भारत की प्रमुख एयरलाइन Air India ने बढ़ती लागत और कमजोर पड़ती यात्रा मांग के बीच बड़ा कदम उठाया है। एयर इंडिया ने जून से अगस्त 2026 के बीच लगभग 200 साप्ताहिक उड़ानों में कटौती करने का फैसला लिया है। इससे पहले मई 2026 में भी एयरलाइन करीब 90 उड़ानों में कटौती कर चुकी थी।
पश्चिम एशिया युद्ध, महंगे एविएशन फ्यूल (ATF), रुपये की कमजोरी और घटती ट्रैवल डिमांड ने एयरलाइन इंडस्ट्री पर जबरदस्त दबाव बना दिया है। एयर इंडिया, जो पहले रोजाना करीब 1,200 उड़ानें संचालित करती थी, अब लागत कम करने और घाटा नियंत्रित करने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है।
किन रूट्स पर घटाई गई उड़ानें?
एयर इंडिया ने कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर सेवाएं कम या अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं।
इनमें शामिल हैं:
- दिल्ली-शिकागो
- दिल्ली-नेवार्क
- दिल्ली-शंघाई
- मुंबई-न्यूयॉर्क
- दिल्ली-माले
- चेन्नई-सिंगापुर
- मुंबई-सिंगापुर
जैसे महत्वपूर्ण रूट्स। विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइन अब हर रूट की “फाइनेंशियल वायबिलिटी” का नए सिरे से आकलन कर रही है।
आखिर क्यों बढ़ा संकट?
एयर इंडिया पर दबाव बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं।
1. Jet Fuel की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, ATF महंगा हुआ है और एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ गई है। एविएशन सेक्टर में ईंधन लागत कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती है।
2. रुपये की कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार दबाव में है। क्योंकि विमान लीजिंग, मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और कई अंतरराष्ट्रीय भुगतान डॉलर में होते हैं, इसलिए कमजोर रुपये से एयरलाइन का खर्च और बढ़ जाता है।
3. ट्रैवल डिमांड में गिरावट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गैर-जरूरी विदेश यात्राएं कम करने, वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की अपील की थी। इसके बाद छुट्टियों, कॉरपोरेट ट्रैवल और discretionary spending में नरमी देखने को मिल रही है।
Air India को कितना नुकसान हुआ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में ₹22,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा झेलना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचता है, तो एयरलाइन इंडस्ट्री पर दबाव और बढ़ सकता है।
यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
फ्लाइट कटौती का असर सीधे यात्रियों पर दिखाई दे सकता है। इससे टिकट महंगे हो सकते हैं, सीटें कम उपलब्ध होंगी और वेटिंग बढ़ सकती है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा और पीक सीजन ट्रैवल महंगा पड़ सकता है।
अब Air India क्या नया प्लान ला रही है?
एयर इंडिया अब “Unbundling Strategy” पर काम कर रही है। यानी जो यात्री खाना नहीं लेना चाहते, या लाउंज एक्सेस नहीं चाहते, उन्हें सस्ता टिकट मिल सकता है।
Economy यात्रियों को क्या फायदा?
एयर इंडिया घरेलू और छोटी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में मील्स को optional बनाने पर विचार कर रही है। अगर यात्री खाना नहीं लेते हैं, तो टिकट कीमत में ₹250 तक की कमी संभव है।
Business Class में भी बदलाव
एयर इंडिया बिजनेस क्लास में lounge access को भी अलग करने की योजना बना रही है। जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट लाउंज ऑपरेटर प्रति यात्री ₹1,100-1,400 तक चार्ज करते हैं। अगर यात्री लाउंज सुविधा नहीं लेते हैं, तो बिजनेस क्लास टिकट सस्ता हो सकता है।
क्या पूरी एविएशन इंडस्ट्री दबाव में है?
विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ एयर इंडिया की समस्या नहीं है। दुनियाभर की एयरलाइंस बढ़ती ईंधन लागत, कमजोर मांग और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रही हैं। यही वजह है कि कई एयरलाइंस फ्लाइट्स घटा रही हैं किराया बढ़ा रही हैं ,और लागत कम करने के नए तरीके तलाश रही हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अगर पश्चिम एशिया युद्ध जारी रहता है, तेल महंगा बना रहता है और रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो आने वाले महीनों में एयरफेयर और महंगे हो सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रभावित हो सकती है और एयरलाइन सेक्टर में लागत कटौती तेज हो सकती है। हालांकि वैश्विक हालात सुधरने पर सेक्टर को राहत मिल सकती है।
Also Read:


