CWG 2026: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की स्टार वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि एक ऐसा संघर्ष भी छिपा था जिसे जानकर हर कोई उनकी हिम्मत को सलाम कर रहा है। मुकाबले के दिन ज्ञानेश्वरी पीरियड्स के पहले दिन के तेज दर्द से जूझ रही थीं, फिर भी उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया और आखिरकार भारत के लिए सिल्वर मेडल जीत लिया।
दर्द के बावजूद नहीं टूटा हौसला
हाल ही में पीटीआई से बातचीत के दौरान ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल मुकाबले के दिन उन्हें पीरियड्स के पहले दिन होने वाले असहनीय दर्द का सामना करना पड़ रहा था। यह उनके करियर का पहला मौका था जब उन्हें पीरियड्स के पहले दिन ही किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में उतरना पड़ा।
उन्होंने कहा कि उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्द नहीं, बल्कि अपना ध्यान लक्ष्य पर बनाए रखना था।
ज्ञानेश्वरी ने कहा,
“मैंने खुद से बार-बार कहा कि मेरा ध्यान नहीं भटकना चाहिए। मेरे लक्ष्य के सामने यह दर्द कुछ भी नहीं है।”
यही सोच पूरे मुकाबले के दौरान उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखी।
पहले भी पीरियड्स के दौरान की थी ट्रेनिंग
ज्ञानेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पहले भी पीरियड्स के दौरान ट्रेनिंग की थी, लेकिन किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट के पहले दिन इस स्थिति का सामना पहली बार हुआ।
उन्होंने बताया कि उनके कोच और परिवार ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया। सभी ने भरोसा दिलाया कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती हैं।
ज्ञानेश्वरी ने कहा कि पहली लिफ्ट सफल होने के बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया और फिर उन्होंने एक-एक कर अपनी सभी लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी कीं।
परिवार और कोच का मिला पूरा साथ
ज्ञानेश्वरी यादव ने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, अपने परिवार, कोच और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के लोगों को दिया।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि हर सफलता के पीछे लंबा संघर्ष छिपा होता है।
ज्ञानेश्वरी ने बताया,
“मेरे माता-पिता ने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया। मेरे पिताजी रोज साइकिल से मुझे जिम लेकर जाते थे। उनका सपना था कि मैं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करूं। आज उनका सपना पूरा हुआ है।”
छत्तीसगढ़ सरकार ने किया सम्मानित
ज्ञानेश्वरी यादव की इस शानदार उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने उनके लिए 30 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्हें पुलिस विभाग में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) के पद पर विशेष नियुक्ति/प्रमोशन देने को भी मंजूरी दी गई है।
राज्य सरकार के इस फैसले की खेल जगत में व्यापक सराहना हो रही है।
अब एशियन गेम्स पर नजर
कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के बाद अब ज्ञानेश्वरी यादव का अगला लक्ष्य सितंबर 2026 में होने वाले एशियन गेम्स हैं। उनका कहना है कि वह अपनी तैयारी को और बेहतर बनाकर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने की कोशिश करेंगी।
उनकी यह कहानी सिर्फ एक मेडल जीतने की नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की मिसाल भी है।


