Cadbury Chocolate Fact Check: सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप्स पर इन दिनों एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि डेयरी मिल्क और 5 स्टार जैसी लोकप्रिय चॉकलेट्स में बीफ से जुड़े तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। कई पोस्ट्स में लोगों से इन प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने की अपील भी की जा रही है। लेकिन क्या सचमुच भारत में बिकने वाली कैडबरी चॉकलेट्स में बीफ होता है? कंपनी ने अब इस पूरे मामले पर सफाई दी है।
नई दिल्ली: भारत में करोड़ों लोग कैडबरी की डेयरी मिल्क, 5 स्टार, बॉर्नविटा और ओरियो जैसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में जब सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि कंपनी के कुछ प्रोडक्ट्स में “बीफ” या “बीफ जिलेटिन” का इस्तेमाल होता है, तो कई उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और नाराजगी देखने को मिली।
वायरल पोस्ट्स में कथित तौर पर कंपनी की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि कुछ चॉकलेट्स में इस्तेमाल होने वाला जिलेटिन बीफ आधारित है। इस दावे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #BoycottCadbury जैसे पोस्ट्स भी दिखाई देने लगे।
हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत में बिकने वाले उसके उत्पादों में बीफ होने का दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत है।
क्या कह रही है कैडबरी की पेरेंट कंपनी?
कैडबरी की पेरेंट कंपनी Mondelez International ने कहा है कि भारत में उसके द्वारा बनाए और बेचे जाने वाले उत्पाद स्थानीय खाद्य नियमों और उपभोक्ता भावनाओं के अनुरूप हैं।
भारत में कंपनी Mondelez India Foods Private Limited के नाम से काम करती है। कंपनी का कहना है कि भारतीय बाजार के लिए बनाए गए शाकाहारी प्रोडक्ट्स पूरी तरह वेजिटेरियन हैं और उन पर भारतीय नियमों के अनुसार ग्रीन डॉट मार्किंग दी जाती है।
कंपनी ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट पुराना है और संभवतः ऑस्ट्रेलिया या यूके की वेबसाइट से लिया गया है, जहां कुछ उत्पादों की सामग्री अलग हो सकती है।
भारत में बिकने वाली चॉकलेट्स पर ग्रीन डॉट क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के नियमों के तहत हर पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट पर यह बताना अनिवार्य है कि वह शाकाहारी है या मांसाहारी।
- ग्रीन डॉट = शाकाहारी उत्पाद
- ब्राउन/रेड डॉट = मांसाहारी उत्पाद
डेयरी मिल्क और 5 स्टार जैसे कई कैडबरी उत्पादों की पैकेजिंग पर ग्रीन डॉट दिखाई देता है। इसका मतलब है कि भारतीय बाजार में बेचे जा रहे ये उत्पाद शाकाहारी श्रेणी में आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी उत्पाद में बीफ आधारित सामग्री का इस्तेमाल किया जाए, तो उसे भारतीय नियमों के अनुसार घोषित करना अनिवार्य होगा।
फिर वायरल दावा कहां से आया?
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कई खाद्य कंपनियों के उत्पाद अलग-अलग देशों के स्वाद, नियमों और उपभोक्ता मांग के अनुसार बनाए जाते हैं। कुछ देशों में बिकने वाले उत्पादों में जिलेटिन या अन्य पशु-आधारित सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है।
वायरल स्क्रीनशॉट कथित तौर पर कैडबरी की विदेशी वेबसाइट से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कुछ उत्पादों में “beef gelatin” का जिक्र था। सोशल मीडिया पर उसी जानकारी को भारत में बिकने वाले उत्पादों से जोड़कर वायरल कर दिया गया।
फैक्ट चेक करने वाली कई एजेंसियों ने पहले भी ऐसे दावों को भ्रामक बताया है। कंपनी भी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि भारत के लिए उसकी उत्पादन प्रक्रिया और सामग्री अलग है।
जिलेटिन क्या होता है और विवाद क्यों होता है?
जिलेटिन एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो कई खाद्य उत्पादों, कैंडी, डेजर्ट और फार्मास्यूटिकल उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। यह पशु स्रोतों से तैयार किया जा सकता है।
हालांकि भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को देखते हुए कई कंपनियां स्थानीय बाजार के लिए अलग सामग्री और निर्माण प्रक्रिया अपनाती हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय और भारतीय उत्पादों की सामग्री में अंतर हो सकता है।
क्या भारत में हलाल सर्टिफिकेशन का मतलब बीफ होता है?
सोशल मीडिया पर वायरल कई पोस्ट्स में “हलाल सर्टिफाइड” शब्द का इस्तेमाल करके भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। विशेषज्ञों के अनुसार हलाल सर्टिफिकेशन का मतलब यह नहीं होता कि उत्पाद में बीफ या मांस मौजूद है।
हलाल सर्टिफिकेशन मुख्य रूप से उत्पादन प्रक्रिया और कुछ धार्मिक मानकों से जुड़ा होता है। कई शाकाहारी उत्पाद भी हलाल प्रमाणित हो सकते हैं।
कंपनी ने लोगों से क्या अपील की?
कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपुष्ट स्क्रीनशॉट्स और फर्जी दावों पर भरोसा न करें। कंपनी का कहना है कि उत्पादों की सही जानकारी पैकेजिंग, आधिकारिक वेबसाइट और ग्राहक सेवा चैनलों से ही लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों का भी कहना है कि किसी भी वायरल दावे को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है क्योंकि इससे ब्रांड, उपभोक्ता और बाजार — तीनों प्रभावित होते हैं।
सोशल मीडिया पर फेक दावों का बढ़ता खतरा
हाल के वर्षों में कई बड़े ब्रांड्स को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे वायरल हुए हैं। कभी किसी उत्पाद में प्लास्टिक होने का दावा किया जाता है, तो कभी धार्मिक भावनाओं से जुड़े आरोप लगाए जाते हैं।
डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल स्क्रीनशॉट्स और एडिटेड पोस्ट्स के जरिए गलत जानकारी तेजी से फैलती है। ऐसे मामलों में कंपनियों को आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है।
निष्कर्ष: क्या डेयरी मिल्क और 5 स्टार में बीफ है?
अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी, कंपनी के बयान और भारतीय पैकेजिंग नियमों के आधार पर यह दावा गलत और भ्रामक माना जा रहा है कि भारत में बिकने वाली डेयरी मिल्क और 5 स्टार चॉकलेट्स में बीफ है।
कंपनी का कहना है कि भारतीय बाजार में उसके शाकाहारी उत्पाद पूरी तरह स्थानीय नियमों और उपभोक्ता भावनाओं के अनुरूप बनाए जाते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स को बिना जांचे सच मानना सही नहीं होगा।
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