Crude Oil Price: वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सख्त सैन्य चेतावनी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 7% से अधिक की तेजी के साथ 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात और बिगड़ते हैं तथा OPEC+ उत्पादन बढ़ाने की योजना को टाल देता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में मची हलचल
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। हालिया घटनाओं के बाद निवेशकों को आशंका है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधे चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की खरीदारी तेज हो गई और कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली।
ट्रंप बोले- ईरान को मिलेगा करारा जवाब
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके जवाब में अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित गुटों पर संयुक्त हवाई कार्रवाई की है।
Fox News को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अमेरिकी हितों पर हमला हुआ तो ईरान को “जोरदार जवाब” दिया जाएगा। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ गया और तेल की कीमतों में तेजी आ गई।
90 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
बुधवार रात करीब 8:20 बजे तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 7.68% की बढ़त के साथ 90.54 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थी। यह पिछले कई महीनों की सबसे तेज दैनिक बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य या लाल सागर में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार में सप्लाई संकट पैदा हो सकता है।
100 डॉलर तक जा सकता है कच्चा तेल
DBS बैंक के एनर्जी रिसर्च प्रमुख सुव्रो सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है।
उनके अनुसार, ट्रंप ने बातचीत के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा जोखिम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यदि तनाव जारी रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों का 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना फिलहाल मुश्किल दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है और तेल आपूर्ति बाधित होती है तो 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी पार हो सकता है।
OPEC+ भी ले सकता है बड़ा फैसला
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, OPEC+ अक्टूबर से अगले तीन महीनों तक तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना को स्थगित कर सकता है।
यदि ऐसा होता है तो बाजार में अतिरिक्त सप्लाई नहीं आएगी, जिससे पहले से बढ़ी हुई कीमतों को और समर्थन मिल सकता है। उत्पादन वृद्धि टलने की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई सीमित रहेगी और मांग के मुकाबले उपलब्धता कम होने से कीमतों में और तेजी आ सकती है।
हूती विद्रोहियों की नई रणनीति
रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोही दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से शुल्क वसूलने पर विचार कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हूती समूह के साथ सीधे बातचीत की है। यदि लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर दबाव बढ़ता है तो वैश्विक सप्लाई चेन और तेल परिवहन की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिका में घटा कच्चे तेल का भंडार
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में अमेरिका का कच्चे तेल का भंडार लगभग 33 लाख बैरल घट गया।
भंडार में आई यह गिरावट भी बाजार के लिए तेजी का संकेत मानी जा रही है, क्योंकि इससे मांग मजबूत होने और सप्लाई अपेक्षाकृत कम रहने का संकेत मिलता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर कई क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
- सरकार का आयात बिल बढ़ सकता है।
- महंगाई में तेजी आने की आशंका बढ़ सकती है।
- विमानन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
- रुपये पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।
आने वाले दिनों में निवेशकों और बाजार की नजर मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम, OPEC+ की बैठक और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर रहेगी। यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
Disclaimer: NewsJagran.in पर प्रकाशित निवेश, बाजार या कमोडिटी से जुड़ी जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए विचार संबंधित एक्सपर्ट्स या संस्थानों के हो सकते हैं। किसी भी निवेश या ट्रेडिंग से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


