Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर को शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स एक समय 800 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी फिसलकर 23,800 के स्तर के नीचे पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव ऑटो और आईटी शेयरों पर देखने को मिला। हालांकि, निचले स्तरों से बाजार में कुछ रिकवरी जरूर आई, लेकिन दोनों प्रमुख इंडेक्स गहरे लाल निशान में बंद हुए।
बाजार में इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ऑटो-आईटी शेयरों में बिकवाली को प्रमुख वजह माना जा रहा है। इन घटनाक्रमों ने निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ा दी और बाजार पर दबाव बना रहा।
इंट्रा-डे में 800 अंक से ज्यादा टूटा Sensex
2 सितंबर के कारोबार में सेंसेक्स में दिन के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स इंट्रा-डे में 808.56 अंक गिरकर 76,135.72 के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में निचले स्तरों से कुछ सुधार हुआ, लेकिन यह 373.93 अंक यानी 0.49% की गिरावट के साथ 76,570.35 पर बंद हुआ।
इसी तरह निफ्टी 50 भी कारोबार के दौरान 269 अंक टूटकर 23,786.80 तक फिसल गया। बाद में रिकवरी के बावजूद निफ्टी 141.35 अंक यानी 0.59% गिरकर 23,914.45 के स्तर पर बंद हुआ।
ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.53% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 0.37% की गिरावट के साथ बंद हुए।
Stock Market Crash: बाजार में क्यों मचा कोहराम?
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा। पश्चिमी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों के बीच ग्लोबल सप्लाई चेन और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाने लगते हैं। इसका असर इक्विटी मार्केट पर भी पड़ा और घरेलू बाजार में बिकवाली तेज हो गई।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
यही वजह है कि तेल की कीमतों में उछाल को भारतीय शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना गया और खासकर उन सेक्टरों पर दबाव बढ़ा, जो ईंधन कीमतों से ज्यादा प्रभावित होते हैं।
3. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की चिंता बढ़ी। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर करीब 4.80% के आसपास पहुंच गई।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए डॉलर आधारित सुरक्षित निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकता है। इसका असर उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना को लेकर भी बाजार में आशंकाएं बनी हुई हैं। ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की उम्मीद ने इक्विटी सेंटीमेंट को कमजोर किया।
4. ऑटो और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
बुधवार की गिरावट में ऑटो और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। निफ्टी ऑटो इंडेक्स डेढ़ फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ, जबकि निफ्टी आईटी में भी 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
ऑटो शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। वहीं आईटी शेयरों में गिरावट ने भी प्रमुख इंडेक्स पर दबाव डाला।
दूसरी ओर, सरकारी बैंकों के शेयरों में निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली, लेकिन निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स की बढ़त सीमित रही। प्राइवेट बैंकिंग शेयर भी दबाव में रहे और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
₹3 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप
बाजार में आई तेज बिकवाली का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बुधवार के कारोबार में BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया।
इससे साफ है कि गिरावट सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी इसका असर देखने को मिला।
आगे बाजार के लिए क्या अहम रहेगा?
अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख पर रहेगी। अगर पश्चिमी एशिया में तनाव और बढ़ता है तथा क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
इसके अलावा, ऑटो और आईटी जैसे प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का रुख भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों को ग्लोबल संकेतों के साथ-साथ घरेलू ट्रिगर्स पर भी नजर रखनी होगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश विकल्प में पैसा लगाने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखते हुए योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in की ओर से किसी भी निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं दी जाती है।


