India Soyoil Imports: भारत में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले खाद्य तेल की खरीद तेज हो गई है। अगस्त में भारतीय रिफाइनरों ने रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन तेल आयात किया। इसके साथ ही पाम ऑयल का आयात भी पिछले छह महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। बाजार से जुड़े कारोबारियों के मुताबिक, रिफाइनरों ने आने वाले महीनों में बढ़ने वाली मांग को देखते हुए पहले से स्टॉक तैयार करना शुरू कर दिया था।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पांच कारोबारियों के अनुमान के आधार पर यह जानकारी दी है। भारत दुनिया में खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक है। ऐसे में भारतीय खरीद में तेजी का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
भारत ने अगस्त में कितना तेल आयात किया?
कारोबारियों के औसत अनुमान के मुताबिक, अगस्त में भारत का पाम ऑयल आयात करीब 7 फीसदी बढ़कर 7.80 लाख टन हो गया। यह पिछले महीने के मुकाबले काफी अधिक है और करीब छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।
दूसरी ओर, सोयाबीन तेल की खरीद में इससे भी ज्यादा तेजी देखने को मिली। अगस्त में इसका आयात 21 फीसदी बढ़कर करीब 6.01 लाख टन पहुंच गया। यह सोयाबीन तेल आयात का अब तक का रिकॉर्ड स्तर बताया जा रहा है।
इसके उलट सूरजमुखी तेल की खरीद में बड़ी गिरावट आई। इसका आयात करीब 38 फीसदी घटकर 1.57 लाख टन रह गया, जो छह महीने का सबसे निचला स्तर है।
कुल खाद्य तेल आयात भी 11 महीने के हाई पर
पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की बढ़ी हुई खरीद का असर भारत के कुल खाद्य तेल आयात पर भी दिखाई दिया। अगस्त में देश का खाद्य तेल आयात करीब 4 फीसदी बढ़कर 15.4 लाख टन हो गया।
यह लगभग 11 महीनों में सबसे ज्यादा आयात है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनर त्योहारों से पहले पर्याप्त स्टॉक जुटाने पर जोर दे रहे हैं।
नेपाल से आने वाला तेल इन आंकड़ों में शामिल नहीं
कारोबारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इन आयात अनुमानों में नेपाल के रास्ते जमीन से भारत आने वाले ड्यूटी-फ्री खाद्य तेल की मात्रा शामिल नहीं है।
अनुमान के मुताबिक अगस्त में नेपाल से करीब 1 लाख टन खाद्य तेल भारत पहुंचा। इसमें लगभग 90,000 टन सोयाबीन तेल था।
इसका मतलब है कि अगर नेपाल के रास्ते आने वाले तेल को भी कुल आंकड़ों में शामिल किया जाए तो भारत की वास्तविक सोयाबीन तेल खपत और आयात इससे भी अधिक हो सकता है।
त्योहारों से पहले रिफाइनरों ने क्यों बढ़ाई खरीद?
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच कई बड़े त्योहार आते हैं। इस दौरान घरों के साथ-साथ मिठाई, नमकीन और अन्य खाद्य उत्पादों में खाद्य तेल की मांग बढ़ जाती है।
इसी वजह से रिफाइनरों ने पहले से स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया। गुजरात के राजकोट स्थित ट्रेडिंग फर्म GGN रिसर्च के मैनेजिंग पार्टनर राजेश पटेल के मुताबिक, त्योहारों की मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों ने खरीद बढ़ाई।
एक और वजह यह रही कि तत्काल डिलीवरी के लिए उपलब्ध तेल बाद के महीनों की डिलीवरी वाले शिपमेंट की तुलना में ज्यादा सस्ता पड़ रहा था। ऐसे में रिफाइनरों के लिए अभी खरीदारी करके स्टॉक तैयार करना ज्यादा फायदेमंद रहा।
सोयाबीन तेल की कीमत क्यों पड़ रही है पाम ऑयल पर भारी?
सनविन ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव संदीप बजोरिया के मुताबिक, सोयाबीन तेल का आयात बढ़ने की एक बड़ी वजह इसकी कीमतों का पाम ऑयल के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी होना है।
जब किसी समय सोयाबीन तेल अपेक्षाकृत सस्ता उपलब्ध होता है तो भारतीय रिफाइनर अपनी खरीद का हिस्सा उसकी ओर बढ़ा देते हैं। अगस्त में भी ऐसा ही देखने को मिला।
दूसरी तरफ, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ब्लैक सी क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की सप्लाई प्रभावित होने की वजह से इसके आयात में गिरावट आई।
भारत किन देशों से खरीदता है पाम और सोयाबीन तेल?
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अलग-अलग तेलों के लिए भारत प्रमुख रूप से अलग-अलग देशों पर निर्भर है।
पाम ऑयल: भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल खरीदता है। अगस्त में भारतीय रिफाइनरों की बढ़ी खरीद से इन दोनों देशों के उत्पादकों को फायदा मिलने की संभावना है।
सोयाबीन तेल: भारत सोयाबीन तेल की बड़ी मात्रा अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों से मंगाता है। रूस और यूक्रेन भी सूरजमुखी तेल की सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस तरह भारत की बढ़ी हुई खरीद का सीधा असर प्रमुख उत्पादक देशों के निर्यात कारोबार पर पड़ता है।
सितंबर में भी आयात मजबूत रहने का अनुमान
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में खाद्य तेल की खरीद का रुझान सितंबर में भी मजबूत रह सकता है। त्योहारों का सीजन नजदीक आने के कारण रिफाइनरों की ओर से स्टॉक बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है।
संदीप बजोरिया के मुताबिक, सितंबर में भी भारत में सोयाबीन तेल और पाम ऑयल का आयात ऊंचे स्तर पर रहने की संभावना है।
भारत जैसे बड़े आयातक की लगातार खरीद से वैश्विक खाद्य तेल बाजार में मांग को समर्थन मिल सकता है। इसका असर आने वाले समय में पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।


