Bihar Social Media Scheme 2026: यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए बिहार सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। अब सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से जुड़े वीडियो बनाने वाले रजिस्टर्ड सोशल मीडिया क्रिएटर्स को उनके वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर भुगतान किया जाएगा। खास बात यह है कि वीडियो पर व्यूज बढ़ने के साथ कमाई भी बढ़ेगी और एक वीडियो के लिए अधिकतम ₹1 लाख तक का भुगतान किया जा सकता है।
बिहार कैबिनेट की बैठक में ‘बिहार सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन मीडिया नियमावली, 2026’ में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाने वाले क्रिएटर्स को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा।
1 लाख व्यूज पर मिलेंगे ₹10,000
नई व्यवस्था में वीडियो के प्रदर्शन को भुगतान का आधार बनाया गया है। वीडियो पब्लिश होने के 30 दिनों के भीतर 1 लाख व्यूज पूरे होने पर ₹10,000 का अतिरिक्त भुगतान मिलेगा।
यानी जितने ज्यादा व्यूज, उतना ज्यादा इंसेंटिव। हालांकि, किसी एक वीडियो के लिए भुगतान की अधिकतम सीमा ₹1 लाख तय की गई है।
उदाहरण के तौर पर अगर कोई वीडियो निर्धारित नियमों के तहत लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है और तय व्यूज के कई स्तर पार करता है, तो उसे अतिरिक्त भुगतान मिल सकता है। लेकिन कुल भुगतान ₹1 लाख से ज्यादा नहीं होगा।
| वीडियो का प्रदर्शन | संभावित अतिरिक्त भुगतान |
|---|---|
| 1 लाख व्यूज | ₹10,000 |
| 2 लाख व्यूज | ₹20,000 |
| 5 लाख व्यूज | ₹50,000 |
| 10 लाख व्यूज या उससे अधिक | अधिकतम ₹1 लाख तक |
हालांकि, भुगतान की अंतिम प्रक्रिया, पात्रता और व्यूज की गणना से जुड़े विस्तृत नियम सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) की आधिकारिक अधिसूचना के बाद स्पष्ट होंगे।
किन क्रिएटर्स को मिलेगा फायदा?
इस योजना का लाभ उन सोशल मीडिया क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को मिल सकता है, जो बिहार सरकार की योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और सरकारी पहलों से संबंधित कंटेंट तैयार करते हैं और निर्धारित मीडिया गाइडलाइन्स के तहत रजिस्टर्ड हैं।
इसका मकसद सरकारी योजनाओं की जानकारी को पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ YouTube, Instagram और Facebook जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।
फेक फॉलोअर्स और बॉट व्यूज पर रहेगी नजर
सरकार ने इस व्यवस्था में फर्जी व्यूज और फेक फॉलोअर्स के जरिए गलत फायदा उठाने की संभावना को रोकने के लिए भी प्रावधान किए हैं।
रजिस्टर्ड सोशल मीडिया हैंडल, पेज और चैनलों के फॉलोअर्स का समय-समय पर वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भुगतान वास्तविक ऑडियंस और वास्तविक सोशल मीडिया प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाए।
इसलिए सिर्फ फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। क्रिएटर्स को अपने अकाउंट और कंटेंट की विश्वसनीयता बनाए रखनी होगी।
IPRD जारी करेगा विस्तृत गाइडलाइन
कैबिनेट से नियमों में संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद अब सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने हैं।
इन दिशा-निर्देशों में क्रिएटर्स के रजिस्ट्रेशन, पात्रता, कंटेंट के प्रकार, व्यूज की गणना, भुगतान की प्रक्रिया और वेरिफिकेशन से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया जा सकता है।
इसलिए क्रिएटर्स को अंतिम भुगतान नियमों के लिए आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा।
बिहार सरकार का AI पर भी बड़ा दांव
कैबिनेट बैठक में सोशल मीडिया क्रिएटर्स के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी अहम फैसला लिया गया है। बिहार के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विभाग ने Taiyo AI India Pvt Ltd के साथ एक समझौता किया है।
इस साझेदारी के तहत राज्य में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए AI-पावर्ड डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा।
रियल टाइम में होगी प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग
AI आधारित डैशबोर्ड की मदद से राज्य में चल रही परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे प्रोजेक्ट में देरी और बजट बढ़ने जैसी समस्याओं की शुरुआती पहचान की जा सकेगी।
सरकार का लक्ष्य तकनीक की मदद से सरकारी परियोजनाओं की निगरानी को ज्यादा प्रभावी और डेटा आधारित बनाना है।
युवाओं और महिलाओं को AI की ट्रेनिंग
इस पहल के तहत अधिकारियों के साथ-साथ छात्रों और महिलाओं के लिए भी AI और डेटा एनालिटिक्स से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने की योजना है।
इससे राज्य में AI स्किल्स को बढ़ावा देने और युवाओं को भविष्य की तकनीकी नौकरियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
क्रिएटर्स के लिए क्या है इस योजना का मतलब?
बिहार सरकार की नई सोशल मीडिया पॉलिसी डिजिटल क्रिएटर्स के लिए कमाई का एक नया अवसर पैदा कर सकती है। खासकर उन यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए, जिनकी ऑडियंस बिहार और राज्य सरकार की योजनाओं से जुड़ी जानकारी में रुचि रखती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹1 लाख हर वीडियो पर मिलने वाली फिक्स रकम नहीं है। यह अधिकतम भुगतान सीमा है। वास्तविक भुगतान वीडियो के प्रदर्शन, व्यूज और सरकार की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।
नोट: योजना के पात्रता मानदंड, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और भुगतान की पूरी शर्तों के लिए IPRD की आधिकारिक गाइडलाइन का इंतजार करना जरूरी है।


