Drone Ecosystem in India: भारत तेजी से अपने रक्षा क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य देश में एक ऐसा ग्लोबल लेवल का ड्रोन इकोसिस्टम तैयार करना है, जो भविष्य के युद्धों की जरूरतों को पूरा कर सके। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि आने वाले समय में ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम, लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली तकनीक और मानव रहित रक्षा प्रणालियां सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बनने वाली हैं।
रक्षा सचिव ने यह जानकारी Moneycontrol को दिए एक इंटरव्यू में दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भारत को इन बदलावों के अनुसार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार का फोकस देश में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने के साथ-साथ घरेलू कंपनियों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर है।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका होगी सबसे अहम
राजेश कुमार सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में हुए वैश्विक संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों के दम पर नहीं लड़े जाएंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष और भारत के ऑपरेशन सिंदूर से कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें और जमीन, हवा तथा समुद्र के भीतर काम करने वाले ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म युद्ध की रणनीति को बदल देंगे।
भारत अब इन क्षेत्रों में अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी निर्भरता कम की जा सके और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिले।
ड्रोन और रक्षा तकनीक के लिए तेज खरीद प्रक्रिया
रक्षा सचिव ने बताया कि सरकार ने कम लागत वाली और तेजी से विकसित हो रही रक्षा तकनीकों के लिए फास्ट-ट्रैक ट्रायल और खरीद प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को तेजी से सेना के लिए तकनीक उपलब्ध कराने का मौका देना है।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद इमरजेंसी खरीद प्रक्रिया के तहत करीब 31,000 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों के ऑर्डर दिए गए। इनमें ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और हल्के रडार सिस्टम का बड़ा हिस्सा शामिल था।
सरकार अब भी ड्रोन और नई पीढ़ी की रक्षा तकनीकों के लिए खरीद प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने पर जोर दे रही है।
निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र में बढ़ावा
रक्षा सचिव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों से निजी कंपनियों और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। सरकार चाहती है कि रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को सरकारी संस्थानों के बराबर अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र एक ऐसा बाजार है जहां सरकार सबसे बड़ी खरीदार होती है। इसलिए सरकार कंपनियों को भविष्य की जरूरतों और संभावित ऑर्डर्स के बारे में स्पष्टता देने की कोशिश कर रही है।
इससे नए निवेशकों को रक्षा क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और देश में मजबूत रक्षा उद्योग तैयार होगा।
रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक लाइसेंस तीन गुना से ज्यादा बढ़े
राजेश कुमार सिंह के अनुसार, साल 2015 तक रक्षा क्षेत्र में करीब 250 औद्योगिक लाइसेंस जारी किए गए थे। पिछले एक दशक में यह संख्या बढ़कर 800 से अधिक हो गई है।
उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में नए लाइसेंस जारी हो रहे हैं और वेंचर कैपिटल निवेशक तथा स्टार्टअप्स रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं।
सरकार खासतौर पर उन स्टार्टअप्स को शुरुआती ऑर्डर देने पर ध्यान दे रही है, जिन्हें फंडिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे नई तकनीकों को बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
DRDO के R&D बजट का 25% उद्योग और स्टार्टअप्स के लिए
रक्षा सचिव ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट बजट का 25 फीसदी हिस्सा उद्योगों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने के लिए रखा है।
इसके अलावा देशभर के कई शिक्षण संस्थानों में 11 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए गए हैं, जहां रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर रिसर्च की जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य देश में नई तकनीकों को बढ़ावा देना और रक्षा क्षेत्र में इनोवेशन को मजबूत करना है।
iDEX योजना से बढ़ रहा स्वदेशी रक्षा इनोवेशन
रक्षा मंत्रालय की iDEX (Innovations for Defence Excellence) योजना स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र में नए आइडिया और तकनीक विकसित करने में मदद कर रही है।
इस योजना के तहत कंपनियों को प्रोटोटाइप तैयार करने तक आर्थिक और तकनीकी सहायता दी जाती है। इसके बाद वे सेना और रक्षा मंत्रालय की जरूरतों के अनुसार प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती हैं।
सरकार नई Defence Acquisition Procedure (DAP) के तहत ऐसे प्रावधान भी तैयार कर रही है, जिससे सेना के साथ मिलकर विकसित की गई तकनीकों को शुरुआती वर्षों में ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़े।
iDEX से जुड़े 676 स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2021-22 से 2025-26 तक iDEX योजना के लिए 498.78 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
वहीं, ADITI (Acing Development of Innovative Technologies with iDEX) योजना के लिए 2023-24 से 2025-26 तक 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मार्च 2026 तक:
- 676 स्टार्टअप्स, MSME और इनोवेटर्स iDEX से जुड़े हैं।
- 551 डिजाइन और विकास अनुबंध किए जा चुके हैं।
- DRDO की अत्याधुनिक टेस्टिंग सुविधाएं निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोली गई हैं।
इससे कंपनियों को अपने रक्षा उत्पादों की टेस्टिंग और वैलिडेशन में आसानी हो रही है।
भारत बनेगा ड्रोन और ऑटोनॉमस डिफेंस टेक्नोलॉजी का बड़ा केंद्र
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भरोसा जताया कि सरकार के सुधारों, तेज खरीद प्रक्रिया और निजी क्षेत्र की भागीदारी से भारत आने वाले वर्षों में ड्रोन, मानव रहित रक्षा प्रणालियों और आधुनिक सैन्य तकनीकों के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो सकता है।
भारत में ड्रोन इंडस्ट्री केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कृषि, लॉजिस्टिक्स, सर्वेक्षण, आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है।
ड्रोन इकोसिस्टम के विकास से भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता के साथ-साथ वैश्विक रक्षा बाजार में भी मजबूत पहचान मिल सकती है।


