गर्मी की छुट्टियों में विदेश घूमने की तैयारी कर रहे यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। लगातार महंगे होते एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और बढ़ती परिचालन लागत के दबाव में एयर इंडिया ने कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करने का फैसला लिया है। एयरलाइन ने छह इंटरनेशनल रूट्स पर सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं, जबकि 23 अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानों की संख्या कम की जा रही है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री की लागत बढ़ा दी है। एयरलाइंस के लिए लंबी दूरी की उड़ानों का संचालन लगातार महंगा होता जा रहा है। इसका सीधा असर अब यात्रियों और एयरलाइन कंपनियों दोनों पर दिखाई देने लगा है।
किन 6 इंटरनेशनल रूट्स पर बंद होंगी उड़ानें?
रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया ने जून से अगस्त के बीच इन छह अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया है:
- दिल्ली – शिकागो (अमेरिका)
- मुंबई – न्यूयॉर्क (अमेरिका)
- दिल्ली – शंघाई (चीन)
- चेन्नई – सिंगापुर
- मुंबई – ढाका (बांग्लादेश)
- दिल्ली – माले (मालदीव)
इनमें से कई रूट्स एयर इंडिया के लिए हाई-डिमांड इंटरनेशनल सेक्टर माने जाते हैं। खासकर अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया वाले रूट्स पर हर साल बड़ी संख्या में भारतीय यात्री सफर करते हैं।
23 इंटरनेशनल रूट्स पर कम होंगी फ्लाइट्स
एयर इंडिया ने केवल रूट बंद नहीं किए हैं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय सेक्टरों पर उड़ानों की आवृत्ति (frequency) भी कम कर दी है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कुछ रूट्स को पुराने स्तर पर चलाना व्यावहारिक नहीं रह गया है।
हालांकि एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पूरी तरह प्रभावित नहीं होगा। एयर इंडिया हर महीने 1,200 से ज्यादा इंटरनेशनल उड़ानें जारी रखेगी।
बदले हुए शेड्यूल के तहत:
- नॉर्थ अमेरिका के लिए हर हफ्ते 33 उड़ानें
- यूरोप के लिए 47 उड़ानें
- यूनाइटेड किंगडम के लिए 57 उड़ानें
- ऑस्ट्रेलिया के लिए 8 उड़ानें
- दक्षिण-पूर्व एशिया, सुदूर पूर्व और SAARC देशों के लिए 158 उड़ानें
- मॉरीशस के लिए 7 साप्ताहिक उड़ानें जारी रहेंगी
आखिर क्यों बढ़ गई एयर इंडिया की मुश्किल?
एयर इंडिया के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है।
1. ईरान-अमेरिका तनाव से एयरस्पेस संकट
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद कई देशों ने अपने एयरस्पेस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इससे एयरलाइंस को कई उड़ानों में लंबा रूट लेना पड़ रहा है। लंबी दूरी का मतलब ज्यादा फ्यूल खपत, ज्यादा क्रू खर्च, ज्यादा ऑपरेशनल टाइम और बढ़ी हुई लागत
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप और अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों की लागत में पिछले कुछ महीनों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे विमान ईंधन यानी ATF पर पड़ रहा है। भारत में पहले ही एविएशन फ्यूल दुनिया के सबसे महंगे ईंधनों में गिना जाता है क्योंकि इस पर टैक्स का बोझ ज्यादा है।
अब अंतरराष्ट्रीय संकट ने स्थिति और मुश्किल बना दी है। कई एयरलाइंस के लिए लंबी दूरी की उड़ानों को मुनाफे में चलाना चुनौती बन गया है।
एयरलाइंस का फ्यूल खर्च 60% तक पहुंचा
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) के मुताबिक पहले एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 40% होती थी। लेकिन अब यह बढ़कर करीब 60% तक पहुंच गई है।
इसका मतलब है कि एयरलाइंस की कमाई का बड़ा हिस्सा केवल ईंधन खरीदने में जा रहा है। यही वजह है कि कई कंपनियां टिकट महंगे कर रही हैं, फ्लाइट्स घटा रही हैं या घाटे वाले रूट बंद कर रही हैं
यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
एयर इंडिया की इस कटौती का सबसे बड़ा असर गर्मियों की छुट्टियों में विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है।
संभावित असर:
- टिकट महंगे हो सकते हैं
- सीटों की उपलब्धता घट सकती है
- वैकल्पिक रूट्स पर दबाव बढ़ सकता है
- कनेक्टिंग फ्लाइट्स महंगी हो सकती हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में अन्य एयरलाइंस भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं।
टाटा ग्रुप के लिए बढ़ी चुनौती
टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया का अधिग्रहण बड़े बदलाव और विस्तार के विजन के साथ किया था। कंपनी ने नई फ्लाइट्स, नए विमान और नेटवर्क विस्तार पर बड़ा निवेश भी किया है। लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात ने एयरलाइन के वित्तीय दबाव को काफी बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया ने 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में करीब 220 अरब रुपये का रिकॉर्ड घाटा दर्ज किया है। इसी बीच कंपनी के CEO कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे की खबरों और नए नेतृत्व की तलाश ने भी एयरलाइन को चर्चा में ला दिया है।
बताया जा रहा है कि एयर इंडिया अब लागत घटाने की व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत कुछ रूट्स बंद किए जा रहे हैं, उड़ानों की संख्या घटाई जा रही है, बड़े अधिकारियों की सैलरी कटौती पर चर्चा हुई और कुछ नॉन-टेक्निकल स्टाफ को छुट्टी पर भेजने की योजना भी सामने आई
क्या आगे और महंगी होगी हवाई यात्रा?
एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में टिकट किराए बढ़ सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में और कटौती हो सकती है और एयरलाइन इंडस्ट्री की रिकवरी धीमी पड़ सकती है।
भारत में तेजी से बढ़ती एयर ट्रैवल डिमांड के बावजूद एयरलाइंस के लिए बढ़ती लागत सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि तेल कीमतों और वैश्विक तनाव में राहत मिलती है या नहीं।
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