Uber-Ola Taxi News: अतिरिक्त GST का बोझ बढ़ा तो ड्राइवरों की कमाई पर पड़ सकता है असर
नई दिल्ली। आने वाले समय में Uber, Ola और अन्य ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का इस्तेमाल यात्रियों के लिए महंगा पड़ सकता है। इसकी वजह 5 फीसदी अतिरिक्त GST को लेकर बढ़ी चर्चा है। एक नए सर्वे में सामने आया है कि यदि कुछ ऐप आधारित टैक्सी प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ बढ़ता है तो इसका सीधा असर ड्राइवरों की कमाई और यात्रियों के खर्च दोनों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में ड्राइवरों ने आशंका जताई है कि अगर उनकी आय में और गिरावट आती है तो उन्हें कोई दूसरा रोजगार तलाशना पड़ सकता है।
पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक Esya Centre द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, देश के 13 शहरों में 1,000 से अधिक ड्राइवरों और यात्रियों की राय ली गई। सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि टैक्सी एग्रीगेटर सेक्टर में टैक्स व्यवस्था में बदलाव होने पर इसका असर केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाखों ड्राइवरों और करोड़ों यात्रियों तक पहुंचेगा।
सर्वे में क्या सामने आया?
Esya Centre के अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश ड्राइवर उन प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता देते हैं जहां उन्हें हर राइड पर कमीशन देने के बजाय एक निश्चित शुल्क देकर प्लेटफॉर्म से जुड़ने का विकल्प मिलता है। ऐसे मॉडल में ड्राइवर किराए की पूरी राशि अपने पास रख सकते हैं और उनकी आय पर अपेक्षाकृत कम दबाव पड़ता है।
सर्वे के अनुसार 75 फीसदी से अधिक ड्राइवरों ने कहा कि यदि अतिरिक्त टैक्स का बोझ बढ़ता है तो उनकी वास्तविक कमाई कम हो जाएगी। कई ड्राइवरों ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें वैकल्पिक रोजगार की तलाश करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, लगभग दो-तिहाई यात्रियों का मानना है कि यदि किराया बढ़ता है तो वे ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का उपयोग कम कर देंगे।
Esya Centre की डायरेक्टर मेघना बाल ने कहा कि टैक्स नीति में किसी भी बदलाव का प्रभाव केवल प्लेटफॉर्म कंपनियों पर नहीं पड़ता, बल्कि यह ड्राइवरों की आय, यात्रियों की सुविधा और पूरे शहरी परिवहन तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
वर्तमान में कैसे लगता है GST?
वर्तमान व्यवस्था में Uber और Ola जैसी अधिकांश ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर यात्रियों से कुल किराए का 5 फीसदी GST लिया जाता है। यह टैक्स यात्रा शुल्क का हिस्सा होता है और ऐप एग्रीगेटर कंपनियां इसे सरकार के पास जमा कराती हैं।
मौजूदा कमीशन आधारित मॉडल में प्लेटफॉर्म कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं ले सकतीं। ऐसे में टैक्स से जुड़ी अतिरिक्त लागत का प्रभाव अंततः पूरे बिजनेस मॉडल पर पड़ सकता है। यदि भविष्य में टैक्स नियमों में बदलाव होता है या अतिरिक्त GST का बोझ बढ़ता है तो कंपनियों और ड्राइवरों दोनों को अपनी लागत संरचना में बदलाव करना पड़ सकता है।
ड्राइवरों की कमाई पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?
पिछले कुछ वर्षों में ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों की आय पर कई तरह के दबाव बढ़े हैं। पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने परिचालन लागत बढ़ाई है। इसके अलावा वाहन की EMI, बीमा, सर्विसिंग और मेंटेनेंस पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई ड्राइवर प्रतिदिन 2,500 से 3,000 रुपये का कारोबार करता है तो उसमें से ईंधन, वाहन रखरखाव, EMI और अन्य खर्च निकालने के बाद वास्तविक बचत काफी कम रह जाती है। ऐसे में टैक्स या शुल्क से जुड़ी कोई भी अतिरिक्त लागत उसकी मासिक आय को और प्रभावित कर सकती है।
कई ड्राइवरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राइड की संख्या बढ़ने के बावजूद उनकी वास्तविक कमाई में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। यदि टैक्स का अतिरिक्त दबाव आता है तो यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
यदि टैक्सी सेवाओं की लागत बढ़ती है तो इसका असर यात्रियों के किराए पर भी दिखाई दे सकता है। आमतौर पर कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। इसका मतलब है कि दैनिक यात्रा करने वाले लोगों को अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों और बड़े शहरों में ऑफिस आने-जाने वाले यात्रियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। यदि किराया लगातार बढ़ता है तो लोग मेट्रो, बस या अन्य सार्वजनिक परिवहन विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
सर्वे में शामिल कई यात्रियों ने भी माना कि किराया बढ़ने की स्थिति में वे ऐप आधारित कैब सेवाओं का उपयोग सीमित कर देंगे और केवल जरूरी यात्राओं के लिए ही इनका इस्तेमाल करेंगे।
ऐप आधारित टैक्सी उद्योग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
भारत में ऐप आधारित टैक्सी उद्योग पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। Uber और Ola जैसी कंपनियों ने शहरी परिवहन को काफी हद तक बदल दिया है। लाखों ड्राइवर इन प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग रोजाना इन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
इस क्षेत्र में किसी भी तरह के टैक्स या नियामकीय बदलाव का असर व्यापक हो सकता है। यदि ड्राइवरों की आय घटती है तो प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ड्राइवरों की संख्या कम हो सकती है। वहीं यदि किराया बढ़ता है तो यात्रियों की मांग में कमी आ सकती है। दोनों स्थितियां उद्योग की वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नीति निर्माताओं को ऐसे किसी भी बदलाव पर निर्णय लेते समय ड्राइवरों, यात्रियों और प्लेटफॉर्म कंपनियों तीनों के हितों को ध्यान में रखना होगा।
क्या ड्राइवर वास्तव में दूसरा काम तलाश सकते हैं?
सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि बड़ी संख्या में ड्राइवर अपनी आय को लेकर चिंतित हैं। कई ड्राइवरों ने कहा कि यदि अतिरिक्त लागत के कारण कमाई में उल्लेखनीय गिरावट आती है तो वे डिलीवरी सेवाओं, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स सप्लाई या अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तलाश सकते हैं।
हालांकि उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पूरी तरह टैक्स नीति पर निर्भर करेगी। यदि लागत बढ़ने के बावजूद कंपनियां और सरकार ऐसा मॉडल तैयार करती हैं जिससे ड्राइवरों की आय सुरक्षित रहे, तो बड़े पैमाने पर ड्राइवरों के प्लेटफॉर्म छोड़ने की संभावना कम हो सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल अतिरिक्त GST को लेकर चर्चा जारी है और अंतिम नीति संबंधी फैसलों पर सभी की नजर बनी हुई है। टैक्सी उद्योग से जुड़े हितधारकों का मानना है कि किसी भी बदलाव से पहले उसके आर्थिक प्रभाव का व्यापक अध्ययन जरूरी है।
यदि टैक्स का बोझ बढ़ता है तो किराए में वृद्धि, ड्राइवरों की आय में कमी और यात्रियों की मांग में गिरावट जैसे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं संतुलित नीति अपनाए जाने पर उद्योग की वृद्धि और रोजगार दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
ऐसे में आने वाले महीनों में टैक्सी एग्रीगेटर सेक्टर से जुड़ी नीतियां न केवल ड्राइवरों बल्कि रोजाना कैब सेवाओं का उपयोग करने वाले लाखों यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होंगी.
FAQs
क्या Uber और Ola का किराया बढ़ सकता है?
यदि टैक्स या परिचालन लागत बढ़ती है तो कंपनियां किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
ड्राइवर अतिरिक्त GST का विरोध क्यों कर रहे हैं?
ड्राइवरों का कहना है कि इससे उनकी वास्तविक कमाई कम हो सकती है और परिचालन लागत बढ़ सकती है।
Esya Centre के सर्वे में कितने लोग शामिल थे?
सर्वे 13 शहरों में 1,000 से अधिक ड्राइवरों और यात्रियों पर किया गया।
यात्रियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
किराया बढ़ने की स्थिति में यात्रियों का खर्च बढ़ सकता है और कई लोग कैब बुकिंग कम कर सकते हैं।
क्या ड्राइवर वास्तव में दूसरा रोजगार तलाश सकते हैं?
सर्वे में शामिल कई ड्राइवरों ने कहा कि आय घटने पर वे अन्य रोजगार विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।


