India GDP Growth Debate: भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर जारी बहस अब राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर तेज हो गई है। 7.8% की विकास दर पर पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन जैसे विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। वहीं केंद्र सरकार ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए जीडीपी के आंकड़ों का बचाव किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आलोचकों को ‘नकारात्मक सोच वाले लोग’ बताते हुए इशारों में राजन और गर्ग पर निशाना साधा है।
7.8% GDP Growth पर क्या बोले पीयूष गोयल?
भारत की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है। इस आंकड़े पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि 7.8% की ग्रोथ कोई अनुमान नहीं, बल्कि वास्तविक आंकड़ा है।
उन्होंने कहा कि आलोचक पुरानी और नई जीडीपी सीरीज के आंकड़ों की तुलना करके भ्रम पैदा कर रहे हैं। गोयल के मुताबिक नई जीडीपी सीरीज में बेस ईयर और गणना की पद्धति में बदलाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
गोयल ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘नकारात्मक सोच वाले लोग जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन 7.8% की ग्रोथ एक हकीकत है।’
इशारों में रघुराम राजन और सुभाष चंद्र गर्ग पर निशाना
पीयूष गोयल ने अपने बयान में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का सीधे नाम नहीं लिया। हालांकि, उन्होंने एक पूर्व वित्त सचिव और एक पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर का जिक्र करते हुए उनके कार्यकाल और उस दौर की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए।
गोयल ने 2012 से 2014 के बीच देश के सामने आई आर्थिक चुनौतियों की ओर भी इशारा किया। उनका कहना था कि उस दौर के प्रदर्शन को देखते हुए आज की अर्थव्यवस्था और विकास दर पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने जीडीपी सीरीज में बदलाव को लेकर हो रही आलोचना को भी खारिज किया। उनके मुताबिक पुरानी सीरीज से निकाली गई विकास दर और नई सीरीज से निकाली गई विकास दर की सीधे तुलना करना सही तरीका नहीं है।
पूर्व वित्त सचिव ने 7.8% GDP Growth पर उठाए सवाल
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सरकार की ओर से जारी 7.8% जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क है कि जीडीपी सीरीज में हुए संशोधनों के कारण विकास दर वास्तविक स्थिति से ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है।
गर्ग ने दावा किया था कि अलग आधार पर गणना करने पर वास्तविक ग्रोथ करीब 2.6% के आसपास हो सकती है। इसी आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने कहा कि आलोचकों को पहले यह समझना चाहिए कि समान आधार वाले आंकड़ों की तुलना कैसे की जाती है।
गोयल ने तर्क दिया कि जब जीडीपी की नई सीरीज में बेस ईयर बदला गया है, तो पुरानी सीरीज की ग्रोथ रेट को नई सीरीज की ग्रोथ रेट के साथ सीधे रखकर तुलना करना उचित नहीं है।
रघुराम राजन ने रोजगार को लेकर उठाया था सवाल
जीडीपी ग्रोथ को लेकर बहस सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के अवसरों को लेकर भी सवाल उठाया था।
राजन का सवाल था कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है तो देश के युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में नौकरियां क्यों नहीं पैदा हो रही हैं।
पीयूष गोयल ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अलग-अलग उद्योगों में कंपनियां उन्हें लगातार बता रही हैं कि उनके पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं।
‘तिरुपुर में एक लाख लोगों की जरूरत’
गोयल ने टेक्सटाइल सेक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह तिरुपुर जाते हैं तो उद्योग जगत के लोग उनसे ज्यादा कर्मचारियों की उपलब्धता की मांग करते हैं।
उनके मुताबिक टेक्सटाइल सेक्टर के लोगों ने उनसे कहा कि तिरुपुर में करीब एक लाख लोगों को भेजा जाए। कंपनियां इन लोगों को स्किल ट्रेनिंग देने और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।
गोयल का कहना है कि यह स्थिति इस बात का संकेत है कि कई क्षेत्रों में कंपनियों को काम करने वाले लोगों की जरूरत है और रोजगार की मांग मौजूद है।
L&T का उदाहरण देकर समझाया रोजगार का मुद्दा
पीयूष गोयल ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की बड़ी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का भी उदाहरण दिया।
गोयल के अनुसार, उन्होंने कंपनी से पूछा कि वह अपने कारोबार का तेजी से विस्तार क्यों नहीं कर रही है। कंपनी की ओर से उन्हें बताया गया कि पर्याप्त संख्या में लोग उपलब्ध नहीं होने के कारण विस्तार की गति प्रभावित हो रही है।
मंत्री ने कहा कि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की बड़ी पाइपलाइन मौजूद है। ऐसे में सरकार चाहती है कि ज्यादा कंपनियां आगे आएं और इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करें।
‘आलोचक यह बात पचा नहीं पा रहे’
जीडीपी ग्रोथ के आलोचकों पर पीयूष गोयल की टिप्पणी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
गोयल ने तंज कसते हुए कहा कि आलोचक इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि अब उनके पास कोई काम नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग टेलीविजन पैनल पर जाकर तर्क गढ़ने और मनगढ़ंत बातें करने में लगे हैं।
उनके मुताबिक देश को लगातार नकारात्मकता फैलाने के बजाय आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
GDP आंकड़ों पर क्यों छिड़ी है बहस?
भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ ने एक नई आर्थिक बहस को जन्म दिया है। एक तरफ सरकार इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और तेज विकास का प्रमाण बता रही है। दूसरी तरफ कुछ अर्थशास्त्री और पूर्व नीति-निर्माता जीडीपी की नई सीरीज, बेस ईयर में बदलाव और आंकड़ों की तुलना को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इस बहस का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रोजगार है। सवाल यह है कि तेज जीडीपी ग्रोथ का फायदा किस हद तक आम लोगों और खासकर युवाओं तक पहुंच रहा है।
सरकार का तर्क है कि निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। वहीं आलोचक आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के बीच अंतर को लेकर ज्यादा स्पष्ट आंकड़ों की मांग कर रहे हैं।
पीयूष गोयल ने दी ‘सकारात्मक सोच’ की सलाह
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को अपनी आर्थिक प्रगति को लेकर नकारात्मक नजरिया रखने के बजाय भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि देश को नकारात्मकता की जरूरत है या ऐसे नेताओं की, जो दूरदर्शी सोच के साथ सकारात्मक ऊर्जा लाएं और देश के युवाओं के लिए बेहतर भविष्य तैयार करने पर काम करें।
इस तरह 7.8% की जीडीपी ग्रोथ का मुद्दा अब सिर्फ आर्थिक आंकड़ों की चर्चा नहीं रह गया है। इसके साथ जीडीपी की गणना, नई-पुरानी सीरीज, रोजगार और भारत की आर्थिक दिशा जैसे कई बड़े सवाल भी जुड़ गए हैं।


