भारत में चाइनीज खाने का स्वाद लोगों की पसंद का अहम हिस्सा बन चुका है। चाऊमीन, मंचूरियन, हक्का नूडल्स और शेजवान चटनी जैसे व्यंजन आज छोटे स्ट्रीट फूड स्टॉल से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक आसानी से मिल जाते हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब घर पर रेस्टोरेंट जैसा चाइनीज खाना तैयार करना आसान नहीं था। जरूरी सॉस, मसाले और दूसरी सामग्री बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होती थी। इसी कमी को अजय गुप्ता ने कारोबार के एक बड़े अवसर के रूप में देखा और एक ऐसा ब्रांड बनाने की शुरुआत की, जो भारतीयों की रसोई में चाइनीज खाने का स्वाद पहुंचा सके।
यह ब्रांड था चिंग्स सीक्रेट (Ching’s Secret)। साल 1996 में बाजार में आए इस ब्रांड ने धीरे-धीरे भारतीयों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। कंपनी ने महंगे और बड़े पैकेट के बजाय छोटे पैक के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई। 10 रुपये के पैकेट से शुरू हुआ यह सफर इतना बड़ा बना कि इसकी पैरेंट कंपनी कैपिटल फूड्स को खरीदने के लिए टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने करीब 5,100 करोड़ रुपये का समझौता किया। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक छोटे से फूड ब्रांड ने भारतीय FMCG बाजार में अपनी मजबूत जगह बनाई।
1995 में रखी कंपनी की नींव, 1996 में लॉन्च हुआ Ching’s Secret
चिंग्स सीक्रेट की कहानी अजय गुप्ता के कारोबारी विचार से शुरू होती है। उन्होंने साल 1995 में कैपिटल फूड्स (Capital Foods) की स्थापना की। इसके बाद 1996 में कंपनी ने चिंग्स सीक्रेट ब्रांड को बाजार में उतारा। उस समय भारत में चाइनीज फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन इसे घर पर तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री की उपलब्धता सीमित थी।
अजय गुप्ता ने इसी जरूरत को समझते हुए सॉस और दूसरी चाइनीज कुकिंग सामग्री के कारोबार पर ध्यान दिया। शुरुआत में कंपनी ने सोया सॉस, रेड चिली सॉस और ग्रीन चिली सॉस जैसे उत्पाद पेश किए। इन उत्पादों का उद्देश्य ग्राहकों को घर पर ही चाइनीज व्यंजनों का स्वाद तैयार करने में मदद करना था।
उस दौर में इंस्टेंट नूडल्स के बाजार में मैगी जैसे बड़े ब्रांड की मजबूत पकड़ थी। ऐसे में चिंग्स सीक्रेट ने सीधे नूडल्स के बाजार में मुकाबला करने के बजाय चाइनीज खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को अपना मुख्य आधार बनाया। यह रणनीति ब्रांड के लिए काफी अहम साबित हुई।
सॉस से नूडल्स और मसालों तक बढ़ाया कारोबार
शुरुआत में सॉस पर ध्यान देने वाली कंपनी ने धीरे-धीरे अपने उत्पादों की संख्या बढ़ाई। चिंग्स सीक्रेट ने हक्का नूडल्स, इंस्टेंट सूप, मसाले और रेडी-टू-कुक उत्पादों को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया।
इसका मकसद सिर्फ एक या दो उत्पाद बेचना नहीं था, बल्कि भारतीय परिवारों को चाइनीज खाना बनाने के लिए जरूरी सामग्री एक ही ब्रांड के तहत उपलब्ध कराना था। इससे कंपनी को अलग-अलग खाद्य श्रेणियों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिला।
कैपिटल फूड्स ने चिंग्स सीक्रेट के अलावा स्मिथ एंड जोन्स (Smith & Jones) नाम से एक दूसरा ब्रांड भी विकसित किया। इसके तहत अदरक-लहसुन का पेस्ट और पास्ता-पिज्जा जैसी डिश तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद पेश किए गए।
इस तरह कंपनी ने भारतीय रसोई की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपना पोर्टफोलियो तैयार किया। एक तरफ चिंग्स सीक्रेट के जरिए चाइनीज और इंडो-चाइनीज खाने पर ध्यान दिया गया, तो दूसरी तरफ स्मिथ एंड जोन्स के जरिए रोजमर्रा के कुकिंग प्रोडक्ट्स के बाजार में जगह बनाने की कोशिश की गई।
‘देसी चाइनीज’ को बनाया अपनी सबसे बड़ी पहचान
चिंग्स सीक्रेट की सफलता के पीछे सबसे महत्वपूर्ण रणनीतियों में से एक भारतीय स्वाद को समझना था। भारत में चाइनीज खाना पसंद तो किया जाता था, लेकिन यहां के लोगों की पसंद पारंपरिक चीनी व्यंजनों से कुछ अलग थी। भारतीय ग्राहक ज्यादा मसालेदार और चटपटे स्वाद को पसंद करते हैं।
कंपनी ने इसी पसंद को ध्यान में रखते हुए भारतीय और चाइनीज स्वाद के मेल को अपनी ब्रांड पहचान बनाया। इसे ‘देसी चाइनीज’ के रूप में पेश किया गया। अगस्त 2015 में ब्रांड ने इस पहचान को बड़े स्तर पर प्रमोट करना शुरू किया।
इस रणनीति ने चिंग्स सीक्रेट को बाजार में अलग पहचान दिलाने में मदद की। कंपनी ने ग्राहकों को यह समझाने की कोशिश की कि चाइनीज खाना बनाने के लिए अब रेस्टोरेंट जाने की जरूरत नहीं है। घर पर भी आसानी से चाऊमीन, मंचूरियन और दूसरे लोकप्रिय व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं।
साल 2013 में लॉन्च हुई शेजवान चटनी भी ब्रांड के लोकप्रिय उत्पादों में शामिल हुई। इस उत्पाद ने भारतीय ग्राहकों के बीच अपनी अलग जगह बनाई। इसका इस्तेमाल नूडल्स, फ्राइड राइस, सैंडविच और कई दूसरे व्यंजनों के साथ किया जाने लगा।
10 रुपये के छोटे पैकेट से बनाई बाजार में जगह
किसी नए FMCG ब्रांड के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ अच्छा उत्पाद तैयार करना नहीं होती, बल्कि उसे ग्राहकों तक पहुंचाना भी होती है। चिंग्स सीक्रेट के सामने भी यही चुनौती थी। शुरुआत में कई डिस्ट्रीब्यूटर नए ब्रांड के उत्पादों को अपने स्टोर पर रखने को लेकर उत्साहित नहीं थे।
ऐसे में कंपनी ने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए छोटे पैकेट की रणनीति अपनाई। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे बाजारों में 10 रुपये के छोटे पैक पेश किए गए। इसका फायदा यह हुआ कि ग्राहकों को महंगे पैकेट खरीदने की जरूरत नहीं थी। वे कम कीमत में उत्पाद आजमा सकते थे और पसंद आने पर दोबारा खरीद सकते थे।
यह रणनीति खासतौर पर उन ग्राहकों के बीच उपयोगी साबित हुई, जो पहली बार चिंग्स सीक्रेट के उत्पाद इस्तेमाल कर रहे थे। कम कीमत के कारण ब्रांड को नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिली।
कंपनी ने सिर्फ बड़े सुपरमार्केट और किराना दुकानों पर निर्भर रहने के बजाय सड़क किनारे चाइनीज खाना बेचने वाले फूड स्टॉल को भी अपने वितरण नेटवर्क का हिस्सा बनाया। इन स्टॉल संचालकों को उत्पादों के मुफ्त सैंपल दिए गए, ताकि वे इनका इस्तेमाल अपने व्यंजनों में कर सकें।
इससे ब्रांड को दोहरा फायदा मिला। एक तरफ स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के जरिए उत्पादों की खपत बढ़ी, तो दूसरी तरफ ग्राहकों को चिंग्स सीक्रेट का स्वाद चखने का मौका मिला। धीरे-धीरे कंपनी ने अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत किया।
साल 2004 में बिग बाजार के स्टोरों पर उत्पादों की उपलब्धता ने भी ब्रांड को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद की। इस तरह छोटे पैकेट, फूड स्टॉल और रिटेल स्टोर के जरिए कंपनी ने बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाई।
रणवीर सिंह के साथ विज्ञापन से मिली नई पहचान
चिंग्स सीक्रेट ने अपने उत्पादों के प्रचार के लिए पारंपरिक विज्ञापन के बजाय मनोरंजन और म्यूजिक का भी इस्तेमाल किया। ब्रांड ने अपने विज्ञापनों में हास्य, संगीत और फिल्मी अंदाज को शामिल किया, जिससे युवा ग्राहकों के बीच इसकी पहचान मजबूत हुई।
साल 2014 में बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को ब्रांड एंबेसडर बनाया गया। उनके साथ ‘माय नेम इज रणवीर चिंग’ नाम से एक म्यूजिक वीडियो तैयार किया गया। इसे यशराज फिल्म्स ने बनाया था। वीडियो का निर्देशन शाद अली ने किया, जबकि संगीत शंकर-एहसान-लॉय ने तैयार किया। इसके गीत गुलजार ने लिखे और अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज दी।
इसके बाद अगस्त 2016 में ब्रांड ने ‘रणवीर चिंग रिटर्न्स’ नाम से करीब पांच मिनट की एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म पेश की। इसका निर्देशन रोहित शेट्टी ने किया था। इसमें रणवीर सिंह के साथ अभिनेत्री तमन्ना भाटिया भी नजर आईं।
इस तरह चिंग्स सीक्रेट ने अपने विज्ञापन अभियानों को केवल उत्पादों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें मनोरंजन का रूप दिया। बाद के वर्षों में भी ब्रांड ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोकप्रिय कलाकारों तथा कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए प्रचार जारी रखा।
साल 2025 में ‘एजेंट चिंग’ नाम से एक और फिल्मी अभियान चर्चा में रहा, जिसमें रणवीर सिंह, बॉबी देओल और श्रीलीला नजर आए। इन अभियानों ने ब्रांड को नई पीढ़ी के ग्राहकों के बीच भी चर्चा में बनाए रखने में भूमिका निभाई।
705 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचा कंपनी का राजस्व
चिंग्स सीक्रेट की लोकप्रियता बढ़ने के साथ इसकी पैरेंट कंपनी कैपिटल फूड्स का कारोबार भी लगातार आगे बढ़ा। कंपनी ने सॉस, चटनी, नूडल्स, मसाले और दूसरे खाद्य उत्पादों के जरिए भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत की।
उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में कैपिटल फूड्स का राजस्व करीब 705.5 करोड़ रुपये था। कंपनी के उत्पादों की पहुंच और ब्रांड की पहचान ने इसे FMCG क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण कंपनी बना दिया।
कैपिटल फूड्स की खासियत यह रही कि इसने भारतीय ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अपने उत्पादों और मार्केटिंग रणनीति को विकसित किया। कंपनी ने ऐसे उत्पादों पर ध्यान दिया, जिनका इस्तेमाल घरों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड कारोबार में भी किया जा सकता था।
जनवरी 2024 में टाटा ने 5,100 करोड़ रुपये में खरीदने का किया समझौता
चिंग्स सीक्रेट की सफलता का सबसे बड़ा कारोबारी पड़ाव जनवरी 2024 में आया। इस दौरान टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (Tata Consumer Products) ने कैपिटल फूड्स को खरीदने का समझौता किया।
इस सौदे में कैपिटल फूड्स की एंटरप्राइज वैल्यू करीब 5,100 करोड़ रुपये आंकी गई। समझौते के तहत टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने पहले चरण में कंपनी की 75 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने और शेष 25 फीसदी हिस्सेदारी अगले तीन वर्षों में हासिल करने की योजना बनाई।
यह अधिग्रहण टाटा कंज्यूमर के लिए अपने खाद्य और एफएमसीजी कारोबार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। चिंग्स सीक्रेट और स्मिथ एंड जोन्स जैसे स्थापित ब्रांडों के जुड़ने से टाटा को सॉस, चटनी, मसाले और दूसरे पैकेज्ड फूड उत्पादों के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिला।
इसी दौरान टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने ऑर्गेनिक इंडिया (Organic India) को खरीदने का अलग समझौता भी किया। इन दोनों अधिग्रहणों की कुल एंटरप्राइज वैल्यू करीब 7,000 करोड़ रुपये थी।
इस डील ने यह भी दिखाया कि भारतीय FMCG बाजार में स्थापित देसी ब्रांडों की कितनी बड़ी कारोबारी क्षमता है। चिंग्स सीक्रेट जैसे ब्रांड अब सिर्फ एक खाद्य उत्पाद बेचने वाली कंपनी तक सीमित नहीं रह गए थे, बल्कि बड़े कॉरपोरेट समूहों के लिए भी महत्वपूर्ण कारोबारी संपत्ति बन चुके थे।
FY25 में 799 करोड़ रुपये का राजस्व और 119 करोड़ का मुनाफा
कैपिटल फूड्स के कारोबारी प्रदर्शन की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कंपनी ने 799 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया। इस दौरान कंपनी का मुनाफा करीब 119 करोड़ रुपये रहा।
ये आंकड़े बताते हैं कि चिंग्स सीक्रेट और स्मिथ एंड जोन्स जैसे ब्रांडों के जरिए कंपनी ने अपने कारोबार को किस स्तर तक पहुंचाया। 10 रुपये के छोटे पैकेट से शुरू हुआ सफर अब सैकड़ों करोड़ रुपये के सालाना राजस्व और हजारों करोड़ रुपये के अधिग्रहण सौदे तक पहुंच चुका है।
Ching’s Secret की सफलता से क्या सीख मिलती है?
चिंग्स सीक्रेट की ब्रांड स्टोरी सिर्फ एक फूड कंपनी के विस्तार की कहानी नहीं है। यह बताती है कि किसी बाजार में पहले से मौजूद ग्राहक मांग को समझकर किस तरह नया कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
अजय गुप्ता ने भारत में चाइनीज खाने की लोकप्रियता को पहचाना, लेकिन सीधे किसी बड़े नूडल्स ब्रांड से मुकाबला करने के बजाय उस जरूरत पर ध्यान दिया, जिसे बाजार में पूरा नहीं किया जा रहा था। कंपनी ने भारतीय स्वाद के अनुसार उत्पाद बनाए, 10 रुपये के छोटे पैकेट से ग्राहकों तक पहुंच बनाई और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को भी अपनी मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा बनाया।
इसके अलावा, रणवीर सिंह जैसे लोकप्रिय कलाकारों के साथ मनोरंजक विज्ञापनों ने ब्रांड को अलग पहचान दिलाई। यही वजह रही कि चिंग्स सीक्रेट धीरे-धीरे भारतीय घरों और फूड कारोबार का जाना-पहचाना नाम बन गया।
आज कैपिटल फूड्स का टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के साथ जुड़ना इस बात का उदाहरण है कि सही बाजार, सही उत्पाद और लंबे समय की ब्रांड रणनीति किसी छोटे कारोबार को बड़ी कारोबारी पहचान दिला सकती है।
Source: कैपिटल फूड्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स से संबंधित उपलब्ध कारोबारी जानकारी एवं कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर आधारित।
डिस्क्लेमर: इस लेख का उद्देश्य एक ब्रांड की कारोबारी यात्रा और उसके विकास की जानकारी देना है। इसमें दिए गए वित्तीय आंकड़े संबंधित वित्त वर्षों के उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों पर आधारित हैं।


