Success Story: मैनहोल, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान इंसानों की जान जोखिम में पड़ने की समस्या का तकनीक के जरिए समाधान खोजने की कोशिश बिहार के दिव्यांशु कुमार ने की। IIT Madras में पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ उनका प्रोजेक्ट आगे चलकर Solinas Integrity नाम की स्टार्टअप कंपनी में बदल गया। कंपनी ऐसे रोबोटिक सिस्टम विकसित कर रही है, जो खतरनाक सैनिटेशन और भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर के कामों में इंसानों की सीधी भागीदारी कम कर सकते हैं।
भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई आज भी एक बेहद जोखिम भरा काम है। जहरीली गैस, संक्रमण और ऑक्सीजन की कमी जैसे खतरे सफाई कर्मचारियों की जान तक ले सकते हैं। मैनुअल स्कैवेंजिंग पर कानूनी रोक के बावजूद देश के कई हिस्सों में असुरक्षित तरीके से सफाई किए जाने की खबरें सामने आती रही हैं।
ऐसी गंभीर समस्या के बीच तकनीक एक वैकल्पिक रास्ता पेश कर रही है। बिहार के दिव्यांशु कुमार ने इसी दिशा में काम करते हुए ऐसा रोबोटिक समाधान विकसित करने की पहल की, जिसका उद्देश्य इंसानों को खतरनाक सेप्टिक टैंक और सीवर के भीतर उतरने की जरूरत को कम करना है।
IIT Madras में पढ़ाई के दौरान आया आइडिया
Meet Divyanshu Kumar, who completed his https://t.co/BC6fLkcQNf in Mechanical Engineering from IIT Madras. This guy from Bihar developed robots to replace humans for manhole and sewage cleaning.
He turned his college project idea into a startup called Solinas Integrity… pic.twitter.com/mBCgPsaAjc
— Vikas Alwys (@VikasAlwys) August 30, 2026 दिव्यांशु कुमार ने IIT Madras से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर सैनिटेशन से जुड़ी समस्याओं पर काम शुरू किया।
शुरुआत में यह एक कॉलेज प्रोजेक्ट था। लेकिन प्रोजेक्ट के दौरान सामने आई समस्या और उसके संभावित समाधान ने दिव्यांशु को इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उनका उद्देश्य ऐसी तकनीक तैयार करना था, जो उन कामों में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाए जिनमें इंसानों की जान को गंभीर खतरा रहता है।
यही विचार आगे चलकर Solinas Integrity की नींव बना।
कॉलेज प्रोजेक्ट से स्टार्टअप तक पहुंचा सफर
दिव्यांशु और उनके साथियों ने Solinas Integrity की शुरुआत की। कंपनी रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल सैनिटेशन और भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों को सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कर रही है।
स्टार्टअप का फोकस केवल सीवर की सफाई तक सीमित नहीं है। पाइपलाइन, भूमिगत नेटवर्क और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच और रखरखाव के लिए भी रोबोटिक तकनीक विकसित की जा रही है।
HomoSEP क्या है?
Solinas Integrity के प्रमुख इनोवेशन में HomoSEP रोबोटिक सिस्टम शामिल है। इसे खास तौर पर सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे जोखिम भरे काम के लिए विकसित किया गया है।
इस तरह की तकनीक का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है कि सफाई के लिए किसी व्यक्ति को सीधे खतरनाक वातावरण में उतरने की जरूरत कम से कम पड़े। रोबोट ऐसे स्थानों पर काम कर सकता है जहां जहरीली गैस और अन्य परिस्थितियां इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।
यानी जिस काम में अब तक इंसान को जोखिम उठाना पड़ता था, वहां मशीन को आगे लाने की कोशिश की गई है।
सोच सीधी थी- खतरनाक काम मशीन से क्यों न कराया जाए?
दिव्यांशु के इनोवेशन के पीछे की सोच काफी सरल है। अगर कोई काम इंसान की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है, तो वहां तकनीक का इस्तेमाल करके उस जोखिम को कम करने की कोशिश क्यों न की जाए?
इसी विचार ने उनके काम को एक साधारण कॉलेज प्रोजेक्ट से आगे बढ़ाया। उन्होंने सैनिटेशन की समस्या को केवल सफाई के नजरिए से नहीं देखा, बल्कि इसे इंजीनियरिंग और रोबोटिक्स की चुनौती के रूप में लिया।
करीब 15 करोड़ रुपये की स्टार्टअप वैल्यू का दावा
दिव्यांशु की कहानी की खास बात यह है कि उनका आइडिया कॉलेज के प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Solinas Integrity की वैल्यू करीब 15 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
इससे यह भी पता चलता है कि सामाजिक समस्या को हल करने वाला एक तकनीकी आइडिया सही दिशा में काम करने पर बिजनेस मॉडल का रूप ले सकता है।
हालांकि स्टार्टअप की वैल्यूएशन समय के साथ बदल सकती है और अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में अंतर हो सकता है, लेकिन दिव्यांशु का सफर इस बात की मिसाल जरूर है कि कॉलेज में शुरू हुआ इनोवेशन व्यावसायिक स्तर तक पहुंच सकता है।
Forbes India 30 Under 30 में भी मिली पहचान
दिव्यांशु कुमार को उनके काम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। 2025 में उन्हें Forbes India 30 Under 30 सूची में शामिल किया गया।
मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के लिए रोबोटिक समाधान विकसित करने की उनकी कोशिश इस पहचान की प्रमुख वजहों में रही।
यह उपलब्धि उन युवा इंजीनियरों के लिए भी प्रेरणा है, जो पढ़ाई के दौरान किसी वास्तविक समस्या पर काम करके उसे आगे स्टार्टअप के रूप में विकसित करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है कहानी
दिव्यांशु कुमार की कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। कई यूजर्स ने उनके काम को ऐसी इंजीनियरिंग का उदाहरण बताया, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी को सुरक्षित बनाने के लिए किया गया।
खास तौर पर सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे जोखिम भरे कामों में रोबोट के इस्तेमाल की संभावना को लोगों ने सकारात्मक नजरिए से देखा है।
इंजीनियरिंग सिर्फ मशीन बनाना नहीं
दिव्यांशु कुमार की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि इंजीनियरिंग का मतलब केवल नई मशीन या सॉफ्टवेयर तैयार करना नहीं है। असली चुनौती तब होती है, जब तकनीक का इस्तेमाल किसी वास्तविक और गंभीर समस्या को हल करने के लिए किया जाए।
एक कॉलेज प्रोजेक्ट से शुरू हुई उनकी कोशिश अब स्टार्टअप का रूप ले चुकी है। अगर रोबोटिक तकनीक बड़े स्तर पर ऐसे खतरनाक कामों में इंसानों की जरूरत कम करने में सफल होती है, तो इसका असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
दिव्यांशु कुमार का सफर यही दिखाता है कि एक सही समस्या की पहचान, तकनीकी समाधान और उसे जमीन पर लागू करने की कोशिश मिलकर कॉलेज के आइडिया को बड़े बदलाव में बदल सकती है।


