भारत अब सिर्फ कृषि और डेयरी उत्पादन में ही नहीं, बल्कि पोल्ट्री सेक्टर में भी दुनिया की बड़ी ताकत बनकर उभरा है। अंडा उत्पादन के मामले में भारत ने अमेरिका, इंडोनेशिया और कई बड़े देशों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। चीन अभी भी पहले स्थान पर बना हुआ है, लेकिन भारत की तेज रफ्तार वृद्धि ने वैश्विक पोल्ट्री बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
केंद्र सरकार और पोल्ट्री इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में कुल 149.11 अरब अंडों का उत्पादन हुआ। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 4.44% अधिक है। बढ़ती घरेलू खपत, बेहतर पोल्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर, दक्षिण भारत में बड़े स्तर पर कमर्शियल फार्मिंग और निर्यात मांग ने इस सेक्टर को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि अब भारतीय अंडों की मांग सिर्फ देश के भीतर नहीं, बल्कि खाड़ी और दक्षिण एशियाई देशों में भी तेजी से बढ़ रही है। ओमान, मालद्वीप, श्रीलंका, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों में भारतीय अंडों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि पोल्ट्री सेक्टर अब भारत के कृषि निर्यात में एक अहम भूमिका निभाने लगा है।
भारत में क्यों तेजी से बढ़ रहा है अंडा उत्पादन?
भारत में पिछले 10 वर्षों के दौरान पोल्ट्री सेक्टर में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां यह सेक्टर मुख्य रूप से छोटे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित था, वहीं अब यह बड़े पैमाने पर संगठित उद्योग का रूप ले चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंडा उत्पादन बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं कम लागत पर उत्पादन, पोल्ट्री फीड इंडस्ट्री का विस्तार, हाई-यील्ड लेयर बर्ड्स का इस्तेमाल, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स में सुधार, सरकार की पशुपालन योजनाएं, प्रोटीन आधारित भोजन की बढ़ती मांग पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014-15 में देश में प्रति व्यक्ति अंडा उपलब्धता 62 अंडे सालाना थी, जो अब बढ़कर 2024-25 में 106 अंडे प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष हो गई है। यह दिखाता है कि देश में अंडों की खपत तेजी से बढ़ रही है।
इन 5 देशों में सबसे ज्यादा है भारतीय अंडों की डिमांड
भारतीय अंडों की सबसे ज्यादा मांग खाड़ी देशों और पड़ोसी द्वीपीय देशों में देखी जा रही है। इन देशों में स्थानीय उत्पादन सीमित है, जबकि भारत भौगोलिक रूप से नजदीक होने के कारण कम लागत और तेजी से सप्लाई करने में सक्षम है।
1. ओमान
ओमान भारतीय अंडों का सबसे बड़ा आयातक देश बनकर उभरा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2024 में ओमान ने भारत से करीब 28.6 मिलियन डॉलर मूल्य के अंडों का आयात किया। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती आबादी और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर की मांग ने भारतीय सप्लाई को मजबूत किया है।
2. मालद्वीप
मालद्वीप पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाला देश है, जहां होटल और रिसॉर्ट इंडस्ट्री में अंडों की भारी खपत होती है। भारत ने 2024 में मालद्वीप को लगभग 14.7 मिलियन डॉलर के अंडों का निर्यात किया।
3. श्रीलंका
आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में पिछले कुछ वर्षों में खाद्य आयात की जरूरत बढ़ी है। भारत वहां अंडों का एक प्रमुख सप्लायर बन गया है। दोनों देशों के बीच समुद्री मार्ग से सप्लाई आसान होने का फायदा भी भारत को मिलता है।
4. कतर
कतर में बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी रहती है और वहां होटल, एयरलाइन तथा फूड इंडस्ट्री में अंडों की खपत लगातार बढ़ रही है। भारतीय अंडे वहां गुणवत्ता और कीमत दोनों के कारण पसंद किए जाते हैं।
5. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
UAE भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों का बड़ा बाजार है। भारतीय अंडों की मांग खासतौर पर दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर और UAE को मिलाकर भारत ने 8.6 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के अंडों का निर्यात किया।
भारत के कौन-से राज्य करते हैं सबसे ज्यादा अंडा उत्पादन?
भारत में अंडा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र दक्षिण भारत बन चुका है। खासकर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों ने बड़े पैमाने पर कमर्शियल पोल्ट्री फार्मिंग विकसित की है।
भारत के शीर्ष अंडा उत्पादक राज्य
| राज्य | कुल उत्पादन में हिस्सेदारी |
|---|---|
| आंध्र प्रदेश | 18.37% |
| तमिलनाडु | 15.63% |
| तेलंगाना | 12.98% |
| पश्चिम बंगाल | 10.72% |
| कर्नाटक | 6.67% |
ये पांचों राज्य मिलकर भारत के कुल अंडा उत्पादन में लगभग 64.37% योगदान देते हैं।
आंध्र प्रदेश क्यों बना नंबर-1?
आंध्र प्रदेश में बड़े स्तर पर आधुनिक पोल्ट्री फार्म मौजूद हैं। यहां फीड लागत अपेक्षाकृत कम है और पोल्ट्री उद्योग को मजबूत सप्लाई चेन का लाभ मिलता है। यही वजह है कि यह राज्य लगातार देश का सबसे बड़ा अंडा उत्पादक बना हुआ है।
तमिलनाडु और तेलंगाना की बड़ी भूमिका
तमिलनाडु में नामक्कल जैसे क्षेत्र देश के सबसे बड़े पोल्ट्री हब माने जाते हैं। वहीं तेलंगाना में भी पिछले कुछ वर्षों में कमर्शियल लेयर फार्मिंग तेजी से बढ़ी है।
कमर्शियल पोल्ट्री फार्मिंग का दबदबा
भारत के कुल अंडा उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मों का है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 125.98 अरब अंडे कमर्शियल पोल्ट्री फार्म से प्राप्त हुए यह कुल उत्पादन का 84.49% हिस्सा है वहीं 23.13 अरब अंडे बैकयार्ड पोल्ट्री से प्राप्त हुए, कुल हिस्सेदारी 15.51% रही इससे साफ है कि भारत का पोल्ट्री सेक्टर तेजी से संगठित उद्योग में बदल रहा है।
बैकयार्ड पोल्ट्री क्यों है अभी भी अहम?
हालांकि कमर्शियल फार्मिंग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ग्रामीण भारत में बैकयार्ड पोल्ट्री अभी भी लाखों परिवारों की आय का स्रोत बनी हुई है। खासकर महिलाओं और छोटे किसानों के लिए यह अतिरिक्त कमाई का बड़ा साधन है। सरकार भी राष्ट्रीय पशुधन मिशन और ग्रामीण पोल्ट्री योजनाओं के जरिए बैकयार्ड पोल्ट्री को बढ़ावा दे रही है।
क्या भारत दुनिया का सबसे बड़ा अंडा निर्यातक बन सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास आने वाले वर्षों में वैश्विक पोल्ट्री बाजार में बड़ी ताकत बनने की क्षमता है। इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं कम उत्पादन लागत, सस्ती श्रम शक्ति, तेजी से बढ़ती उत्पादन क्षमता, खाड़ी देशों के नजदीक भौगोलिक स्थिति, बढ़ता कोल्ड चेन नेटवर्क
हालांकि, भारत को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है फीड कीमतों में उतार-चढ़ाव, बर्ड फ्लू का खतरा, निर्यात गुणवत्ता मानकों का दबाव, लॉजिस्टिक्स लागत. अगर सरकार और उद्योग मिलकर इन चुनौतियों को नियंत्रित कर लेते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक अंडा निर्यात बाजार में और बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकता है।
प्रोटीन डाइट की बढ़ती मांग से मिलेगा फायदा
भारत में फिटनेस, हेल्थ और हाई-प्रोटीन डाइट का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। अंडा सस्ता और आसानी से उपलब्ध प्रोटीन स्रोत माना जाता है। यही वजह है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इसकी खपत लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भारत में प्रति व्यक्ति अंडा खपत और तेजी से बढ़ सकती है, जिससे पोल्ट्री उद्योग को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिलेगा।
निष्कर्ष
भारत का पोल्ट्री सेक्टर अब सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से वैश्विक बाजार में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक बनने के साथ-साथ भारत अब खाड़ी और दक्षिण एशियाई देशों का बड़ा सप्लायर भी बन चुका है।
ओमान, मालद्वीप, श्रीलंका, कतर और UAE जैसे देशों में बढ़ती मांग ने भारतीय पोल्ट्री उद्योग के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। वहीं आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों ने इस विकास में सबसे अहम भूमिका निभाई है। आने वाले वर्षों में यदि उत्पादन गुणवत्ता, निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन को और मजबूत किया गया, तो भारत वैश्विक पोल्ट्री व्यापार में और बड़ी ताकत बन सकता है।
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