First CEO of Ram Mandir Trust: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक अहम फैसला लेते हुए अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम का ऐलान कर दिया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल और पश्चिमी वायु कमान के पूर्व कमांडर-इन-चीफ जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के बाद मंदिर से जुड़े प्रशासन, प्रबंधन और विभिन्न परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी अब उनके पास होगी।
ट्रस्ट की बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक अयोध्या स्थित मणिराम दास छावनी में महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ आमंत्रित सदस्य भी मौजूद रहे।
पहली बार राम मंदिर ट्रस्ट में CEO पद
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार CEO का पद बनाया है। जितेंद्र मिश्रा को इस पद पर नियुक्त किए जाने को मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कार्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, मंदिर परिसर से जुड़ी विभिन्न परियोजनाएं, व्यवस्थाओं का विस्तार और भविष्य की योजनाओं के चलते प्रशासनिक स्तर पर एक अनुभवी अधिकारी की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में लंबे सैन्य अनुभव वाले जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति अहम मानी जा रही है।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की भी नियुक्ति
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने तीन नए सदस्यों को शामिल करने का भी ऐलान किया है। इनमें अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं।
इन नियुक्तियों के बाद ट्रस्ट के कामकाज में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर और मजबूती आने की उम्मीद है।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग (फाइटर) शाखा से अपने सैन्य करियर की शुरुआत की थी।
करीब चार दशक लंबे करियर के दौरान उन्होंने वायुसेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली। वह मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के चीफ टेस्ट पायलट और Su-30 MKI एयरबेस के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर जैसे अहम पदों पर काम कर चुके हैं।
वह लगातार पदोन्नति हासिल करते हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट से विंग कमांडर, ग्रुप कैप्टन, एयर कमोडोर और एयर वाइस मार्शल के पद तक पहुंचे। बाद में उन्हें एयर मार्शल के पद की जिम्मेदारी मिली।
Su-30 MKI और ब्रह्मोस प्रोजेक्ट में निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और तकनीकी जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। HAL में चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर उन्होंने लड़ाकू विमानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में भूमिका निभाई।
Su-30 MKI लड़ाकू विमान में ब्रह्मोस मिसाइल को एकीकृत करने से जुड़े चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट में भी उनकी अहम भूमिका बताई जाती है। इस परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए तकनीकी और परिचालन स्तर पर व्यापक समन्वय की जरूरत थी।
उनके अनुभव में केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए सैन्य अभ्यास भी शामिल रहे हैं।
फ्रांस में गरुड़ IV अभ्यास में किया भारतीय दल का नेतृत्व
जून 2010 में फ्रांस में आयोजित बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास गरुड़ IV में जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय दल का नेतृत्व किया था। इस अभ्यास में विभिन्न देशों की वायुसेनाओं ने हिस्सा लिया था।
इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में भारतीय वायुसेना का नेतृत्व करना उनके सैन्य अनुभव और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
राष्ट्रपति से मिल चुका है विशिष्ट सेवा पदक
जितेंद्र मिश्रा को उनकी सेवाओं और नेतृत्व क्षमता के लिए राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया गया था। वायुसेना मुख्यालय में परिचालन योजना एवं मूल्यांकन समूह के निदेशक के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
इस पद पर रहते हुए वह सैन्य परिचालन योजनाओं और रणनीतिक आकलन से जुड़े कार्यों का हिस्सा रहे। उनके लंबे सैन्य अनुभव में ऑपरेशनल, तकनीकी और प्रशासनिक—तीनों स्तरों की जिम्मेदारियां शामिल रही हैं।
30 अप्रैल 2026 को हुए थे रिटायर
करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं देने के बाद जितेंद्र मिश्रा 30 अप्रैल 2026 को एयर मार्शल और कमांडर-इन-चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए।
अब सैन्य सेवा से रिटायर होने के कुछ महीनों बाद उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की जिम्मेदारी मिली है। ऐसे में उनके सामने धार्मिक स्थल के प्रशासन, प्रबंधन और उससे जुड़ी भविष्य की योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है और मंदिर परिसर से जुड़ी व्यवस्थाओं का दायरा भी विस्तृत हुआ है। ऐसे में ट्रस्ट के स्तर पर प्रशासनिक कार्यों के लिए CEO का पद बनाया जाना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जितेंद्र मिश्रा का करीब चार दशक का सैन्य अनुभव, नेतृत्व क्षमता और बड़े स्तर के प्रोजेक्ट्स को संभालने का अनुभव इस नई भूमिका में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य की परियोजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
निष्कर्ष
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के तौर पर नियुक्ति एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव है। भारतीय वायुसेना में लंबे और विविध अनुभव के बाद अब उनके सामने अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति के साथ यह फैसला मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है।


