HighLights
- फिक्स्ड डिपॉजिट आज भी सुरक्षित और लोकप्रिय निवेश विकल्पों में शामिल है।
- ₹1 लाख की FD 10 साल में 6%, 7% और 8% ब्याज दर पर कितनी बढ़ेगी, जानें पूरा हिसाब।
- कंपाउंडिंग की वजह से लंबे समय में ब्याज पर भी ब्याज मिलता है, जिससे मैच्योरिटी रकम तेजी से बढ़ सकती है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश के साथ बाजार जोखिम जुड़ा रहता है, इसलिए बहुत से निवेशक अपनी बचत का एक हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD में रखना पसंद करते हैं। FD में निवेश करते समय ब्याज दर और अवधि का सीधा असर मैच्योरिटी रकम पर पड़ता है। खासकर लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की वजह से मामूली ब्याज दर का अंतर भी अंतिम रकम में बड़ा बदलाव कर सकता है।
अगर आपके पास ₹1 लाख हैं और आप इसे 10 साल के लिए FD में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग ब्याज दरों पर आपकी रकम कितनी हो सकती है। यहां हम 6%, 7% और 8% सालाना ब्याज दर के आधार पर एक अनुमानित कैलकुलेशन समझ रहे हैं।
₹1 लाख की FD 10 साल में कितनी हो जाएगी?
मान लीजिए आप ₹1 लाख को 10 साल के लिए क्यूमुलेटिव FD में निवेश करते हैं। अगर ब्याज सालाना चक्रवृद्धि आधार पर जुड़ता है, तो अनुमानित मैच्योरिटी रकम इस तरह हो सकती है:
| सालाना ब्याज दर | 10 साल बाद अनुमानित रकम | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 6% | करीब ₹1,79,085 | करीब ₹79,085 |
| 7% | करीब ₹1,96,715 | करीब ₹96,715 |
| 8% | करीब ₹2,15,893 | करीब ₹1,15,893 |
इस कैलकुलेशन से पता चलता है कि 10 साल की अवधि में 6% और 8% ब्याज दर के बीच करीब ₹36,800 का अंतर हो सकता है। यानी सिर्फ 2 प्रतिशत अंक अधिक ब्याज मिलने से लंबी अवधि में आपकी मैच्योरिटी रकम काफी बढ़ सकती है।
नोट: वास्तविक FD मैच्योरिटी राशि बैंक की ब्याज गणना की आवृत्ति, FD की शर्तों और लागू ब्याज दर के आधार पर अलग हो सकती है। ऊपर का कैलकुलेशन उदाहरण के तौर पर चक्रवृद्धि आधार पर है।
कंपाउंडिंग से कैसे बढ़ता है पैसा?
क्यूमुलेटिव FD में ब्याज आम तौर पर बीच-बीच में आपके सेविंग अकाउंट में नहीं दिया जाता, बल्कि FD की रकम में जुड़ता रहता है। इसके बाद अगले चक्र में ब्याज की गणना बढ़ी हुई रकम पर होती है।
उदाहरण के लिए, अगर ₹1 लाख पर ब्याज मिलता है और वह मूलधन में जुड़ जाता है, तो अगली बार ब्याज केवल शुरुआती ₹1 लाख पर नहीं, बल्कि मूलधन और पहले मिले ब्याज की कुल रकम पर मिलता है। इसी प्रक्रिया को कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज कहा जाता है।
यही वजह है कि लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का असर ज्यादा दिखाई देता है। निवेशक को केवल शुरुआती ब्याज दर देखने के बजाय यह भी देखना चाहिए कि बैंक ब्याज को कितनी अवधि पर कंपाउंड कर रहा है और FD की कुल मैच्योरिटी रकम कितनी बन रही है।
6%, 7% और 8% में कितना अंतर?
अगर ₹1 लाख को 10 साल के लिए निवेश किया जाए, तो ब्याज दर बढ़ने के साथ मैच्योरिटी रकम भी बढ़ती जाती है। 6% की दर पर रकम करीब ₹1.79 लाख हो सकती है, जबकि 7% पर यह करीब ₹1.97 लाख और 8% पर करीब ₹2.16 लाख तक पहुंच सकती है।
इससे यह समझा जा सकता है कि लंबी अवधि के निवेश में ब्याज दर का छोटा अंतर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि केवल अधिक ब्याज दर देखकर FD चुनना सही तरीका नहीं है। बैंक की सुरक्षा, FD की अवधि, समय से पहले निकासी के नियम और लागू टैक्स को भी ध्यान में रखना चाहिए।
FD पर मिलता है जमा बीमा कवर
भारत में बैंक डिपॉजिट पर डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी DICGC के नियम लागू होते हैं। पात्र जमा पर एक बैंक में एक जमाकर्ता के लिए मूलधन और ब्याज मिलाकर कुल ₹5 लाख तक का बीमा कवर होता है। इसलिए बड़ी रकम को FD में रखने से पहले निवेशक को बैंक और जमा बीमा से जुड़े नियमों की जानकारी भी लेनी चाहिए।
FD कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
FD चुनते समय सिर्फ ब्याज दर को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सबसे पहले यह देखें कि बैंक कितनी अवधि के लिए कितनी ब्याज दर दे रहा है। इसके अलावा क्यूमुलेटिव और नॉन-क्यूमुलेटिव FD में अंतर समझना भी जरूरी है।
अगर आपको नियमित आय चाहिए, तो नॉन-क्यूमुलेटिव FD उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इसमें ब्याज का भुगतान तय अंतराल पर किया जा सकता है। दूसरी ओर, लंबी अवधि में रकम बढ़ाने के उद्देश्य से क्यूमुलेटिव FD पर विचार किया जा सकता है।
समय से पहले FD तोड़ने पर बैंक की ओर से पेनल्टी या कम ब्याज मिल सकता है। इसलिए निवेश से पहले बैंक के नियम और FD की शर्तें जरूर पढ़ें।
निष्कर्ष
₹1 लाख की FD को 10 साल तक रखने पर 6%, 7% और 8% की अनुमानित सालाना चक्रवृद्धि दर पर रकम क्रमशः करीब ₹1.79 लाख, ₹1.97 लाख और ₹2.16 लाख हो सकती है। इससे साफ है कि लंबी अवधि में कंपाउंडिंग और ब्याज दर दोनों का निवेश के अंतिम परिणाम पर बड़ा असर पड़ता है।
हालांकि वास्तविक मैच्योरिटी राशि बैंक की FD दर, कंपाउंडिंग नियम और निवेश की शर्तों पर निर्भर करेगी। निवेश करने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा ब्याज दर और FD नियम जरूर जांचें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य वित्तीय जानकारी और उदाहरणात्मक कैलकुलेशन के उद्देश्य से है। FD में निवेश करने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा ब्याज दर, नियम, टैक्स और अन्य शर्तों की जांच करें। यह किसी तरह की निवेश सलाह नहीं है।
Source: संबंधित बैंकों की FD शर्तों और उपलब्ध वित्तीय जानकारी के आधार पर तैयार कैलकुलेशन।


