भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के भीतर अब उन्हें पहले जैसा मजबूत समर्थन नहीं मिल रहा है। टीम के हालिया प्रदर्शन के बाद उनके कोचिंग स्टाइल, फैसलों और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। इतना ही नहीं, कुछ सीनियर खिलाड़ियों ने भी निजी तौर पर उनके काम करने के तरीके पर नाराजगी जाहिर की है। ऐसे में आगामी श्रीलंका दौरा गौतम गंभीर के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
टीम के प्रदर्शन के बाद बढ़ा दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले एक साल में भारतीय टीम के प्रदर्शन ने बीसीसीआई के भीतर गंभीर को लेकर सोच बदल दी है। हाल के टेस्ट मुकाबलों और इंग्लैंड दौरे में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने के कारण बोर्ड के कुछ अधिकारियों और टीम से जुड़े लोगों ने उनके फैसलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
हालांकि, फिलहाल बीसीसीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है गौतम गंभीर पर सबसे बड़ा आरोप?
cricblogger.com की रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों का मानना है कि टीम की हार के बाद गौतम गंभीर अक्सर खिलाड़ियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) या सपोर्ट स्टाफ को जिम्मेदार ठहराते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टीम प्रबंधन के फैसलों की जिम्मेदारी वह कम ही स्वीकार करते हैं।
इसी वजह से बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उनके नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस सोच का असर भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम के माहौल पर भी पड़ रहा है।
सीनियर खिलाड़ियों ने भी जताई नाराजगी
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम के कुछ सीनियर खिलाड़ियों ने निजी बातचीत में पूर्व क्रिकेटरों और बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों के सामने गौतम गंभीर के कोचिंग स्टाइल पर असंतोष व्यक्त किया है।
हालांकि रिपोर्ट में किसी खिलाड़ी का नाम सामने नहीं आया है और न ही बीसीसीआई या खिलाड़ियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है।
श्रीलंका दौरा क्यों माना जा रहा है अहम?
बीसीसीआई के भीतर बदलते माहौल के बीच आगामी श्रीलंका दौरा गौतम गंभीर के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। यदि इस दौरे पर भी भारतीय टीम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाती है, तो उनके कोचिंग कार्यकाल को लेकर सवाल और तेज हो सकते हैं।
हालांकि गंभीर का कार्यकाल 2027 तक का है और माना जा रहा है कि 2027 विश्व कप से पहले बीसीसीआई मुख्य कोच बदलने जैसा बड़ा फैसला जल्दबाजी में नहीं करेगा।
पहले क्यों नहीं उठे थे सवाल?
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार के बाद गौतम गंभीर पर ज्यादा सवाल नहीं उठे थे। उस समय हार की मुख्य जिम्मेदारी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को माना गया था।
लेकिन बाद में जब गंभीर ने टीम के खराब प्रदर्शन की वजह “ट्रांजिशन फेज” को बताया, तब उनकी आलोचना तेज हो गई। आलोचकों का कहना था कि अपने कार्यकाल की शुरुआत में गंभीर ने खुद कहा था कि भारतीय टीम किसी ट्रांजिशन दौर से नहीं गुजर रही है। ऐसे में बाद में दिए गए उनके बयान को लेकर सवाल खड़े हुए।
बीसीसीआई की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
फिलहाल बीसीसीआई ने इन मीडिया रिपोर्ट्स पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौतम गंभीर की ओर से भी इस मामले में कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इन दावों को मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
अगर श्रीलंका दौरे पर भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन करती है, तो गंभीर पर उठ रहे सवाल काफी हद तक शांत हो सकते हैं। वहीं खराब प्रदर्शन की स्थिति में उनके कोचिंग कार्यकाल को लेकर चर्चाएं और तेज होने की संभावना रहेगी।


