Financial Independence: फाइनेंशियल फ्रीडम यानी आर्थिक आजादी हासिल करना आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल ने Reddit पर अपनी FIRE यात्रा साझा करते हुए बताया कि कैसे छोटी शुरुआत, इनकम बढ़ाने, समझदारी से खर्च करने और कंपाउंडिंग के दम पर उन्होंने 31 साल की उम्र तक करीब ₹7 करोड़ की नेटवर्थ बना ली।
नई दिल्ली: आज के दौर में सिर्फ अच्छी सैलरी कमाना ही काफी नहीं माना जाता। बहुत से युवा चाहते हैं कि एक समय ऐसा आए जब उन्हें पैसों के लिए लगातार काम करने की जरूरत न पड़े। इसी सोच को FIRE यानी Financial Independence, Retire Early कहा जाता है।
सोशल मीडिया और ऑनलाइन कम्युनिटी में कई लोग अपनी FIRE जर्नी शेयर करते हैं। ऐसी ही एक कहानी बेंगलुरु में रहने वाले एक टेक प्रोफेशनल ने Reddit पर साझा की है। उनके दावे के मुताबिक, 31 साल की उम्र तक उनकी नेटवर्थ करीब ₹7 करोड़ पहुंच गई है। करीब एक साल पहले उनकी नेटवर्थ लगभग ₹6 करोड़ थी।
खास बात यह है कि उनकी यह यात्रा किसी बड़े पैतृक धन या शुरुआत से ही बेहद बड़ी सैलरी से नहीं हुई। उन्होंने कॉलेज के बाद छोटी रकम से म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू किया। इसके बाद उन्होंने कमाई बढ़ाने, नौकरी में आगे बढ़ने और अतिरिक्त इनकम के रास्ते तलाशने पर फोकस किया।
26 की उम्र में हासिल किया ₹1 करोड़ का लक्ष्य
इस प्रोफेशनल के मुताबिक, आर्थिक आजादी में उनकी दिलचस्पी कॉलेज के बाद शुरू हुई। शुरुआत में उन्होंने म्यूचुअल फंड में छोटी-छोटी रकम निवेश करनी शुरू की।
लगातार निवेश और बढ़ती कमाई के साथ उनकी संपत्ति में इजाफा होता गया। दावा है कि 26 साल की उम्र में उनकी नेटवर्थ ₹1 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
इसके बाद संपत्ति बढ़ने की रफ्तार और तेज हुई। लगभग तीन साल बाद यानी 29 की उम्र तक उनकी नेटवर्थ ₹5 करोड़ से ज्यादा हो गई। 31 साल की उम्र में यह करीब ₹7 करोड़ पहुंच गई।
सिर्फ खर्च घटाना नहीं, कमाई बढ़ाना जरूरी
इस FIRE जर्नी से सबसे बड़ा सबक उनकी नजर में यह है कि अमीर बनने के लिए सिर्फ खर्च कम करते रहना पर्याप्त नहीं है।
उनका फोकस इनकम बढ़ाने पर रहा। उन्होंने नौकरी बदलने, प्रमोशन हासिल करने और कमाई के दूसरे रास्ते तलाशने की कोशिश की।
उनका मानना है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ छोटी-छोटी खरीदारी रोककर पैसे बचाता रहेगा तो उसकी बचत की एक सीमा होगी। इसके मुकाबले अगर वह अपनी कमाई बढ़ाने की क्षमता विकसित करे तो लंबे समय में ज्यादा बड़ा अंतर पैदा हो सकता है।
टेक स्किल को कमाई के लिए इस्तेमाल किया
प्रोफेशनल ने बताया कि शुरुआत में टेक्नोलॉजी उनकी सबसे मजबूत स्किल नहीं थी। लेकिन उन्होंने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऐसे प्रोडक्ट बनाने के लिए सीखना शुरू किया जिन्हें बाजार में बेचा जा सके।
उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपनी मौजूदा स्किल को सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उदाहरण के लिए, ऐप डेवलपर नए ऐप बनाने की कोशिश कर सकता है। वहीं, किसी व्यक्ति की कम्युनिकेशन और पर्सनैलिटी अच्छी है तो वह कंटेंट क्रिएशन जैसे विकल्प भी तलाश सकता है।
उनका कहना है कि किसी नई स्किल को सीखने में लगाया गया समय पूरी तरह बेकार नहीं जाता। भले ही उससे तुरंत पैसा न मिले, लेकिन भविष्य में वही स्किल किसी दूसरे अवसर में काम आ सकती है।
SaaS और D2C बिजनेस में भी किया प्रयोग
नौकरी के साथ उन्होंने SaaS और D2C बिजनेस में भी हाथ आजमाया। एक समय उन्होंने नियमित नौकरी के बाद रात में काम करते हुए AI की मदद से एक ऐप तैयार करने में करीब तीन महीने लगाए।
हालांकि, यह प्रयोग सफल नहीं रहा। ऐप की मार्केटिंग में उनके कुछ लाख रुपये भी खर्च हुए और पैसा डूब गया।
लेकिन उन्होंने इस असफलता को सिर्फ नुकसान के तौर पर नहीं देखा। उनके मुताबिक, ऐसे प्रयोग उस चीज को खोजने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं जो भविष्य में काम कर सकती है।
15 से ज्यादा बार विदेश यात्रा, फिर भी नई कार नहीं खरीदी
पैसे खर्च करने को लेकर भी उनकी रणनीति दिलचस्प रही है।
उन्होंने बताया कि वह 15 से ज्यादा बार विदेश यात्रा कर चुके हैं क्योंकि उन्हें घूमना पसंद है। लेकिन महंगी या नई कार खरीदने में उनकी दिलचस्पी नहीं है। वह अभी भी अपने पिता की करीब 15 साल पुरानी कार इस्तेमाल करते हैं।
यानी उनका फोकस हर तरह के खर्च को रोकने पर नहीं, बल्कि यह तय करने पर रहा कि पैसा वास्तव में किस चीज पर खर्च करने से उन्हें खुशी मिलती है।
Instagram छोड़ने से बदली खर्च करने की आदत
उनके मुताबिक, सोशल मीडिया से दूरी बनाने का भी उनके वित्तीय जीवन पर बड़ा असर पड़ा।
Instagram छोड़ने के बाद उन्हें दोस्तों और दूसरे लोगों की नई कार, महंगे सामान और विदेश यात्राएं लगातार देखने को नहीं मिलीं। इससे दूसरों के साथ तुलना करने और सिर्फ सोशल स्टेटस के लिए पैसे खर्च करने का दबाव कम हुआ।
यह तरीका उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो सोशल मीडिया देखकर अनजाने में अपनी खर्च करने की आदत बढ़ा लेते हैं।
ESOPs में करीब ₹2 करोड़, लेकिन नेटवर्थ में पूरी रकम नहीं जोड़ी
उनकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा करियर से जुड़ा हुआ है। जिस टेक कंपनी में वह काम करते हैं, वहां उनके पास करीब ₹2 करोड़ के ESOPs होने का दावा है।
हालांकि, उन्होंने अपनी नेटवर्थ की गणना में इन ESOPs की पूरी रकम शामिल नहीं की है। उन्होंने सिर्फ करीब ₹1.5 करोड़ को नेटवर्थ में जोड़ा है।
इसकी वजह यह है कि कंपनी के सार्वजनिक होने या ESOPs की वास्तविक लिक्विडिटी मिलने तक उनकी कीमत बदल सकती है। इसलिए उन्होंने अपनी गणना में कुछ सावधानी बरती।
अनलिस्टेड स्टॉक्स में भी लगाया पैसा
उन्होंने अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों में भी निवेश किया है। इनमें एक कंपनी में करीब ₹40 लाख का निवेश शामिल है।
हालांकि, वह खुद इसे एक जोखिम भरा निवेश मानते हैं। अनलिस्टेड शेयरों में लिक्विडिटी कम हो सकती है और इनकी वैल्यू का आकलन भी लिस्टेड कंपनियों की तुलना में अलग तरीके से होता है।
इसलिए उनकी कहानी को किसी एक निवेश रणनीति की सलाह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
विदेश जाना ही ज्यादा कमाई का एकमात्र रास्ता नहीं
इस प्रोफेशनल ने युवाओं को कमाई बढ़ाने के लिए सिर्फ विदेश जाने पर निर्भर नहीं रहने की बात कही।
उनके मुताबिक, बहुत से युवा मानते हैं कि ज्यादा पैसा कमाने का सबसे आसान रास्ता विदेश जाना है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए विदेश जाना संभव नहीं होता। ऐसे में अपने देश में ही बेहतर नौकरी, नई स्किल, साइड प्रोजेक्ट या बिजनेस के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
उनकी रणनीति भी इसी तरह के अवसरों को तलाशने पर केंद्रित रही।
रुपये की कमजोरी के बीच अमेरिकी शेयरों में निवेश
हाल में उन्होंने रुपये की गिरती कीमत को देखते हुए अमेरिकी ब्लू-चिप स्टॉक्स में निवेश शुरू किया है।
उनकी योजना अगले साल अमेरिकी शेयरों में करीब ₹10-15 लाख और निवेश करने की है। दूसरी ओर, सोना और चांदी उनके पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा नहीं हैं।
यहां भी उनका फोकस किसी एक एसेट में पूरा पैसा लगाने के बजाय अलग-अलग अवसरों को तलाशने पर दिखाई देता है।
दो प्रॉपर्टीज का कर्ज चुकाकर हुए डेट-फ्री
उनकी फाइनेंशियल जर्नी में कर्ज खत्म करना भी एक महत्वपूर्ण कदम रहा।
पिछले साल उन्होंने दो प्रॉपर्टीज का कर्ज चुका दिया, जिसके बाद वह डेट-फ्री हो गए। इनमें से एक फ्लैट उन्होंने करीब दो साल पहले ₹65 लाख में खरीदा था।
उनके अनुसार, अब इस फ्लैट की कीमत करीब ₹1 करोड़ है और इससे लगभग 5% का रेंटल यील्ड मिलता है।
पिछले साल इक्विटी मार्केट में ज्यादा तेजी नहीं होने के कारण उन्होंने प्रॉपर्टी का कर्ज जल्दी चुकाने को इक्विटी में पैसा लगाने से बेहतर विकल्प माना।
पैसे के साथ सेहत को भी प्राथमिकता देने का सबक
इस पूरी यात्रा में सिर्फ पैसे ही महत्वपूर्ण नहीं रहे। पिछले साल वह पिता भी बने और इसे उन्होंने अपने साल की सबसे बड़ी घटना बताया।
बच्चे के जन्म के बाद उनकी सेहत पर ध्यान देना कुछ समय के लिए मुश्किल हुआ। इससे उन्हें महसूस हुआ कि आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने की दौड़ में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना बेहद आसान है।
अब वह ऐसी आदतें अपनाने पर जोर देना चाहते हैं जिनमें आठ घंटे की नींद, नियमित एक्सरसाइज या खेल और पैक्ड फूड से दूरी शामिल हैं।
उनका मानना है कि अच्छी आदतें भी कंपाउंड होती हैं। जिस तरह निवेश में समय के साथ छोटी रकम बड़ा आकार ले सकती है, उसी तरह अच्छी आदतों का असर भी लंबे समय में बढ़ता जाता है।
क्या है ₹7 करोड़ तक पहुंचने का असली मंत्र?
इस टेक प्रोफेशनल की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कोई एक शानदार निवेश नहीं, बल्कि कई छोटी-छोटी वित्तीय आदतों का लगातार पालन करना है।
उनके अनुभव को मोटे तौर पर इन बातों में समझा जा सकता है:
- जल्दी निवेश शुरू करना
- सिर्फ खर्च घटाने के बजाय कमाई बढ़ाना
- नई और कमाई वाली स्किल सीखना
- नौकरी के साथ अतिरिक्त अवसर तलाशना
- असफल बिजनेस प्रयोगों से सीखना
- दूसरों की लाइफस्टाइल देखकर खर्च न करना
- जरूरत के मुताबिक जोखिम लेना
- कर्ज को जल्द खत्म करने पर ध्यान देना
- कंपाउंडिंग को पर्याप्त समय देना
- पैसे के साथ स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देना
जरूरी बात
यह कहानी एक व्यक्ति द्वारा Reddit पर साझा किए गए अनुभव और दावों पर आधारित है। ₹7 करोड़ की नेटवर्थ, ESOPs, प्रॉपर्टी वैल्यू और अन्य निवेश आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे व्यक्तिगत निवेश सलाह या निश्चित वित्तीय सफलता का फॉर्मूला नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी निवेश का फैसला अपनी आय, जोखिम क्षमता, लक्ष्य और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।


