भारत सरकार ने इनवेंटरी आधारित ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट फ्रेमवर्क को अधिसूचित कर दिया है। नए नियमों के तहत विदेशी निवेश (FDI) वाली ई-कॉमर्स कंपनियां अब केवल पुष्टि (कन्फर्म) किए गए निर्यात ऑर्डर के आधार पर ही भारत में सामान खरीद सकेंगी। अनुमान के आधार पर पहले से माल खरीदकर गोदाम में रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना है कि निर्यात के नाम पर खरीदा गया सामान घरेलू बाजार में न बेचा जाए।
Highlights
- सरकार ने इनवेंटरी आधारित ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट फ्रेमवर्क लागू किया।
- केवल कन्फर्म एक्सपोर्ट ऑर्डर मिलने पर ही सामान खरीदा जा सकेगा।
- निर्यात के लिए खरीदा गया माल भारतीय बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी।
- विदेशी निवेश वाली कंपनियों को EOR के रूप में पंजीकरण कराना होगा।
- भारतीय विक्रेताओं को केवल भारत में निर्मित वस्तुएं ही उपलब्ध करानी होंगी।
सरकार ने लागू किया नया एक्सपोर्ट फ्रेमवर्क
सरकार ने बुधवार को इनवेंटरी आधारित ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट फ्रेमवर्क को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया। इससे पहले 23 जुलाई को सरकार ने केवल निर्यात के उद्देश्य से इनवेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी थी।
इस व्यवस्था के तहत विदेशी हिस्सेदारी वाली ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में निर्यात के लिए वेयरहाउस बना सकेंगी और सामान का भंडारण कर सकेंगी। हालांकि, इस स्टॉक को किसी भी स्थिति में भारतीय बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी।
पक्के निर्यात ऑर्डर पर ही होगी खरीद
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार, विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां केवल उन ऑर्डर के लिए भारत में सामान खरीद सकेंगी, जिनका निर्यात ऑर्डर पहले से पुष्टि हो चुका होगा।
इसका मतलब है कि कंपनियां भविष्य में संभावित ऑर्डर की उम्मीद में पहले से बड़ी मात्रा में माल खरीदकर स्टॉक नहीं कर सकेंगी। सरकार ने यह कदम खुदरा व्यापारियों की उन चिंताओं को दूर करने के लिए उठाया है, जिनमें आशंका जताई गई थी कि निर्यात के नाम पर खरीदा गया सामान घरेलू बाजार में बेचा जा सकता है।
EOR के रूप में कराना होगा पंजीकरण
नए नियमों के तहत विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल निर्यात के लिए माल का भंडारण करने के उद्देश्य से सरकार के साथ Exporter-on-Record (EOR) के रूप में ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा।
केवल पंजीकृत EOR के माध्यम से ही इन्वेंटरी आधारित निर्यात परिचालन किया जा सकेगा। EOR को वैध आयात-निर्यात कोड (IEC) और जीएसटी पहचान संख्या (GSTIN) रखना अनिवार्य होगा।
भारतीय विक्रेताओं से ऐसे होगी खरीद
पंजीकृत EOR केवल कन्फर्म विदेशी ऑर्डर मिलने के बाद भारतीय Seller-on-Record (SOR) से भारत में निर्मित वस्तुओं की खरीद करेगा।
भारतीय विक्रेताओं की जिम्मेदारी होगी कि वे केवल भारत में निर्मित उत्पाद उपलब्ध कराएं और वस्तुओं की मूल उत्पत्ति (Origin) की पुष्टि भी करें।
ईओआर निभाएगा पूरी निर्यात प्रक्रिया की जिम्मेदारी
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, पंजीकृत EOR विदेशी बाजारों तक भारतीय विक्रेताओं की पहुंच आसान बनाएगा। इसके साथ ही निम्नलिखित जिम्मेदारियां भी EOR के पास होंगी:
- निर्यात दस्तावेज तैयार करना
- सीमा शुल्क (Customs) की औपचारिकताएं पूरी करना
- गंतव्य देश के नियमों का पालन
- उत्पाद परीक्षण और प्रमाणन
- पैकेजिंग और लेबलिंग
- लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी
- रिवर्स लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन
अलग कानूनी इकाई बनानी होगी
अधिसूचना के अनुसार, EOR के रूप में काम करने वाली इकाई को अलग कानूनी संस्था के रूप में स्थापित करना होगा। पंजीकरण या संशोधन के समय कंपनी को अपनी शेयरधारिता संरचना और ई-कॉमर्स कंपनी के साथ स्वामित्व एवं नियंत्रण संबंधी पूरी जानकारी भी देनी होगी।
खुदरा कारोबारियों की चिंता दूर करने की कोशिश
सरकार ने इन नियमों के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि निर्यात के लिए खरीदा गया माल घरेलू बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा। इससे स्थानीय खुदरा कारोबारियों की उन आशंकाओं को कम करने की कोशिश की गई है, जिनमें विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा निर्यात के नाम पर घरेलू कारोबार प्रभावित होने की चिंता जताई गई थी।


