जानें कौन है अब्दुल बासित, पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त, जिन्होंने भारत‑पाक विवाद के बीच provocative बयान दे कर नई दिल्ली और मुंबई तक को निशाना बनाने की बात कही है। पूरी खबर पढ़ें।
भारत‑पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद तनाव के बीच पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित (Abdul Basit) फिर से सुर्खियों में हैं। इनके हालिया बयान ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों को गर्म कर दिया है — खासकर भारत के खिलाफ संभावित हमलों के दावे को लेकर।
🇵🇰 अब्दुल बासित — करियर और पृष्ठभूमि
अब्दुल बासित एक राजनयिक (diplomat) हैं जिन्होंने पाकिस्तान के High Commissioner to India के रूप में 2014 से 2017 तक कार्य किया। वे क़रीब तीन दशक से पाक विदेश मंत्रालय से जुड़े रहे हैं और उन्होंने रूस, अमेरिका, जर्मनी सहित कई देशों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया।
पूर्व में उन्होंने पाकिस्तान की भौतिक और राजनीतिक नीतियों को एक डायरी और पुस्तक के माध्यम से भी साझा किया है, जिसमें भारत‑पाक रिश्तों की जटिलताओं का विस्तृत वर्णन मिलता है।
⚠️ विवादित बयान: भारत पर हमले की बात
हाल ही में अब्दुल बासित ने एक बेहद उत्तेजक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है, तो पाकिस्तान के “डिफ़ॉल्ट” फैसले के रूप में भारत के बड़े शहरों जैसे नई दिल्ली और मुंबई को निशाना बनाया जाना चाहिए।
यह बयान राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच तीखी प्रतिक्रिया का कारण बना है, क्योंकि यह दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद तनाव को और भड़क सकता है।
🗳️ भारतीय राजनीति की प्रतिक्रिया
इस बयान के बाद भारतीय राजनीतिक पार्टियों ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी है। भाजपा (BJP) ने अब्दुल बासित की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान “आतंकवाद के बिना जीवित नहीं रह सकता।” पार्टी का यह बयान दोनों देशों के बीच तनाव की गंभीरता को दर्शाता है।
एक अन्य भारतीय रिपोर्ट में भी बासित के बयान की आलोचना की गई कि ऐसे बयान “उत्तेजित और खतरनाक मानसिकता” को दिखाते हैं।
📌 पहले भी रहे विवाद
इतिहास में अब्दुल बासित और पाकिस्तान के राजनयिक मिशन से जुड़े कुछ समय पर आलोचनात्मक बातचीत भी देखी गई है। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान के प्रतिनिधि मंडल के साथ उन्होंने वर्ष 2015 में जम्मू और कश्मीर में कुछ अलगाववादी नेताओं से मुलाकात की थी, जिसे भारत में आपत्तिजनक बताया गया था।
कश्मीर आन्दोलन, पाकिस्तान और Hurriyat Conference जैसे समूहों को लेकर दोनों देशों में दशकों से मतभेद रहे हैं, और ऐसे राजनयिक कदम अक्सर विवादों का विषय बनते रहे हैं।
🌏 निष्कर्ष — भारत‑पाक तनाव और अब्दुल बासित का प्रभाव
अब्दुल बासित के हालिया बयान ने भारतीय सुरक्षा, राजनयिक तनाव और जनता की भावना पर असर डाला है। चाहे यह बयान सिर्फ सैद्धांतिक परिदृश्य हो या कुछ और, यह दक्षिण एशियाई भू‑राजनीति में एक नया ताना‑बाना जोड़ता है।
भारत ने इसे कड़ी निंदा दी है, और दोनों देशों के बीच राजनयिक और सुरक्षा बातचीत पर इसका असर देखा जा रहा है।
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Author: Namam Sharma
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Namam Sharma NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
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