Dharmendra Pradhan Resigns: देशभर में NEET पेपर लीक और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस मुद्दे का इस्तेमाल देशविरोधी ताकतें भ्रम फैलाने और माहौल बिगाड़ने के लिए करें। ऐसे में उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया है। आइए जानते हैं कि किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद संविधान के तहत आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।
धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को सौंपा इस्तीफा
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से NEET परीक्षा विवाद को लेकर लगातार अफवाहें फैलाई जा रही थीं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बन रही थी।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वे नहीं चाहते कि इस संवेदनशील मुद्दे का फायदा उठाकर कोई भी देशविरोधी तत्व या असामाजिक शक्तियां देश का माहौल खराब करें। इसी कारण उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
NEET विवाद के बाद बढ़ा था दबाव
बीते कई सप्ताह से देशभर में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन हुए और सोशल मीडिया पर भी शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए।
विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा था। ऐसे माहौल में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
भारत के संविधान में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य के इस्तीफे की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 75 के अंतर्गत संचालित होती है।
1. प्रधानमंत्री को सौंपा जाता है इस्तीफा
कोई भी केंद्रीय मंत्री अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए देता है। सामान्यतः इस्तीफा लिखित रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाता है।
2. प्रधानमंत्री करते हैं समीक्षा
प्रधानमंत्री इस्तीफे पर विचार करते हैं। यदि वे इसे स्वीकार करने का निर्णय लेते हैं, तो इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।
3. राष्ट्रपति देते हैं अंतिम मंजूरी
संविधान के अनुच्छेद 75(2) के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बने रहते हैं। व्यवहार में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति भवन की ओर से आधिकारिक अधिसूचना या प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाती है।
4. मंत्रालय का प्रभार दूसरे मंत्री को सौंपा जाता है
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद प्रधानमंत्री संबंधित मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार किसी अन्य कैबिनेट मंत्री को दे सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर प्रधानमंत्री स्वयं भी कुछ समय के लिए मंत्रालय अपने पास रख सकते हैं।
5. बाद में होती है नए मंत्री की नियुक्ति
जब भी कैबिनेट विस्तार या फेरबदल होता है, तब उस मंत्रालय के लिए नए केंद्रीय मंत्री की नियुक्ति की जाती है। नए मंत्री को राष्ट्रपति पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं।
क्या इस्तीफा देते ही मंत्री पद समाप्त हो जाता है?
नहीं। केवल इस्तीफा भेज देने से मंत्री का कार्यकाल तत्काल समाप्त नहीं होता। मंत्री का इस्तीफा तब प्रभावी माना जाता है जब प्रधानमंत्री उसकी अनुशंसा करते हैं और राष्ट्रपति उसे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लेते हैं। इसके बाद ही आधिकारिक अधिसूचना जारी होती है और मंत्रालय का प्रभार दूसरे मंत्री को सौंपा जाता है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक घोषणा पर रहेगी। यदि इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार किसी अन्य वरिष्ठ मंत्री को दिया जा सकता है। इसके बाद भविष्य में होने वाले कैबिनेट विस्तार या फेरबदल में नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री की नियुक्ति की जाएगी।
नोट: यह लेख उपलब्ध दावों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा संवैधानिक रूप से तभी प्रभावी माना जाता है जब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर उसे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लें।


