महाराष्ट्र के संतरा किसानों के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। राज्य सरकार ने बांग्लादेश को निर्यात होने वाले संतरों पर दी जा रही 50 फीसदी सब्सिडी योजना को समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले से ही बांग्लादेश द्वारा लगाए जा रहे भारी आयात शुल्क के कारण भारतीय संतरे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं और अब सब्सिडी खत्म होने से हालात और मुश्किल हो जाएंगे।
किसानों को नहीं मिलेगी निर्यात सब्सिडी
महाराष्ट्र सरकार ने दिसंबर 2023 में बांग्लादेश को निर्यात किए जाने वाले संतरों के लिए करीब 169 करोड़ रुपये की सहायता योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत किसानों और निर्यातकों को राहत मिल रही थी। लेकिन जून 2026 के बाद इस योजना को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है।
अमरावती के संतरा निर्यातक ताज खान ने बताया कि सब्सिडी बंद होने से किसानों की लागत बढ़ेगी और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलने में दिक्कत होगी। उनका कहना है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब निर्यात पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
बांग्लादेश में भारतीय संतरों पर भारी शुल्क
निर्यातकों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक बांग्लादेश भारतीय संतरों पर लगभग 30 से 36 रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर शुल्क लगाता था। लेकिन अब यह शुल्क बढ़कर करीब 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इससे भारतीय संतरे बांग्लादेश के बाजार में महंगे हो जाते हैं और उनकी मांग घट जाती है।
दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका, चीन और भूटान जैसे देशों से आने वाले संतरों को बांग्लादेश में अपेक्षाकृत बेहतर शर्तें मिल रही हैं। इससे भारतीय निर्यातकों का बाजार हिस्सा लगातार कम हो रहा है। बांग्लादेश लंबे समय से महाराष्ट्र के संतरों का प्रमुख निर्यात बाजार रहा है, इसलिए इसका असर सीधे किसानों की आय पर पड़ रहा है।
घरेलू बाजार में बढ़ी आपूर्ति, घटे दाम
निर्यात में गिरावट का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। पहले जो संतरे विदेश भेजे जाते थे, अब उन्हें देश के भीतर ही बेचना पड़ रहा है। इससे दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों की मंडियों में संतरों की आपूर्ति बढ़ गई है।
निर्यातकों का कहना है कि पहले दिल्ली जैसे बाजारों में 50 ट्रक संतरे भेजने पड़ते थे, जबकि अब 80 से 100 ट्रक तक भेजने पड़ रहे हैं। अधिक आपूर्ति के कारण किसानों को बेहतर कीमत नहीं मिल पा रही और उनकी कमाई प्रभावित हो रही है।
किसान संतरे की खेती से बना रहे दूरी
कम कीमत और निर्यात संकट के कारण कई किसान अब संतरे की खेती कम करने लगे हैं। कुछ किसानों ने अपने पुराने बाग भी हटाने शुरू कर दिए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों को सहायता देने के लिए नई नीति नहीं बनाई गई तो आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र के संतरा उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
महाराष्ट्र देश के प्रमुख संतरा उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में निर्यात बाजार कमजोर होने और सरकारी सहायता खत्म होने का असर लाखों किसानों और कृषि आधारित कारोबार पर पड़ सकता है।
क्या है किसानों की मांग?
किसान संगठनों और निर्यातकों ने सरकार से मांग की है कि या तो निर्यात सब्सिडी दोबारा शुरू की जाए या फिर बांग्लादेश के साथ व्यापारिक स्तर पर बातचीत कर भारतीय संतरों पर लगाए गए ऊंचे शुल्क को कम कराया जाए। उनका मानना है कि बिना सरकारी समर्थन के विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत अपने प्रमुख निर्यात बाजारों को बचाना चाहता है तो उसे कृषि निर्यात नीति को और मजबूत बनाना होगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय फलों की हिस्सेदारी बनी रहे।


