारतीय रुपये में अपेक्षाकृत स्थिरता भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है। मुद्रा में कम उतार-चढ़ाव विदेशी निवेशकों के जोखिम को घटाता है।
3. लार्ज कैप शेयरों का आकर्षक वैल्युएशन
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय लार्ज कैप कंपनियों का वैल्युएशन अभी भी आकर्षक बना हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों को लंबी अवधि के अच्छे अवसर दिखाई दे रहे हैं।
4. मिडकैप और स्मॉलकैप पर बढ़ा भरोसा
डॉ. विजयकुमार का कहना है कि विदेशी निवेशक अब केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। वे मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेश बढ़ा रहे हैं, क्योंकि इन कंपनियों में भविष्य की ग्रोथ की संभावना अधिक दिखाई दे रही है।
जुलाई में कैसा रहा भारतीय शेयर बाजार?
भारतीय बाजार ने जुलाई में लगातार मजबूती दिखाई।
निफ्टी 50 का प्रदर्शन
| महीना | प्रदर्शन |
|---|---|
| अप्रैल 2026 | +7.46% |
| मई 2026 | -1.87% |
| जून 2026 | +1.35% |
| जुलाई 2026 | +2.17% |
जुलाई के अंत में निफ्टी 50 इंडेक्स 24,383.60 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 का प्रदर्शन
मार्च में 10.19% की गिरावट के बाद स्मॉलकैप इंडेक्स लगातार चौथे महीने मजबूत रहा।
| महीना | प्रदर्शन |
|---|---|
| अप्रैल | +18.44% |
| मई | +0.73% |
| जून | +3.99% |
| जुलाई | +2.53% |
निफ्टी मिडकैप 100 का प्रदर्शन
मिडकैप इंडेक्स ने भी स्मॉलकैप की तरह लगातार रिकवरी जारी रखी।
| महीना | प्रदर्शन |
|---|---|
| अप्रैल | +13.55% |
| मई | +3.24% |
| जून | +0.12% |
| जुलाई | +1.81% |
मार्च में 10.94% की गिरावट के बाद यह लगातार चौथे महीने बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर मजबूत हुआ है। प्राइमरी मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि वैश्विक निवेशक भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर भरोसा जता रहे हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहते हैं, तो आने वाले महीनों में भी एफपीआई निवेश का सकारात्मक रुझान जारी रह सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य वित्तीय उत्पाद में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


