भारत की होलिस्टिक हेल्थ दृष्टि ITW समिट में प्रमुख चर्चा बनी, जहाँ डिजिटल तकनीक और आयुष जैसे पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान का संगम कर स्वास्थ्य सेवाओं को निवारक और समग्र बनाने पर जोर दिया गया।
भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता बोझ और बदलती स्वास्थ्य जरूरतों के बीच, नीति निर्माता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब एक ऐसे मॉडल की ओर अग्रसर हैं, जो आधुनिक तकनीक और देश की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली का समन्वय करता है। यह दृष्टि Illness to Wellness Foundation द्वारा आयोजित 4वें वार्षिक समिट “Advancing Holistic Health through Innovation, Technology, and Tradition” में प्रमुख रूप से सामने आई। इस समिट में सरकार और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भारत में स्वास्थ्य सेवा को केवल उपचार तक सीमित न रखते हुए, रोग निवारण और पूर्ण कल्याण की दिशा में कदम बढ़ाने की रूपरेखा साझा की।
भारत की पारंपरिक प्रणालियों का आधुनिक स्वास्थ्य में योगदान

समिट की शुरुआत करते हुए, प्रतापराव गनपत राव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय, ने कहा कि भारत की पारंपरिक प्रणालियाँ—आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने बताया कि जब इन प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ जोड़ा जाता है, तो स्वास्थ्य केवल उपचार तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूर्ण कल्याण की दिशा में बढ़ता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। इसलिए, स्वास्थ्य की शुरुआत घर से होनी चाहिए—दैनिक आदतों और निवारक उपायों के माध्यम से—साथ ही तकनीक का उपयोग कर पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से मान्यता और वैश्विक स्तर पर प्रसारित किया जा सकता है।
राजेश भूषण, पूर्व सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और चेयरपर्सन, Illness to Wellness Foundation, ने कहा कि स्वास्थ्य को केवल उपचार तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें निवारक, प्रचारक, पल्लीय और पुनर्वासात्मक पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए, जिनमें से कई सामुदायिक स्तर पर आधारित हैं। उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैसे ABDM और ABHA, और AI तकनीक की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जो स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता, इंटरऑपरेबिलिटी और पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
समेकित दृष्टिकोण: तकनीक और परंपरा का मिलन

अनिल राजपूत, चेयरपर्सन, Advisory Council, Illness to Wellness Foundation, ने कहा कि परंपरागत ज्ञान, आधुनिक चिकित्सा और उभरती तकनीकों का एकीकरण ही एक प्रमाण-आधारित और पैमाने पर लागू होने योग्य स्वास्थ्य मॉडल की कुंजी है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि केवल नीति संरेखण पर्याप्त नहीं है; सामुदायिक जागरूकता और व्यवहार में बदलाव ही बीमारियों से स्वास्थ्य की ओर परिवर्तन की असली ताकत है।
डॉ. मनोज नेसरी, वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी, CGHS, स्वास्थ्य मंत्रालय, ने भारतीय परंपरागत स्वास्थ्य अवधारणाओं जैसे आरोग्य और स्वास्थ पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि वास्तविक स्वास्थ्य केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति वह है जो शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से संतुलित, पोषित और प्राकृतिक स्थिति के अनुरूप हो, साथ ही समाज और पर्यावरण में सकारात्मक योगदान देता हो।
डॉ. टी.एस. क्लेर, चेयरमैन, BLK-Max Heart & Vascular Institute, ने कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली को केवल रोगों के इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए; लोगों में निवारक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
डॉ. रवि गौर, सह-अध्यक्ष, FICCI Digital Health Task Force, ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सजगता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी की संस्कृति बनाना बेहद महत्वपूर्ण है।
युवाओं को शामिल करने की पहल: ड्राइंग प्रतियोगिता
समिट का एक आकर्षक हिस्सा था छात्र ड्राइंग प्रतियोगिता, जो Illness to Wellness Foundation की जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पिछले तीन वर्षों में यह पहल NCR क्षेत्र के 150+ स्कूलों और लगभग 40,000 छात्रों तक पहुंच चुकी है।
इस साल प्रतियोगिता में 50+ स्कूलों के छात्र शामिल हुए। छात्रों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, वायु प्रदूषण और पर्यावरण स्थिरता जैसे विषयों पर रचनात्मक चित्र प्रस्तुत किए। विशेष रूप से, विशेष जरूरतों वाले बच्चों की भागीदारी ने समावेशिता को बढ़ावा दिया। विजेताओं को पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मानित किया गया और चुनिंदा चित्रों का प्रदर्शन किया गया।
मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल स्वास्थ्य पर गहन चर्चाएँ
समिट में कई थीमेटिक सत्र भी आयोजित किए गए:
- Mindful Living: Work, Learning & Life में मानसिक स्वास्थ्य
विशेषज्ञों ने बढ़ते तनाव, बर्नआउट और भावनात्मक सहनशीलता की चुनौतियों पर चर्चा की। कार्यस्थल और शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। - Digital Health for Prevention and Well-being
इस सत्र में डिजिटल स्वास्थ्य और AI की भूमिका पर चर्चा हुई। टेलीमेडिसिन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स न केवल उपचार में मददगार, बल्कि निवारक स्वास्थ्य उपायों के लिए भी जरूरी हैं। - Integrating Traditional Practices for a Healthy Lifestyle
योग, ध्यान, आयुर्वेद और पोषण जैसी पारंपरिक प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में कैसे जोड़ा जा सकता है, इस पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। डिजिटल माध्यमों के माध्यम से इन्हें सुलभ और स्केलेबल बनाने पर भी जोर दिया गया।
भारत के स्वास्थ्य भविष्य की सम्मिलित दृष्टि

समिट ने यह स्पष्ट किया कि भारत में स्वास्थ्य का भविष्य केवल तकनीक या परंपरा पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि इन दोनों का सहयोग और समेकन ही रास्ता होगा।
- बीमारी-उन्मुख से स्वास्थ्य-केंद्रित मानसिकता की ओर बदलाव
- अस्पताल-केंद्रित से सामुदायिक स्वास्थ्य की दिशा
- एकीकृत और बहु-स्तरीय स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण
4वें ITW समिट ने यह संदेश मजबूत किया कि भारत की स्वास्थ्य यात्रा में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संतुलन ही एक समावेशी, निवारक और सतत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की कुंजी है।
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