Income Tax Return: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख नजदीक आने के साथ ही लाखों टैक्सपेयर्स के सामने एक बड़ा सवाल है—क्या खुद रिटर्न फाइल करना सही रहेगा या किसी टैक्स एक्सपर्ट (CA/Tax Consultant) की मदद लेनी चाहिए? पिछले कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने ITR फाइलिंग प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। पोर्टल पर प्री-फिल्ड डेटा, AIS, TIS और Form 26AS जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं AI आधारित फीचर्स भी टैक्सपेयर्स की मदद कर रहे हैं। इसके बावजूद कई मामलों में छोटी-सी गलती भी आयकर विभाग के नोटिस की वजह बन सकती है।
अगर आपकी आय केवल सैलरी से है और टैक्स प्रोफाइल सामान्य है, तो आप खुद ITR दाखिल कर सकते हैं। लेकिन यदि आपकी आय के कई स्रोत हैं, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो, विदेशी संपत्ति या बिजनेस इनकम शामिल है, तो टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
कब खुद ITR फाइल कर सकते हैं?
यदि आप एक सैलरीड कर्मचारी हैं और आपकी आय का मुख्य स्रोत केवल वेतन है, तो आयकर विभाग का ऑनलाइन पोर्टल आपके लिए काफी आसान है। प्री-फिल्ड जानकारी के कारण अधिकांश विवरण पहले से उपलब्ध रहते हैं, जिससे रिटर्न भरने में ज्यादा परेशानी नहीं होती।
ऐसे टैक्सपेयर्स आमतौर पर खुद ITR फाइल कर सकते हैं यदि:
- केवल सैलरी से आय होती है।
- बैंक ब्याज जैसी सीमित अतिरिक्त आय है।
- टैक्स कटौती (TDS) सही तरीके से दिखाई दे रही है।
- कोई कैपिटल गेन या बिजनेस इनकम नहीं है।
- विदेशी संपत्ति या विदेशी आय नहीं है।
किन लोगों को टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए?
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों की वित्तीय स्थिति थोड़ी जटिल है, उनके लिए पेशेवर सलाह लेना बेहतर रहता है।
इन मामलों में टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है:
- शेयर बाजार से कैपिटल गेन।
- म्यूचुअल फंड, REITs या InvITs में निवेश।
- डेरिवेटिव (F&O) ट्रेडिंग।
- क्रिप्टोकरेंसी से आय।
- बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम।
- विदेशी बैंक खाते, विदेशी संपत्ति या विदेशी आय।
- कई प्रकार की टैक्स छूट और डिडक्शन का दावा।
अब ITR फाइल करना सिर्फ औपचारिकता नहीं
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जहां ITR फाइल करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया माना जाता था, वहीं अब ऐसा नहीं है। आज अधिकांश निवेशक अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करते हैं और हर एसेट पर टैक्स नियम अलग-अलग लागू होते हैं।
अगर रिटर्न में किसी आय का खुलासा नहीं किया गया, गलत ITR फॉर्म चुन लिया गया या कोई महत्वपूर्ण जानकारी छूट गई, तो आयकर विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है। ऐसे में टैक्स भर देने के बावजूद परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अलग-अलग निवेश पर अलग टैक्स नियम
आज के समय में निवेश के विकल्प काफी बढ़ गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- शेयर बाजार
- म्यूचुअल फंड
- REITs
- InvITs
- बिजनेस ट्रस्ट
- विदेशी निवेश
- वर्चुअल डिजिटल एसेट (Cryptocurrency)
इन सभी पर टैक्स की गणना और रिपोर्टिंग के नियम अलग-अलग हैं। इसलिए गलत जानकारी या अधूरी रिपोर्टिंग भविष्य में विवाद का कारण बन सकती है।
AIS, Form 26AS और TIS जरूर करें चेक
भले ही आपने किसी टैक्स एक्सपर्ट की मदद ली हो, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी टैक्सपेयर की ही होती है। इसलिए ITR जमा करने से पहले इन दस्तावेजों का मिलान जरूर करें:
- AIS (Annual Information Statement)
- Form 26AS
- TIS (Taxpayer Information Summary)
इन दस्तावेजों में आपकी आय, TDS, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी होती है। यदि इनमें और ITR में अंतर पाया जाता है तो भविष्य में नोटिस मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
आखिरी तारीख का इंतजार न करें
ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि अब बेहद करीब है। यदि आपने अभी तक अपना रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द प्रक्रिया पूरी कर लें। इससे पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों और जल्दबाजी में होने वाली गलतियों से बचा जा सकता है।
यदि आपकी आय सामान्य है तो आप स्वयं रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। वहीं, जटिल निवेश या कई आय स्रोत होने पर टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।


