Air India Pilot Dope Test: एयर इंडिया ने फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। एयरलाइन ने अपने ग्रुप की दोनों कंपनियों एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के सभी पायलटों का डोप टेस्ट कराने का फैसला किया है। यह फैसला उस समय लिया गया है जब 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड (PIC) का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था।
एयरलाइन के मुताबिक, यह एक बार की जाने वाली विशेष स्क्रीनिंग प्रक्रिया होगी, जो DGCA के मौजूदा नियमों से भी आगे जाकर की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पायलट ऐसे साइकोएक्टिव पदार्थों या प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल न कर रहा हो, जिससे उड़ान सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
एयर इंडिया के 5,000 पायलटों की होगी जांच
एयर इंडिया ग्रुप के पास इस समय करीब 5,000 पायलट और लगभग 300 विमानों का बेड़ा है। कंपनी ने अपने पायलटों को भेजे गए एक आंतरिक संदेश में कहा है कि सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के लिए सभी पायलटों की स्क्रीनिंग की जाएगी।
एयरलाइन ने कहा कि वह पहले से ही DGCA के सभी सुरक्षा नियमों का पालन करती है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यात्रियों और एविएशन इंडस्ट्री का भरोसा बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाना जरूरी है।
यह टेस्टिंग 13 अगस्त 2026 से शुरू कर दी गई है।
DGCA नियमों में क्या है डोप टेस्ट का प्रावधान?
DGCA के सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) के तहत हर साल कम से कम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू, पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का रैंडम डोप टेस्ट किया जाता है।
इसके अलावा किसी भी गंभीर विमान घटना या सुरक्षा से जुड़े मामले के बाद भी ऐसे टेस्ट कराए जा सकते हैं। फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हादसे के बाद इसी प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ाई गई है।
छुट्टी पर गए पायलटों को भी देना होगा टेस्ट
सूत्रों के अनुसार, जो पायलट इस समय छुट्टी पर हैं, उन्हें ड्यूटी जॉइन करने के बाद डोप टेस्ट कराना होगा। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कुछ दिन लग सकते हैं।
एयर इंडिया ने कहा कि यह कदम नियमों से आगे बढ़कर सुरक्षा और प्रोफेशनलिज्म के उच्चतम स्तर को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
फुकेट-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में क्या हुआ था?
4 अगस्त को एयर इंडिया की एयरबस A320 (VT-EXO) फ्लाइट फुकेट से दिल्ली आ रही थी। उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
इस घटना में:
- 20 यात्री घायल हुए
- 4 केबिन क्रू सदस्य घायल हुए
- 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा
- विमान में कुल 137 यात्री, 6 केबिन क्रू और 2 पायलट मौजूद थे
इस घटना को सीरियस इंसिडेंट की श्रेणी में रखा गया है और इसकी जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है।
पायलट का डोप टेस्ट आया था पॉजिटिव
सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद पायलट-इन-कमांड का शुरुआती ड्रग टेस्ट ‘नॉन-नेगेटिव’ आया था। इसके बाद किए गए कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना (गांजा) की पुष्टि हुई।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि:
- ड्रग का सेवन कब किया गया था
- क्या फ्लाइट उड़ाते समय पायलट इसके प्रभाव में थे या नहीं
इन सभी पहलुओं की जांच जारी है।
पायलट ने बताई थी नींद की दवा लेने की बात
सूत्रों के अनुसार, पायलट ने अधिकारियों को बताया था कि वह नींद न आने की समस्या के लिए फैमिली डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा ले रहे थे।
उन्होंने यह भी बताया कि घटना के समय वह को-पायलट की सीट के पीछे खड़े थे और विमान के कंट्रोल पर नहीं थे।
एयरबस सिस्टम की भी हो रही जांच
इस हादसे में सिर्फ पायलट की भूमिका ही नहीं, बल्कि विमान के तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या एयरबस A320 के:
- हाइड्रोलिक सिस्टम
- फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम
में किसी तरह की खराबी इस घटना की वजह बनी थी।
जांच में विमान निर्माता कंपनी एयरबस और फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA भी सहयोग कर रही हैं।
एयर इंडिया का सुरक्षा पर बड़ा संदेश
एयर इंडिया ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कंपनी का मानना है कि यह अतिरिक्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया यात्रियों, कर्मचारियों और एविएशन सेक्टर के लोगों में भरोसा बढ़ाने में मदद करेगी।
फिलहाल AAIB की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हादसे की असली वजह क्या थी।


