भारत में डीजल की कीमतें एक बार फिर चर्चा में हैं। 18 मई 2026 को मुंबई में डीजल का रेट ₹93.14 प्रति लीटर दर्ज किया गया। पिछले दिन के मुकाबले इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन पिछले 10 दिनों में डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस दौरान मुंबई में डीजल की कीमत ₹90.03 से लेकर ₹93.14 प्रति लीटर के बीच रही।
देशभर में डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत, रुपये की स्थिति, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स और स्थानीय वैट (VAT) पर निर्भर करती हैं। यही वजह है कि हर राज्य और शहर में डीजल का रेट अलग-अलग होता है।
भारत में डेली फ्यूल प्राइस सिस्टम कैसे काम करता है?
भारत में 15 जून 2017 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रोजाना बदलाव की व्यवस्था लागू की गई थी। इससे पहले तेल कंपनियां हर 15 दिन में कीमतों की समीक्षा करती थीं। सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मानना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में रोजाना बदलती क्रूड ऑयल कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए।
रोजाना कीमत अपडेट होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अचानक बड़े दाम बढ़ने का झटका कम हो जाता है। अगर हर 15 दिन में संशोधन हो, तो कीमतों में एक साथ बड़ा अंतर देखने को मिलता है, जिससे आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव बढ़ता है।
आज भारत में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां रोज सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं।
आज देश के प्रमुख शहरों में डीजल के दाम
देश के अलग-अलग शहरों में डीजल की कीमतों में अंतर साफ दिखाई देता है। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और लोकल टैक्स हैं।
| शहर | डीजल कीमत (₹/लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹90.67 | कोई बदलाव नहीं |
| मुंबई | ₹93.14 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹95.13 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹95.25 | कोई बदलाव नहीं |
| गुरुग्राम | ₹90.94 | +₹0.05 |
| नोएडा | ₹90.99 | -₹0.21 |
| बेंगलुरु | ₹94.10 | कोई बदलाव नहीं |
| भुवनेश्वर | ₹96.11 | +₹0.40 |
| चंडीगढ़ | ₹85.25 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹98.96 | कोई बदलाव नहीं |
| जयपुर | ₹92.90 | -₹0.13 |
| लखनऊ | ₹91.01 | +₹0.32 |
| पटना | ₹94.97 | -₹0.13 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹99.38 | -₹0.07 |
इन आंकड़ों से साफ है कि दक्षिण भारत और कुछ पूर्वी राज्यों में डीजल अपेक्षाकृत महंगा बना हुआ है। वहीं चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित क्षेत्रों में टैक्स कम होने के कारण रेट नीचे हैं।
डीजल की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर किसका पड़ता है?
1. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में Brent Crude और WTI Crude की कीमतों में बदलाव सीधे भारत के फ्यूल रेट को प्रभावित करता है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का दबाव बनता है।
2. डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
भारत तेल का भुगतान डॉलर में करता है। ऐसे में अगर रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा पड़ता है। पिछले कुछ महीनों में रुपये पर दबाव बढ़ने से तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपया और कमजोर होता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
3. केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स
डीजल की कीमत का बड़ा हिस्सा टैक्स होता है। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जबकि राज्य सरकारें VAT वसूलती हैं। यही वजह है कि हर राज्य में कीमतें अलग हैं।
कुछ राज्यों ने राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स दरें ऊंची रखी हैं, जिससे वहां डीजल ज्यादा महंगा है।
डीजल महंगा होने का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?
डीजल सिर्फ वाहनों का ईंधन नहीं है। इसका सीधा संबंध देश की सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम से है। ट्रक, बस, खेती की मशीनें और माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर करता है।
अगर डीजल महंगा होता है, तो इसका असर इन चीजों पर दिख सकता है:
- सब्जियों और फल की कीमत
- ट्रांसपोर्ट खर्च
- बस और टैक्सी किराया
- FMCG उत्पादों की कीमत
- खेती की लागत
- ऑनलाइन डिलीवरी चार्ज
यानी डीजल महंगा होने का असर धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।
क्या आने वाले दिनों में डीजल और महंगा हो सकता है?
ऊर्जा बाजार के जानकारों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता और कमजोर रुपये की वजह से आने वाले समय में तेल कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
अगर Brent crude लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि सरकार महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए टैक्स कटौती जैसे कदम भी उठा सकती है।
भारत में सबसे महंगा और सबसे सस्ता डीजल कहां?
ताजा आंकड़ों के मुताबिक तिरुवनंतपुरम में डीजल करीब ₹99.38 प्रति लीटर पहुंच चुका है, जो प्रमुख शहरों में सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में डीजल करीब ₹85.25 प्रति लीटर है।
यह अंतर दिखाता है कि टैक्स स्ट्रक्चर का फ्यूल प्राइस पर कितना बड़ा असर होता है।
क्या रोजाना डीजल कीमत बदलना सही फैसला था?
विशेषज्ञ मानते हैं कि डेली प्राइस रिवीजन सिस्टम से बाजार ज्यादा पारदर्शी हुआ है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंचता है। हालांकि आम लोगों को रोजाना कीमत बदलने की वजह से भ्रम भी होता है।
लेकिन लंबी अवधि में यह सिस्टम तेल कंपनियों और सरकार दोनों के लिए ज्यादा संतुलित माना जाता है।
निष्कर्ष
18 मई 2026 को मुंबई में डीजल ₹93.14 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, रुपये की कमजोरी और टैक्स स्ट्रक्चर की वजह से आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। डीजल की कीमत सिर्फ वाहन चालकों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के लिए अहम संकेत मानी जाती है।
स्रोत: Goodreturns, तेल विपणन कंपनियों के दैनिक मूल्य अपडेट
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