Crude Oil Price Update: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने के संकेतों के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में राहत आई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब $90.88 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, WTI क्रूड भी गिरकर $84.02 प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया।
तेल बाजार में यह गिरावट उस समय आई है जब पिछले सप्ताह भू-राजनीतिक तनाव के कारण क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़कर $102 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई थीं। निवेशकों को डर था कि अमेरिका, ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता तनाव दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, अब दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने और बातचीत की संभावनाओं ने बाजार को राहत दी है।
ब्रेंट और WTI क्रूड में आई बड़ी गिरावट
तेल बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार:
- WTI क्रूड: $5.29 यानी करीब 5.92% गिरकर $84.02 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
- ब्रेंट क्रूड: $5.90 यानी करीब 5.90% की गिरावट के साथ $90.88 प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया।
क्रूड की कीमतों में यह गिरावट कई दिनों की तेज उछाल के बाद आई है। पिछले कुछ समय में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी, जिससे कीमतों में तेजी आई थी।
क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में कमी आना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरी रात कोई बड़ा हमला नहीं किया। वहीं, ईरान की तरफ से भी अभी तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की गई है। दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं बढ़ने से बाजार में सप्लाई बाधित होने का डर कम हुआ है।
इसके अलावा ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ओमान के साथ बातचीत भी की है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है।
वेस्ट एशिया में तनाव का तेल बाजार पर असर
मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब के जिजान और यानबू इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे।
इन हमलों में सऊदी अरामको से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
ट्रंप ने क्यों रोके हमले?
अमेरिका के हमलों को लेकर कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम पर भी दबाव बढ़ रहा था।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या कम हो रही थी और अन्य एयर डिफेंस हथियारों के भंडार पर भी असर पड़ा था।
वहीं, अमेरिकी प्रशासन ने बातचीत के विकल्प खुले रखने के संकेत दिए हैं। अमेरिका के UN राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ने सभी विकल्प खुले रखे हैं और बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है।
क्या क्रूड ऑयल की कीमतें और गिरेंगी?
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतों का संबंध सिर्फ डिमांड और सप्लाई से नहीं है, बल्कि इसका बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव है।
उन्होंने कहा कि क्रूड कीमतों में जो प्रीमियम दिखाई दे रहा है, उसका करीब 80 फीसदी हिस्सा मिडिल ईस्ट और गल्फ क्षेत्र की स्थिति से जुड़ा हुआ है।
उनके अनुसार, बाजार इस बात को समझ रहा है कि अमेरिका लंबे समय तक युद्ध में नहीं रहना चाहता। वहीं, ईरान भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर सकता है।
क्रूड ऑयल का अगला टारगेट क्या हो सकता है?
नरेंद्र तनेजा ने कहा कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की दिशा पर निर्भर करेंगी।
उनके मुताबिक:
- अगर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है और कोई समझौता होता है, तो क्रूड ऑयल की कीमतें $80 प्रति बैरल तक गिर सकती हैं।
- अगर सैन्य हमले दोबारा शुरू होते हैं तो कीमतें तेजी से बढ़कर $115 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
उन्होंने अनुमान लगाया कि फिलहाल क्रूड ऑयल की कीमतें $80 से $115 प्रति बैरल के दायरे में रह सकती हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए राहत की खबर है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अगर क्रूड सस्ता रहता है तो:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
- महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
- कंपनियों की लागत घट सकती है।
- रुपये को भी मजबूती मिल सकती है।
हालांकि, अगर मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ता है तो तेल कीमतों में तेजी का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
एनर्जी सेक्टर से जुड़े निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अनिश्चितता है। बाजार की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत, मिडिल ईस्ट की स्थिति और वैश्विक सप्लाई पर बनी रहेगी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक क्रूड ऑयल में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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