Sugar Price: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट के नियम और सख्त कर दिए हैं। नए आदेश के मुताबिक, हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल या कारोबार करने वाले डीलर अब अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे। यह नियम 1 सितंबर से लागू होकर 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
चीनी की कीमत 65 रुपये किलो तक पहुंची
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों का असर खुदरा बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। कई बाजारों में चीनी का भाव 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 10 दिनों में कुछ बाजारों में चीनी की कीमत में प्रति क्विंटल करीब 200 रुपये तक की तेजी आई है।
थोक बाजार में चीनी का भाव करीब 64 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है, जबकि खुदरा ग्राहकों को 65-66 रुपये प्रति किलो तक कीमत चुकानी पड़ रही है। कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब आने वाले महीनों में चीनी की मांग सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है।
पहले 30 दिन की थी स्टॉक लिमिट
सरकार ने इससे पहले डीलरों के लिए चीनी की स्टॉक लिमिट 30 दिन तय की थी। हालांकि, कीमतों में तेजी जारी रहने के बाद अब इस सीमा को घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों के पास जरूरत से ज्यादा चीनी जमा होने की संभावना को कम करना है। सरकार चाहती है कि बाजार में चीनी की नियमित सप्लाई बनी रहे और किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न हो।
एक महीने में करीब 10 फीसदी महंगी हुई चीनी
चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान भी उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, घरेलू बाजार में खुदरा चीनी की कीमत करीब 10 फीसदी तक बढ़ी है।
उद्योग संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को देश में चीनी का औसत एक्स-मिल भाव करीब 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा। एक साल पहले यह भाव लगभग 3,900 रुपये प्रति क्विंटल था।
वहीं, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलो थी। एक साल पहले इसी दिन यह करीब 46.34 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर खुदरा कीमत में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
त्योहारों में बढ़ेगी चीनी की मांग
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता देशों में शामिल है। अगस्त से नवंबर के बीच आमतौर पर चीनी की मांग बढ़ जाती है। इस अवधि में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं।
त्योहारों के दौरान मिठाई, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण में चीनी की खपत बढ़ती है। इसके अलावा घरों में भी मिठाइयां और दूसरे पकवान अधिक बनाए जाते हैं। ऐसे में मांग बढ़ने के कारण कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
नए चीनी सीजन से पहले सप्लाई की चिंता
2026-27 का चीनी सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। नए सीजन की शुरुआत में देश के पास मौजूद शुरुआती स्टॉक को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं।
उद्योग जगत के कुछ अनुमानों के मुताबिक शुरुआती स्टॉक करीब 40-42 लाख टन रह सकता है। वहीं, कुछ शोधकर्ताओं का अनुमान इससे कम करीब 32-35 लाख टन का है।
घरेलू खपत करीब 50 लाख टन रहने का अनुमान है। ऐसे में शुरुआती स्टॉक को लेकर चिंता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि उपलब्धता मांग के मुकाबले सीमित रह सकती है।
मौजूदा सीजन में भी घट सकता है स्टॉक
2025-26 के मौजूदा चीनी सीजन में कुल उपलब्धता करीब 320 लाख टन रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले घरेलू खपत लगभग 285 लाख टन बताई गई है।
करीब 7 लाख टन चीनी के निर्यात के बाद सीजन के अंत में देश के पास लगभग 35 लाख टन का स्टॉक बचने का अनुमान है। यदि नए सीजन में उत्पादन या शुरुआती स्टॉक उम्मीद से कम रहता है, तो घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
कम बारिश और सूखे मौसम ने बढ़ाई चिंता
चीनी की कीमतों को लेकर चिंता सिर्फ बढ़ती मांग तक सीमित नहीं है। कुछ क्षेत्रों में असमान बारिश और शुष्क मौसम का असर गन्ने की फसल पर पड़ने की आशंका है।
यदि गन्ने की पैदावार प्रभावित होती है, तो आने वाले चीनी सीजन में उत्पादन और उपलब्धता पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है।
सरकार की नजर सप्लाई और कीमतों पर
चीनी भारत की महत्वपूर्ण खाद्य वस्तुओं में शामिल है और इसकी कीमतों में तेजी का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के कारण सरकार के लिए कीमतों को नियंत्रित रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
इसी वजह से स्टॉक लिमिट को 30 दिन से घटाकर 15 दिन करने का फैसला बाजार में उपलब्धता बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में सरकार की नजर चीनी के स्टॉक, बाजार भाव, घरेलू मांग और नए सीजन की गन्ने की फसल पर रहेगी।


