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Reading: डिजिटल डिफेंस के नए दौर में क्यों हाई अलर्ट पर हैं भारतीय बैंक? “Mythos AI” ने बढ़ाई साइबर सिक्योरिटी की चिंता
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बिजनेस न्यूज़

डिजिटल डिफेंस के नए दौर में क्यों हाई अलर्ट पर हैं भारतीय बैंक? “Mythos AI” ने बढ़ाई साइबर सिक्योरिटी की चिंता

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/26 at 11:08 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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7 Min Read
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नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2026: वैश्विक वित्तीय और तकनीकी दुनिया में एक नया नाम तेजी से चर्चा में है—“Mythos”, जिसे AI कंपनी Anthropic का अब तक का सबसे एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल बताया जा रहा है।

Contents
क्या है Mythos AI और क्यों बढ़ी चिंता?बैंकिंग सेक्टर क्यों सबसे बड़ा टारगेट?भारत में क्यों बढ़ी सतर्कता?क्या सरकार ने उठाए हैं कदम?AI का दोहरा चेहरा: ताकत भी, खतरा भीभारत के लिए अवसर भी बड़ा है1. विशाल टैलेंट पूल2. कम लागत में बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमताAI adoption में सबसे बड़ी समस्या क्या है?आने वाले वर्षों में क्या बदलेगा?भारत के बैंक क्यों हैं सबसे ज्यादा सतर्क?निष्कर्ष: तकनीक और खतरे की नई लड़ाई

जैसे-जैसे यह तकनीक आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे दुनिया भर के बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरे की आशंका भी बढ़ती जा रही है। भारत में स्थिति और भी गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि यहां डिजिटल बैंकिंग और UPI आधारित सिस्टम का उपयोग तेजी से बढ़ा है।

इसी बीच वित्त मंत्रालय और आईटी मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय बैठक ने इस खतरे को लेकर चिंता और भी बढ़ा दी है।

इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने की, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw भी इसमें शामिल रहे।


क्या है Mythos AI और क्यों बढ़ी चिंता?

Anthropic का Mythos मॉडल एक ऐसा AI सिस्टम है जिसे केवल जवाब देने के लिए नहीं बल्कि “reasoning-based explainability” के लिए डिजाइन किया गया है।

इसका मतलब यह है कि यह मॉडल सिर्फ परिणाम नहीं देता, बल्कि यह भी बताता है कि उसने किसी निष्कर्ष तक कैसे पहुंचा।

टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार यह AI सिस्टम Microsoft, AWS और CrowdStrike जैसे बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स के साथ सीमित और नियंत्रित एक्सेस पर काम करता है, ताकि सिस्टम की कमजोरियों को पहचान कर सुरक्षा मजबूत की जा सके।

लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा खतरा दोनों बन जाता है।


बैंकिंग सेक्टर क्यों सबसे बड़ा टारगेट?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर हमेशा से साइबर हमलों का सबसे बड़ा लक्ष्य रहा है।

Blackstraw के CEO Atul Arya के अनुसार:

“जब कोई AI मॉडल इतना शक्तिशाली हो जाता है, तो यह सिर्फ सुरक्षा टीमों के लिए नहीं होता, बल्कि हैकर्स के लिए भी एक टूल बन जाता है।”

बैंकिंग सिस्टम में:

  • भारी मात्रा में संवेदनशील डेटा होता है
  • ट्रांजैक्शन रियल टाइम में होते हैं
  • और हर सेकंड लाखों डिजिटल ऑपरेशन चलते हैं

ऐसे में AI आधारित हमले बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।


भारत में क्यों बढ़ी सतर्कता?

भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम बन चुका है।

UPI, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की वजह से देश में हर दिन अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं।

इसी वजह से भारतीय बैंक अब पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

सरकारी स्तर पर यह माना जा रहा है कि AI आधारित साइबर अटैक भविष्य में पारंपरिक हैकिंग से कई गुना ज्यादा जटिल और तेज हो सकते हैं।


क्या सरकार ने उठाए हैं कदम?

सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह तय किया गया कि:

  • बैंकिंग सिस्टम में AI आधारित सुरक्षा को बढ़ाया जाएगा
  • साइबर थ्रेट मॉनिटरिंग को रियल टाइम बनाया जाएगा
  • और critical infrastructure के लिए नए डिजिटल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे

सरकार का मानना है कि इस समय सबसे जरूरी चीज “pre-emptive cybersecurity” है, यानी हमला होने से पहले उसे रोकना।


AI का दोहरा चेहरा: ताकत भी, खतरा भी

Mythos जैसे AI मॉडल्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे बहुत तेजी से निर्णय लेने और समझाने की क्षमता रखते हैं।

लेकिन यही क्षमता गलत हाथों में खतरनाक भी हो सकती है।

Atul Arya के अनुसार, यह तकनीक:

  • एक तरफ सिस्टम को सुरक्षित कर सकती है
  • लेकिन दूसरी तरफ कमजोरियों को भी उजागर कर सकती है

यानी यह “double-edged sword” की तरह काम करती है।


भारत के लिए अवसर भी बड़ा है

हालांकि जोखिमों के बीच भारत के लिए एक बड़ा अवसर भी मौजूद है।

Atul Arya का मानना है कि भारत वैश्विक AI इकोसिस्टम में एक “execution hub” बन सकता है।

उनके अनुसार भारत के पास दो बड़ी ताकतें हैं:

1. विशाल टैलेंट पूल

भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा trained tech workforce है, जो AI सिस्टम्स को deploy करने में सक्षम है।

2. कम लागत में बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता

डेटा सेंटर, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सपोर्ट के लिए भारत एक cost-efficient hub बन चुका है।


AI adoption में सबसे बड़ी समस्या क्या है?

Enterprise AI को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आज केवल लगभग 3% AI pilot projects ही वास्तव में production level तक पहुंच पाते हैं।

इसका मुख्य कारण है:

  • कंपनियों का core systems में AI को लेकर डर
  • गलत निर्णय का जोखिम
  • और governance की कमी

कंपनियां अक्सर छोटे और low-risk use cases पर AI का प्रयोग करती हैं, जिससे इसका असली ROI सामने नहीं आ पाता।


आने वाले वर्षों में क्या बदलेगा?

AI विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 3 से 5 वर्षों में AI का उपयोग पूरी तरह बदल जाएगा।

भविष्य में:

  • AI सिर्फ सुझाव नहीं देगा
  • बल्कि खुद निर्णय भी लेगा
  • और “Agentic AI” सिस्टम्स के रूप में काम करेगा

इसका मतलब होगा कि AI सिस्टम सीधे user के behalf पर action ले सकेंगे।


भारत के बैंक क्यों हैं सबसे ज्यादा सतर्क?

भारतीय बैंक इस समय इसलिए हाई अलर्ट पर हैं क्योंकि:

  • डिजिटल ट्रांजैक्शन का स्केल बहुत बड़ा है
  • साइबर हमले लगातार बढ़ रहे हैं
  • और AI आधारित खतरे अभी पूरी तरह समझे नहीं गए हैं

बैंक अब अपने core systems को AI-ready बनाने के साथ-साथ cyber-resilient भी बना रहे हैं।


निष्कर्ष: तकनीक और खतरे की नई लड़ाई

Mythos जैसे AI मॉडल यह दिखाते हैं कि तकनीक कितनी तेजी से विकसित हो रही है।

लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट है कि जितनी तेजी से AI आगे बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से साइबर सुरक्षा को भी evolve करना होगा।

भारत जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां innovation और risk दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इस AI क्रांति को सिर्फ अपनाता है या इसे वैश्विक नेतृत्व में बदल देता है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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