Delhi DTC Bus Strike: दिल्ली में डीटीसी बस ड्राइवरों और कंडक्टरों की हड़ताल का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में डीटीसी बसों के सड़कों से दूर रहने के कारण दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए दिल्ली मेट्रो, ऑटो, कैब और परिवहन के दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ भी बढ़ी है।
हड़ताल के बीच यात्रियों को राहत देने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने अपनी सेवाओं में अतिरिक्त ट्रेनें शामिल की हैं। डीएमआरसी ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप संचालित की गई हैं और यह व्यवस्था गुरुवार को भी जारी रहेगी।
डीटीसी बस हड़ताल का दिल्ली के ट्रांसपोर्ट पर असर
डीटीसी कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर दिल्ली की रोजमर्रा की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है। डीटीसी की बसें दिल्ली के अलग-अलग इलाकों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में बसों की उपलब्धता कम होने से नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और दूसरे यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
पीक ऑवर के दौरान इसका असर और ज्यादा दिखाई दे रहा है। जिन यात्रियों के पास बस के अलावा मेट्रो का विकल्प है, वे बड़ी संख्या में मेट्रो का रुख कर रहे हैं। इससे कई स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या बढ़ गई है और ट्रेनों में भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ देखने को मिल रही है।
यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मेट्रो ने बढ़ाई सेवाएं
डीटीसी बसों की हड़ताल के कारण दिल्ली मेट्रो पर अतिरिक्त दबाव को देखते हुए डीएमआरसी ने ट्रेनों की संख्या बढ़ाई है। बुधवार को नेटवर्क पर अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप संचालित की गईं। इनमें जरूरत के अनुसार दिन के समय आठ अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की व्यवस्था भी शामिल रही।
डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि बस हड़ताल के कारण यात्रियों की अतिरिक्त मांग को देखते हुए की गई यह व्यवस्था गुरुवार को भी जारी रहेगी। इसका उद्देश्य डीटीसी बसों के प्रभावित संचालन के बीच मेट्रो से यात्रा करने वाले अतिरिक्त यात्रियों को संभालना है।
स्कूल ट्रांसपोर्ट पर भी पड़ा हड़ताल का असर
डीटीसी बसों की हड़ताल का प्रभाव स्कूल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर भी दिखाई दिया है। कुछ स्कूलों में बस सेवाओं को लेकर अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्कूल प्रशासन को कुछ रूट पर परिवहन व्यवस्था को लेकर वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े हैं।
सरदार पटेल विद्यालय की ओर से अभिभावकों को बताया गया कि हड़ताल के कारण कुछ क्षेत्रों में स्कूल बसों के संचालन की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। स्कूल ने वापसी यात्रा के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था करने की जानकारी दी और अभिभावकों से कहा कि बस सेवा सामान्य होने तक वे संबंधित ‘बस दीदी’ से अपडेट लेते रहें।
डीटीसी ने वर्ष 2023 के शैक्षणिक सत्र से दिल्ली के स्कूलों को बसें उपलब्ध कराना बंद कर दिया था। इससे पहले डीटीसी स्कूलों के लिए 350 से अधिक बसें उपलब्ध कराता था। सार्वजनिक परिवहन के लिए अपने बेड़े की बढ़ती मांग को इसके पीछे प्रमुख वजह बताया गया था।
वेतन और सुविधाओं को लेकर कर्मचारियों की मांग
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे ड्राइवर और कंडक्टर वेतन, महंगाई भत्ता, सामाजिक सुरक्षा और काम करने की परिस्थितियों में सुधार सहित कई मांगें उठा रहे हैं।
यूनियन का दावा है कि डीटीसी बसों के ड्राइवर और कंडक्टर को वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के आधार पर करीब 862 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं। यूनियन ने इस भुगतान को दिल्ली जैसे बड़े शहर में भारी बसों का संचालन करने वाले योग्य कर्मचारियों के लिए अपर्याप्त बताया है।
यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी के मुताबिक, नियमों के अनुसार हर छह महीने में संशोधित होने वाला महंगाई भत्ता पिछले करीब डेढ़ साल से नहीं बढ़ाया गया है। उनका यह भी कहना है कि पांच साल में मिलने वाला बेसिक इंक्रीमेंट आखिरी बार 2019 में लागू किया गया था और 2024 से लंबित है।
क्या हैं डीटीसी ड्राइवर और कंडक्टरों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की ओर से रखी गई प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- समान काम के लिए कम से कम 2,000 रुपये प्रतिदिन का भुगतान।
- सभी सरकारी छुट्टियों के लिए भुगतान।
- वार्षिक बोनस की व्यवस्था।
- मेडिकल सुविधा समेत सामाजिक सुरक्षा लाभ।
- वेतन में आवश्यक संशोधन।
- काम करने की परिस्थितियों में सुधार।
- ओवरटाइम का भुगतान और अन्य कर्मचारी सुविधाएं।
यूनियन का कहना है कि नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने वाले कर्मचारियों की ओर से भी मेडिकल सुविधाओं और ओवरटाइम भुगतान जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
करीब 12 हजार ड्राइवर-कंडक्टर हड़ताल में शामिल होने का दावा
दिल्ली में डीटीसी बसों की संख्या करीब 6,840 बताई जाती है। यूनियन अध्यक्ष ललित चौधरी के अनुमान के मुताबिक, बुधवार को करीब 12,000 ड्राइवर और कंडक्टर हड़ताल में शामिल हुए।
हालांकि, हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की संख्या को लेकर यूनियन के दावे को संबंधित आधिकारिक आंकड़ों के साथ अलग-अलग देखा जाना चाहिए। हड़ताल का वास्तविक असर बसों के संचालन और रूटवार उपलब्धता पर निर्भर करता है।
परिवहन मंत्री ने कर्मचारियों से की हड़ताल खत्म करने की अपील
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने डीटीसी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने वाले निजी कंसेशनियर को ड्राइवरों की चिंताओं को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया है।
मंत्री ने कर्मचारियों से बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनकी समस्याएं सुनने के लिए तैयार है और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
दूसरी ओर, यूनियन अध्यक्ष ललित चौधरी का कहना है कि अभी तक सरकार के किसी प्रतिनिधि ने यूनियन से संपर्क नहीं किया है। उनके मुताबिक कर्मचारियों का विरोध शांतिपूर्ण है और यूनियन ने बसें नहीं चलाने का फैसला किया है।
गुरुवार को भी यात्रियों को हो सकती है परेशानी
यदि डीटीसी कर्मचारियों की हड़ताल गुरुवार को भी जारी रहती है, तो दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर इसका असर बना रह सकता है। खासकर सुबह और शाम के पीक ऑवर में बसों की कमी के कारण मेट्रो और अन्य परिवहन साधनों पर यात्रियों का दबाव बढ़ सकता है।
इस स्थिति को देखते हुए डीएमआरसी ने अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं की व्यवस्था जारी रखने की बात कही है। यात्रियों के लिए फिलहाल मेट्रो सबसे प्रमुख वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन साधनों में से एक बनी हुई है। वहीं, स्कूल और अन्य संस्थान भी अपने स्तर पर परिवहन व्यवस्था को संभालने के लिए वैकल्पिक इंतजाम कर रहे हैं।
Source: उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित।


