India GDP Growth: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की शानदार वृद्धि दर्ज की है। GDP का यह आंकड़ा बाजार के अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से बेहतर रहा। हालांकि, इतनी तेज आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों पर सवाल भी उठने लगे हैं। आलोचकों ने इसे ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ तक बताया है। अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने इन सवालों का जवाब दिया है।
सान्याल ने GDP के आंकड़ों का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई गंभीर अर्थशास्त्री मौजूदा डेटा को देखकर इसे अविश्वसनीय बताएगा। उनके मुताबिक, भारत की GDP गणना में हाल में किया गया बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और इसकी प्रक्रिया पहले से तय थी।
7.8% GDP ग्रोथ पर क्या बोले संजीव सान्याल?
इंडिया टुडे टीवी से बातचीत में संजीव सान्याल ने कहा कि GDP के आंकड़ों को लेकर उठाए जा रहे सवालों को वह सही नहीं मानते। उनका कहना है कि भारत की GDP गणना की पद्धति में बदलाव किसी आंकड़े को बेहतर दिखाने के उद्देश्य से नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत ने GDP की गणना के लिए अपनी मेथडोलॉजी को अपडेट किया है और यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप है। सान्याल के मुताबिक, नए आंकड़ों को देखकर यह कहना उचित नहीं होगा कि देश की आर्थिक वृद्धि सिर्फ सांख्यिकीय बदलाव का परिणाम है।
वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP 7.8 फीसदी बढ़ी। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में दर्ज 6.9 फीसदी की वृद्धि से भी ज्यादा है। साथ ही यह RBI के करीब 7 फीसदी के अनुमान से भी ऊपर रही।
GDP का बेस ईयर क्यों बदला गया?
GDP के आंकड़ों पर हो रही बहस में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बेस ईयर का है। संजीव सान्याल ने बताया कि भारत में GDP की गणना से जुड़ी मेथडोलॉजी और बेस ईयर को अपडेट करने की प्रक्रिया काफी समय से लंबित थी।
आमतौर पर GDP की गणना के लिए बेस ईयर को समय-समय पर बदला जाता है, ताकि अर्थव्यवस्था की मौजूदा तस्वीर को बेहतर तरीके से मापा जा सके। लेकिन इस बार इसमें देरी हुई।
सान्याल के अनुसार, दशक की शुरुआत के वर्षों में कोरोना महामारी का असाधारण प्रभाव था। इसलिए उस अवधि को सामान्य आर्थिक गतिविधियों का प्रतिनिधि वर्ष मानना मुश्किल था। इसी वजह से सरकार ने एक अधिक सामान्य वर्ष उपलब्ध होने तक इंतजार किया।
अब बेस ईयर में बदलाव के साथ GDP गणना की पद्धति को भी अपडेट किया गया है।
नए बेस ईयर से GDP ग्रोथ ज्यादा क्यों दिख सकती है?
सान्याल ने समझाया कि जब GDP का बेस ईयर बदला जाता है तो अर्थव्यवस्था में मौजूद पुराने और अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण क्षेत्रों का वजन कम हो सकता है। इसके साथ ही नए और तेजी से बढ़ रहे सेक्टरों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलता है।
यही वजह है कि बेस ईयर में बदलाव के बाद GDP की तस्वीर में अंतर दिखाई दे सकता है।
उनका कहना है कि इस प्रक्रिया का प्रभाव पहले से स्पष्ट था और सरकार ने इसके बारे में जानकारी भी दी थी। इसलिए अब GDP के मजबूत आंकड़े आने के बाद सिर्फ बेस ईयर में बदलाव को इसका कारण बताना उचित नहीं है।
IMF की सलाह के मुताबिक हुआ बदलाव
संजीव सान्याल ने यह भी कहा कि GDP की गणना में किया गया बदलाव भारत की ओर से मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, IMF और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लंबे समय से भारत से GDP की गणना की पद्धति को अपडेट करने की अपेक्षा कर रही थीं।
सान्याल ने जोर देकर कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवश्यक बदलाव किए हैं। इसलिए नए GDP आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सिर्फ मेथडोलॉजी में बदलाव के आधार पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
सिर्फ GDP नहीं, दूसरे आंकड़े भी दे रहे हैं मजबूती के संकेत
सान्याल ने GDP की मजबूती को समझाने के लिए कुछ दूसरे आर्थिक संकेतकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन केवल सरकार द्वारा जारी GDP आंकड़ों से नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने ऑटोमोबाइल बिक्री का उदाहरण देते हुए कहा कि ये आंकड़े सरकार द्वारा तैयार नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा कंपनियों के कॉर्पोरेट मुनाफे में भी मजबूती दिखाई दे रही है।
उनके मुताबिक, अगर इन संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाए तो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आने वाली कुछ तिमाहियों में GDP की रफ्तार मौजूदा स्तर से कुछ कम हो सकती है।
पूरे वित्त वर्ष में भी अच्छी ग्रोथ की उम्मीद
7.8 फीसदी की पहली तिमाही की वृद्धि के बावजूद संजीव सान्याल ने यह संकेत नहीं दिया कि पूरे वित्त वर्ष में इसी स्तर की ग्रोथ बनी रहेगी। उन्होंने माना कि आने वाली तिमाहियों में विकास दर में कुछ नरमी आ सकती है।
इसके बावजूद उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत को कुल मिलाकर एक मजबूत GDP ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
वहीं, RBI ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.7 फीसदी GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया है। पहली तिमाही के 7.8 फीसदी आंकड़े ने इस अनुमान के मुकाबले बेहतर शुरुआत दिखाई है।
कांग्रेस ने GDP के आंकड़ों पर उठाए सवाल
GDP के आंकड़े सामने आने के बाद विपक्ष ने भी सरकार और आर्थिक आंकड़ों पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 7.8 फीसदी की वृद्धि को लेकर कहा कि यह अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती।
उन्होंने दावा किया कि GDP का यह आंकड़ा कमजोर निजी निवेश भावना, उपभोक्ता विश्वास से जुड़ी चिंताओं और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करता।
जयराम रमेश ने घरेलू स्तर पर जरूरी वस्तुओं की कीमतों और चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे का भी उल्लेख किया। विपक्ष का तर्क है कि GDP में तेज वृद्धि के बावजूद आम लोगों और कारोबारियों की आर्थिक स्थिति को भी समान रूप से देखा जाना चाहिए।
GDP को लेकर बहस क्यों अहम है?
भारत की आर्थिक वृद्धि का आंकड़ा केवल एक सांख्यिकीय संख्या नहीं है। इसका असर निवेश, नीतियों, ब्याज दरों और देश की वैश्विक आर्थिक स्थिति के आकलन पर भी पड़ता है।
एक तरफ 7.8 फीसदी की पहली तिमाही की ग्रोथ भारत की मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत देती है। दूसरी तरफ आलोचक GDP की गणना में हुए बदलाव और जमीनी स्तर के दूसरे आर्थिक संकेतकों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
ऐसे में आने वाली तिमाहियों के GDP आंकड़े यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि पहली तिमाही की तेज वृद्धि कितनी टिकाऊ साबित होती है।
निष्कर्ष: संजीव सान्याल ने 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ को ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ बताने वाली आलोचना को खारिज किया है। उनका कहना है कि GDP मेथडोलॉजी में बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हुआ है और अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत GDP के अलावा ऑटो बिक्री और कॉर्पोरेट मुनाफे जैसे अन्य आंकड़ों में भी दिखाई देते हैं। हालांकि, GDP की वास्तविक दिशा का आकलन आने वाली तिमाहियों के आंकड़ों से और स्पष्ट होगा।


