IMD Weather Report: भारत में इस साल मॉनसून की चाल चिंता बढ़ा रही है। जून और जुलाई के बाद अगस्त में भी बारिश का वितरण असमान रहा और अब सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, 1 जून से 31 अगस्त तक देश में सामान्य के मुकाबले 14 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ ही भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर भारतीय मॉनसून पर पड़ सकता है।
जून से सितंबर तक चलने वाला चार महीने का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून देश की कृषि और जल संसाधनों के लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में सीजन के आखिरी महीने सितंबर में भी बारिश कमजोर रहने का अनुमान किसानों के साथ-साथ जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा सकता है।
सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, हर क्षेत्र में स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।
IMD प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा के मुताबिक, सितंबर में बारिश का वितरण असमान रह सकता है। ऐसे में कुछ क्षेत्रों को अच्छी बारिश मिल सकती है, जबकि कई इलाकों में बारिश की कमी बनी रहने की संभावना है।
मजबूत अल नीनो से बढ़ी मॉनसून की चिंता
मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है।
मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है। यही वजह है कि सितंबर की बारिश को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
अल नीनो को आमतौर पर भारत में कमजोर मॉनसून और सामान्य से अधिक गर्म मौसम से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, किसी एक मौसम प्रणाली के आधार पर पूरे देश में बारिश का अनुमान तय नहीं किया जाता और क्षेत्रीय परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं।
IOD फिलहाल सामान्य, मॉनसून को नहीं मिल रही अतिरिक्त मदद
हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति फिलहाल सामान्य बनी हुई है और सितंबर तक इसके सामान्य रहने का अनुमान है।
सकारात्मक IOD की स्थिति भारतीय मॉनसून के लिए मददगार मानी जाती है और इससे कुछ परिस्थितियों में बारिश को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन मौजूदा समय में IOD के सामान्य रहने के कारण मॉनसून को हिंद महासागर से अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद कम है।
ऐसे में सितंबर की बारिश पर प्रशांत महासागर की परिस्थितियों और अन्य मौसमी कारकों का असर महत्वपूर्ण हो सकता है।
31 अगस्त तक 14% कम हुई मॉनसून की बारिश
इस साल मॉनसून के दौरान बारिश का वितरण देशभर में एक जैसा नहीं रहा। 1 जून से 31 अगस्त तक कुल बारिश सामान्य से 14 फीसदी कम रही।
जून में स्थिति विशेष रूप से कमजोर रही थी और बारिश की कमी करीब 35 फीसदी तक पहुंच गई थी। इसके बाद जुलाई में बारिश से कुछ राहत मिली, लेकिन पूरे मॉनसून सीजन की संचयी कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बारिश के वितरण का आकलन किए गए 741 जिलों में से 312 जिलों यानी करीब 42 फीसदी में 31 अगस्त तक सामान्य से कम बारिश हुई। वहीं, 38 जिलों यानी करीब 5 फीसदी में बहुत कम बारिश दर्ज की गई।
इससे साफ है कि देश में बारिश की कमी सिर्फ राष्ट्रीय औसत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई जिलों में स्थानीय स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।
1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म रहा अगस्त
कम बारिश के साथ अगस्त में कई हिस्सों में गर्मी ने भी चिंता बढ़ाई। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अगस्त का तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा।
दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में अगस्त 1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म अगस्त रहा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में यह महीना रिकॉर्ड के लिहाज से तीसरा सबसे गर्म रहा।
उत्तर-पश्चिम भारत में भी तापमान काफी अधिक रहा और क्षेत्र में 126 साल के रिकॉर्ड में पांचवां सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया।
इस तरह बारिश की कमी और अधिक तापमान ने कई क्षेत्रों में मिट्टी की नमी तथा पानी की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को बढ़ाया है।
सितंबर में कम बारिश से किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
सितंबर की बारिश खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन फसलों की वृद्धि और उत्पादन के अंतिम चरण में पर्याप्त नमी जरूरी होती है।
इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 2 फीसदी कम बताया गया है। ऐसे में सितंबर में बारिश कमजोर रहने पर कुछ क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।
बारिश की कमी होने पर खेतों में नमी बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। इससे डीजल, बिजली और पानी की लागत बढ़ने की आशंका है। खासकर उन इलाकों में इसका असर ज्यादा हो सकता है जहां सिंचाई की सुविधाएं सीमित हैं।
जल संसाधनों पर भी नजर
मॉनसून की बारिश सिर्फ खेती के लिए ही नहीं, बल्कि देश के जल संसाधनों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बारिश कम रहने से कुछ क्षेत्रों में जलाशयों, भूजल रिचार्ज और स्थानीय जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, सितंबर में होने वाली बारिश और उसका क्षेत्रीय वितरण आने वाले हफ्तों में तस्वीर को कुछ हद तक बदल सकता है। इसलिए राष्ट्रीय औसत के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों और जिलों में बारिश की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।
क्या सितंबर में बदल सकती है तस्वीर?
सितंबर में सामान्य से कम बारिश का मौजूदा अनुमान निश्चित परिणाम नहीं है। मॉनसून के अंतिम महीने में बारिश का वास्तविक प्रदर्शन मौसम प्रणालियों, समुद्री परिस्थितियों और क्षेत्रीय बदलावों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल 14 फीसदी संचयी बारिश की कमी, मजबूत अल नीनो और सामान्य IOD ऐसे प्रमुख संकेत हैं, जिन पर मौसम विभाग और कृषि क्षेत्र की नजर बनी हुई है। अगर सितंबर में भी बारिश कमजोर रहती है, तो पूरे मॉनसून सीजन की कमी और बढ़ सकती है और इसका असर कृषि लागत, फसल उत्पादन तथा जल संसाधनों पर देखने को मिल सकता है।


