US Green Card Waiting Time for Indians: अमेरिका में नौकरी करने और वहीं स्थायी रूप से बसने का सपना देखने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। NFAP के अनुमान के मुताबिक, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए भारतीय आवेदकों का बैकलॉग इतना बढ़ गया है कि कुछ कैटेगरी में जनवरी 2026 या उसके बाद आवेदन करने वालों को ग्रीन कार्ड के लिए 179 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स लंबे समय से रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की कतार में हैं। अब सामने आए नए आकलन से पता चलता है कि इस इंतजार की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के अनुमान के अनुसार, दिसंबर 2025 तक अमेरिका के रोजगार आधारित इमिग्रेशन सिस्टम में लंबित मामलों की संख्या करीब 12 लाख तक पहुंच चुकी थी।
इनमें भारतीय आवेदकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल बैकलॉग में करीब 79 फीसदी आवेदक भारत से संबंधित हैं। ऐसे में भारतीयों के लिए अमेरिका का स्थायी निवास हासिल करना पहले के मुकाबले और मुश्किल होता नजर आ रहा है।
12 लाख के बैकलॉग में करीब 10 लाख भारतीय

NFAP के आकलन के अनुसार, दिसंबर 2025 तक रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए करीब 12 लाख लोग कतार में थे। इनमें लगभग 10 लाख लोग भारत से जुड़े आवेदक और उनके आश्रित हैं।
इसका मतलब है कि अमेरिका के रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 79 फीसदी है। खास तौर पर हाई-स्किल प्रोफेशनल्स के बीच यह समस्या अधिक दिखाई देती है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी EB-2 और EB-3 जैसी रोजगार आधारित कैटेगरी में आवेदन करते हैं।
कुछ भारतीयों के लिए 179 साल तक का इंतजार क्यों?
179 साल का अनुमान सुनकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ग्रीन कार्ड हासिल करने में इतना लंबा समय क्यों लग सकता है। इसके पीछे अमेरिका के मौजूदा इमिग्रेशन सिस्टम में मौजूद सालाना सीमा और प्रति-देश कोटा अहम भूमिका निभाते हैं।
हर साल सिर्फ 1.40 लाख रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड
अमेरिकी कानून के तहत रोजगार आधारित इमिग्रेशन के लिए हर साल लगभग 1,40,000 ग्रीन कार्ड उपलब्ध होते हैं। यह सीमा लंबे समय से लागू है और इसमें मुख्य आवेदकों के साथ उनके योग्य परिवार के सदस्यों को भी शामिल किया जाता है।
जब आवेदकों की संख्या उपलब्ध ग्रीन कार्ड से कहीं ज्यादा हो जाती है, तो बड़ी संख्या में लोगों को कई वर्षों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
किसी एक देश के लिए 7 फीसदी की सीमा
इसके अलावा अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में सामान्य तौर पर किसी एक देश के नागरिकों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का 7 फीसदी से अधिक हिस्सा मिलने पर सीमा लागू होती है।
भारत जैसे देश के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय हाई-स्किल प्रोफेशनल्स काम करते हैं। यानी योग्य भारतीय आवेदकों की संख्या अधिक होने के बावजूद हर साल उपलब्ध ग्रीन कार्ड की संख्या सीमित रहती है।
EB-2 कैटेगरी में सबसे ज्यादा दबाव
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए EB-2 कैटेगरी महत्वपूर्ण है। इसमें आम तौर पर उच्च शिक्षा या विशेष योग्यता वाले प्रोफेशनल्स शामिल होते हैं।
NFAP के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक अकेले EB-2 कैटेगरी में करीब 7,31,566 भारतीय ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे थे।
यही बड़ा बैकलॉग भविष्य में नए आवेदकों के इंतजार को और लंबा कर सकता है।
पिछले वर्षों में कैसे बढ़ता गया भारतीयों का बैकलॉग?
NFAP के आंकड़ों से पता चलता है कि EB-2 कैटेगरी में भारतीय आवेदकों की संख्या और उपलब्ध ग्रीन कार्ड के बीच बड़ा अंतर लगातार बना रहा है।
वित्त वर्ष 2016
वित्त वर्ष 2016 में EB-2 कैटेगरी के तहत करीब 98,594 भारतीय कर्मचारियों और उनके आश्रितों के आवेदन मंजूर हुए। लेकिन इनमें से केवल 4,407 लोगों को ग्रीन कार्ड मिल सका।
इस तरह 94 हजार से ज्यादा लोग तत्काल ग्रीन कार्ड पाने के बजाय लंबी कतार में बने रहे।
वित्त वर्ष 2017
2017 में करीब 84,928 भारतीयों के आवेदन स्वीकृत हुए, जबकि सिर्फ 3,328 लोगों को ग्रीन कार्ड मिल पाया। यानी बड़ी संख्या में आवेदक फिर से बैकलॉग का हिस्सा बन गए।
वित्त वर्ष 2018
2018 में करीब 80,999 भारतीय आवेदकों को मंजूरी मिली। हालांकि, ग्रीन कार्ड सिर्फ 4,527 लोगों को मिला। करीब 76 हजार से ज्यादा लोग कतार में बने रहे।
इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नए आवेदकों के जुड़ने की रफ्तार और उपलब्ध ग्रीन कार्ड की संख्या में कितना बड़ा अंतर है।
क्या हर भारतीय को 179 साल इंतजार करना होगा?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 179 साल का आंकड़ा हर भारतीय ग्रीन कार्ड आवेदक के लिए तय इंतजार का मतलब नहीं है।
यह NFAP के मौजूदा बैकलॉग, उपलब्ध वार्षिक ग्रीन कार्ड और भविष्य की संभावित परिस्थितियों के आधार पर लगाया गया एक अनुमान है। वास्तविक इंतजार कई बातों पर निर्भर कर सकता है, जैसे आवेदक की रोजगार आधारित कैटेगरी, प्राथमिकता तिथि, वीजा उपलब्धता और अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों में होने वाले बदलाव।
अगर अमेरिकी सरकार भविष्य में कोटा बढ़ाती है, प्रति-देश सीमा में बदलाव करती है या कांग्रेस इमिग्रेशन कानून में सुधार करती है, तो यह अनुमान काफी बदल सकता है।
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और अन्य हाई-स्किल क्षेत्रों में काम करते हैं। इनमें से कई लोग H-1B जैसे वर्क वीजा के जरिए अमेरिका में रहते हैं और लंबे समय में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करना चाहते हैं।
लेकिन ग्रीन कार्ड बैकलॉग लंबा होने से उन्हें वर्क वीजा को लगातार बनाए रखने, नौकरी बदलने और भविष्य की प्लानिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय आवेदकों की बड़ी संख्या और मौजूदा कोटा व्यवस्था के बीच असंतुलन इस समस्या की सबसे बड़ी वजहों में से एक है।
क्या बदल सकता है यह लंबा इंतजार?
ग्रीन कार्ड बैकलॉग को कम करने के लिए अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव की जरूरत होगी। संभावित उपायों में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की वार्षिक सीमा बढ़ाना, प्रति-देश सीमा में बदलाव करना या अप्रयुक्त ग्रीन कार्ड वीजा को भविष्य के वर्षों में इस्तेमाल करने की अनुमति देना शामिल हो सकता है।
हालांकि, इनमें से किसी भी बड़े बदलाव के लिए अमेरिकी कानून और नीतियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन की जरूरत पड़ सकती है।
निष्कर्ष: भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका का रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड सिस्टम पहले से ही लंबी कतार वाला है। NFAP का 179 साल वाला अनुमान इस बात को उजागर करता है कि मौजूदा बैकलॉग और कोटा व्यवस्था के बीच समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है। हालांकि, यह एक अनुमान है और भविष्य में अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों में बदलाव होने पर वास्तविक इंतजार काफी अलग हो सकता है।


