Bangladesh Power Crisis: बांग्लादेश इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। गैस की कमी और ईंधन आपूर्ति पर दबाव के कारण कई इलाकों में लंबे पावर कट लगाए जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती 10 से 12 घंटे तक पहुंच गई है। हालात को संभालने के लिए सरकार ने बिजली बचाने के उपाय तेज कर दिए हैं और बाजारों व दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। इसी बीच ढाका ने भारत से अतिरिक्त डीजल सप्लाई बढ़ाने की मांग भी की है।
बांग्लादेश में बिजली संकट एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। गैस की कमी, LNG सप्लाई में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल का असर देश के पावर सेक्टर पर पड़ा है। कई इलाकों में लोगों को लंबे समय तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में पावर कट की अवधि 10 से 12 घंटे तक पहुंच गई है।
बिजली की कमी का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। उद्योग, बाजार, कृषि और छोटे कारोबार भी इसकी चपेट में हैं। सरकार अब बिजली की खपत कम करने के लिए बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन के समय में कटौती कर रही है। इसी क्रम में दुकानों, बाजारों और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने का फैसला किया गया है।
गैस संकट ने बिगाड़ी बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था
बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था प्राकृतिक गैस और आयातित LNG पर काफी निर्भर है। घरेलू गैस उत्पादन में गिरावट के कारण देश को LNG के आयात पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में जब LNG की आपूर्ति में व्यवधान आता है तो इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ता है।
इस संकट को जुलाई में एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा। अमेरिकी कंपनी Excelerate Energy द्वारा संचालित एक फ्लोटिंग LNG टर्मिनल में 21 जुलाई को आग लग गई थी। इस घटना के बाद टर्मिनल को बंद करना पड़ा और करीब 450 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन की गैस आपूर्ति प्रभावित हुई।
हालांकि अगस्त की शुरुआत में टर्मिनल की एक regasification unit ने आंशिक रूप से काम करना शुरू कर दिया। इससे करीब 115 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन गैस की अतिरिक्त आपूर्ति राष्ट्रीय ग्रिड को मिलने लगी, लेकिन पूरी क्षमता बहाल नहीं होने के कारण संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
बांग्लादेश की गैस मांग और उपलब्धता के बीच पहले से ही बड़ा अंतर है। Reuters के मुताबिक देश की कुल गैस मांग लगभग 3,800-4,000 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन है, जबकि राष्ट्रीय ग्रिड को सामान्य तौर पर करीब 2,600 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन की आपूर्ति मिलती है।
कई इलाकों में 10-12 घंटे तक बिजली कटौती
गैस की कमी के कारण बिजली संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा है। इसका परिणाम लोड शेडिंग के रूप में सामने आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों और कई शहरों में लोगों को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी के मौसम में लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से घरों में पंखे और एयर कंडीशनर बंद हो जाते हैं। पानी की पंपिंग, छोटे कारोबार और स्थानीय सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। बिजली की अनिश्चित उपलब्धता ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकार को अब बिजली बचाने के लिए व्यावसायिक गतिविधियों के समय को भी सीमित करना पड़ रहा है।
रात 8 बजे बंद होंगे बाजार और शॉपिंग मॉल
बांग्लादेश में बिजली बचाने के लिए बाजारों, दुकानों और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का मकसद शाम के समय बिजली की मांग को कम करना और उपलब्ध बिजली को जरूरी क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही बिलबोर्ड और अन्य गैर-जरूरी रोशनी को बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार बिजली की खपत कम करने के लिए सजावटी और विज्ञापन संबंधी लाइटिंग पर भी नियंत्रण बढ़ा रही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बांग्लादेश में बाजार बंद करने का समय पिछले कुछ महीनों में कई बार बदला गया है। अप्रैल में दुकानों और मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने की पहल हुई थी। जून में बिजली बचाने के लिए कुछ अवधि में बाजारों को शाम 7 बजे तक बंद करने का निर्देश भी दिया गया था।
इसलिए मौजूदा 8 बजे की व्यवस्था को मौजूदा ऊर्जा संकट के बीच लागू किए गए ताजा बिजली-बचत उपाय के तौर पर देखा जा रहा है।
उद्योग और खेती पर भी बढ़ा दबाव
बिजली संकट का असर बांग्लादेश के औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। कपड़ा और गारमेंट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण कंपनियों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
कई औद्योगिक इकाइयों को बिजली कटौती के दौरान डीजल जनरेटर चलाने पड़ते हैं। इससे उत्पादन लागत बढ़ती है और पहले से दबाव झेल रही कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र भी बिजली संकट से अछूते नहीं हैं। जहां पानी की पंपिंग, सिंचाई या ऑक्सीजन एरेटर के लिए बिजली की जरूरत होती है, वहां लंबे पावर कट से उत्पादन और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है।
इस तरह बिजली संकट अब केवल ऊर्जा क्षेत्र की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई, रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और घरेलू आय तक पहुंच सकता है।
भारत से अतिरिक्त डीजल मांग रहा बांग्लादेश
बिजली और ईंधन की जरूरत को देखते हुए बांग्लादेश भारत से अतिरिक्त डीजल सप्लाई बढ़ाने की मांग कर चुका है। दोनों देशों के बीच पहले से ही India-Bangladesh Friendship Pipeline के जरिए डीजल की आपूर्ति होती है।
यह पाइपलाइन भारत के नुमालीगढ़ रिफाइनरी से बांग्लादेश के पार्बतीपुर तक ईंधन पहुंचाती है। इसकी लंबाई करीब 131 किलोमीटर है और इसे 2023 में औपचारिक रूप से शुरू किया गया था।
मौजूदा दीर्घकालिक समझौते के तहत भारत से बांग्लादेश को हर साल करीब 1.80 लाख मीट्रिक टन लो-सल्फर डीजल की आपूर्ति की जानी है। 2026 के लिए भी इसी मात्रा की आपूर्ति का प्रावधान है।
बांग्लादेश पहले भी मौजूदा समझौते से अतिरिक्त ईंधन की मांग कर चुका है। मार्च 2026 में ढाका ने भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग की थी, जिसे भारत ने विचाराधीन बताया था।
इसके अलावा भारत ने इस साल बांग्लादेश को कई खेपों में डीजल भेजा है। मार्च में 5,000 टन और उसके बाद 7,000 टन की अतिरिक्त खेप भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में ऊर्जा सहयोग क्यों अहम?
ऊर्जा संकट के बीच भारत और बांग्लादेश के बीच डीजल आपूर्ति का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश के लिए भारत एक नजदीकी और महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है, जबकि भारत के लिए बांग्लादेश एक प्रमुख पड़ोसी बाजार है।
दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों में पिछले दो वर्षों के दौरान तनाव रहा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने और भारत आने के बाद रिश्तों में कई मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए। हालांकि, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने हाल के महीनों में भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश की है।
10 अगस्त 2026 को तारिक रहमान ने भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया था।
ऐसे समय में ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों को व्यावहारिक आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आगे क्या है चुनौती?
बांग्लादेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती गैस और LNG आपूर्ति को स्थिर करना है। Excelerate Energy के LNG टर्मिनल की मरम्मत का काम जारी है और इसकी पूरी क्षमता बहाल होने के बाद गैस आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है।
लेकिन समस्या सिर्फ एक LNG टर्मिनल तक सीमित नहीं है। घरेलू गैस उत्पादन में गिरावट, आयातित LNG पर निर्भरता, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति ने बांग्लादेश के ऊर्जा तंत्र को अधिक संवेदनशील बना दिया है।
अगर गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं होती, तो बिजली कटौती का असर उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं पर लंबे समय तक बना रह सकता है। ऐसे में भारत से अतिरिक्त डीजल और अन्य ईंधन की आपूर्ति बांग्लादेश के लिए तत्काल राहत का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
निष्कर्ष
बांग्लादेश का मौजूदा बिजली संकट कई समस्याओं के एक साथ सामने आने का परिणाम है। LNG टर्मिनल में आग से गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, पहले से मौजूद गैस की कमी ने स्थिति को और गंभीर बनाया और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट ने ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया।
नतीजतन, कई इलाकों में लंबे पावर कट, बाजारों के जल्दी बंद होने और उद्योगों की बढ़ती लागत ने अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। अब बांग्लादेश भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में LNG आपूर्ति कितनी तेजी से सामान्य होती है और भारत से अतिरिक्त ईंधन कितना मिलता है, यह तय करेगा कि बांग्लादेश का ऊर्जा संकट कितनी जल्दी काबू में आता है।


