सरकार का सब्सिडी बिल आखिर होता क्या है?
केंद्र सरकार हर साल खाद, एलपीजी, खाद्यान्न और कुछ अन्य जरूरी वस्तुओं पर सब्सिडी देती है ताकि आम जनता और किसानों पर कीमतों का बोझ कम रहे। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने कुल 4.1 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी के लिए आवंटित किए हैं। लेकिन कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी के कारण यह अनुमान काफी कम साबित हो सकता है।
ईरान युद्ध का खाद सब्सिडी से क्या संबंध है?
भारत यूरिया को छोड़कर डीएपी, पोटाश और एनपीके जैसे उर्वरकों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। इन उर्वरकों के निर्माण में प्राकृतिक गैस, अमोनिया और सल्फर जैसी वस्तुओं का उपयोग होता है। युद्ध के बाद यूरिया की वैश्विक कीमत 120% से अधिक बढ़ी, अमोनिया 84% महंगा हुआ, सल्फर 87% महंगा हुआ, डीएपी की कीमत 38% बढ़ी. इनकी लागत बढ़ने पर सरकार किसानों के लिए कीमत स्थिर रखने हेतु ज्यादा सब्सिडी देती है।
LPG सिलेंडर पर कितना दबाव?
रिपोर्ट के अनुसार तेल विपणन कंपनियों को घरेलू गैस सिलेंडर पर प्रति सिलेंडर लगभग ₹700 तक का नुकसान हो रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो सरकार को या तो अतिरिक्त सब्सिडी देनी होगी या फिर उपभोक्ताओं पर कीमत बढ़ोतरी का बोझ डालना पड़ सकता है।
खाद्य सब्सिडी भी क्यों बढ़ सकती है?
सरकार ने इस साल खाद्य सब्सिडी के लिए 2.3 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। लेकिन भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास गेहूं और चावल का बड़ा स्टॉक मौजूद है। अतिरिक्त स्टॉक का मतलब ज्यादा गोदाम लागत, परिवहन खर्च में बढ़ोतरी, रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च. इससे खाद्य सब्सिडी का वास्तविक बिल बजटीय अनुमान से ऊपर जा सकता है।
Fiscal Deficit पर कितना खतरा?
सरकार ने FY27 में राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया है। यदि खाद सब्सिडी 3.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचती है LPG सब्सिडी बढ़ती है, खाद्य सब्सिडी में अतिरिक्त खर्च आता है तो सरकार को या तो अतिरिक्त उधारी लेनी पड़ सकती है या अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर कई क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है LPG सिलेंडर महंगा हो सकता है, खाद महंगी होने से कृषि लागत बढ़ सकती है, खाद्यान्न महंगाई बढ़ सकती है पेट्रोल और डीजल पर दबाव बना रह सकता है परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं
क्या 2022 जैसी स्थिति फिर बन सकती है?
2022-23 में रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सप्लाई संकट के दौरान भारत का फर्टिलाइजर सब्सिडी बिल रिकॉर्ड 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर तेल और गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो FY27 में यह रिकॉर्ड भी टूट सकता है।
निष्कर्ष
ईरान युद्ध का असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव भारत के फर्टिलाइजर आयात, एलपीजी सब्सिडी, खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों और सरकारी वित्त पर पड़ रहा है। फिलहाल मजबूत GST संग्रह सरकार को राहत दे रहा है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो केंद्र सरकार के लिए 4.3% राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। आने वाले कुछ महीने तय करेंगे कि यह केवल अस्थायी दबाव है या फिर भारत को एक बड़े सब्सिडी संकट का सामना करना पड़ेगा।
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