Badrinath Temple Donation Case: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंदिर के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान को चार घंटे की लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि CCTV फुटेज में वह कथित तौर पर नकदी के बंडल अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्हें 18 जुलाई को अदालत में पेश किया जाएगा। मामले की जांच अभी जारी है और SIT अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाल रही है।
चार घंटे की पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी
एसआईटी ने बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित चोरी और गबन की जांच के तहत पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर की गई है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
CCTV फुटेज में कैश जेब में रखने का दावा
जांच एजेंसी के अनुसार, 22 जून, 25 जून और 29 जून की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में राजेंद्र चौहान कथित रूप से नकदी के बंडल उठाकर अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि, यह दावा जांच एजेंसी का है और अदालत में इसकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। इसी फुटेज के आधार पर उनसे विस्तृत पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार किया गया।
अन्य संदिग्धों की भी जांच तेज
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 25 जून और 29 जून की रिकॉर्डिंग में कुछ अन्य लोगों की गतिविधियां भी संदिग्ध दिखाई दी हैं। एसआईटी ने इन व्यक्तियों की पहचान शुरू कर दी है और उनसे जल्द पूछताछ की जा सकती है।
जांच एजेंसी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कथित दुरुपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे नए साक्ष्य सामने आएंगे, जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
SIT सभी इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों की कर रही जांच
एसआईटी फिलहाल सीसीटीवी फुटेज, दान से जुड़े रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित हेराफेरी में किन-किन लोगों की भूमिका रही और पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित की गई।
अब तक किसी अन्य आरोपी के खिलाफ औपचारिक गिरफ्तारी की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और कार्रवाई हो सकती है।
बीकेटीसी की जांच समिति ने सौंपी 18 पन्नों की रिपोर्ट
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की ओर से गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने गुरुवार को अपनी 18 पन्नों की रिपोर्ट मुख्य कार्य अधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ को सौंप दी।
रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- दान की गणना के दौरान ड्रेस कोड लागू करना।
- गणना केंद्र और मंदिर परिसर में अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाना।
- निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना।
- श्रद्धालुओं की भागीदारी के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तैयार करना।
- दान की गणना और रिकॉर्डिंग सिस्टम को और मजबूत करना।
2 जुलाई को सोशल मीडिया पोस्ट से सामने आया मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत 2 जुलाई को हुई, जब सोशल मीडिया पर बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आए। इसके बाद बीकेटीसी ने जांच समिति का गठन किया।
प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष कार्यालय में वैयक्तिक सहायक के रूप में तैनात प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया गया। बाद में उनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज हुआ और जांच में साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
रिकॉर्ड रजिस्टर में ओवरराइटिंग भी मिली
जांच के दौरान मंदिर के चढ़ावे के रिकॉर्ड रखने वाले रजिस्टर में ओवरराइटिंग पाए जाने की बात भी सामने आई। इसके बाद खजांची संदेश मेहता को उनके पद से हटाकर अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया।
एसआईटी अब प्रमोद नौटियाल समेत अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है और पुराने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है।
डिलीट CCTV फुटेज रिकवर करने की कोशिश
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी पुराने और डिलीट हो चुके CCTV रिकॉर्ड को रिकवर कराने के लिए विशेषज्ञों की मदद ले रही है। यदि यह फुटेज सफलतापूर्वक प्राप्त हो जाती है तो जांच में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
इधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल मंडल के कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति भी पूरे मामले की समानांतर जांच कर रही है।
निष्कर्ष
बद्रीनाथ मंदिर दान घोटाला मामला अब लगातार गंभीर होता जा रहा है। पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाल रही हैं। फिलहाल जांच जारी है और अदालत में पेश किए जाने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक जांच और अदालत के फैसले के बाद ही सामने आएगा।


