Nepal Floods: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड से मची भारी तबाही के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह बुधवार, 2 सितंबर को संसद पहुंचे। संसद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने संकट की घड़ी में मदद पहुंचाने के लिए भारत और चीन का आभार जताया। शाह ने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों ने आपदा के बाद राहत और बचाव कार्यों में तेजी दिखाते हुए नेपाल की मदद की।
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट समेत कई इलाकों में 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के साथ कई बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और प्रभावित इलाकों में राहत एवं खोज-बचाव अभियान जारी है।
संसद में PM बालेन शाह ने बताया कैसे शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
Nepal PM Balen Shah, in the Parliament, thanks India & China for rushing aid after the massive flooding pic.twitter.com/CyAhjoAUQy
— Sidhant Sibal (@sidhant) September 2, 2026 नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही सरकार ने राहत और बचाव एजेंसियों को अलर्ट कर दिया था।
उन्होंने बताया कि 26 अगस्त की सुबह करीब 8:30 बजे घटना की जानकारी मिली। इसके बाद सुबह 9:15 बजे बैठक बुलाई गई और हेलीकॉप्टरों को स्टैंडबाय पर रखा गया। करीब 10:30 बजे आपातकालीन बचाव दलों को तैनाती के लिए तैयार कर दिया गया।
शाह ने कहा कि इस पूरे अभियान में लोगों की जान बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता रही।
भारत ने नेपाल को तुरंत भेजी राहत सामग्री
नेपाल में बाढ़ की स्थिति सामने आने के बाद भारत ने तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह से फोन पर बात कर नेपाल को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया था।
इसके बाद भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए नेपाल को राहत सामग्री भेजी गई। इसमें जरूरी दवाइयां, अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, हाइजीन किट और सोलर लैंप समेत कई जरूरी सामान शामिल थे।
भारत ने केवल राहत सामग्री ही नहीं भेजी, बल्कि खोज एवं बचाव अभियान में मदद के लिए विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों को भी तैयार रखा।
भारत ने भेजी राहत सामग्री की पांचवीं खेप
बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए भारत की ओर से बुधवार को राहत सामग्री की पांचवीं खेप भेजी गई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इस खेप में 5.5 टन जरूरी दवाइयां और विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय बचाव दल शामिल है।
भारत अब तक नेपाल को कुल 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचा चुका है।
भारत की ओर से डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल भेजी गई है। राहत दलों के सामने कई इलाकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती है, क्योंकि बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़कें और संपर्क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
चीन ने भी नेपाल को मदद की पेशकश की
संकट के दौरान चीन ने भी नेपाल को सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, चीन ने जरूरत के अनुसार राहत और तकनीकी सहयोग देने की बात कही थी।
नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों का आकलन करते हुए राहत एवं बचाव अभियान को आगे बढ़ाया। इस दौरान भारत और चीन दोनों की ओर से विशेषज्ञता और सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की गई।
खास तौर पर हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना बचाव दलों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नेपाल में बाढ़ से 1,127 लोगों की मौत
नेपाल पुलिस के अनुसार, विनाशकारी बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बुधवार तक बढ़कर 1,127 हो गई। आपदा के करीब एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद हुए हैं।
इसके अलावा गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इनमें से 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं।
हजारों लोग अब भी लापता
नेपाल में राहत अभियान के बीच बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है। पुलिस के अनुसार, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जबकि 4,858 लोगों की तलाश अभी जारी है।
लापता लोगों के परिवारों की मदद के लिए नेपाल पुलिस ने 911 अज्ञात शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, ताकि उनकी पहचान की प्रक्रिया में मदद मिल सके।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में करीब 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। ये जवान खोज और बचाव अभियान के अलावा राहत सामग्री पहुंचाने, शवों के प्रबंधन और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
बारिश ने बढ़ाई बचाव अभियान की मुश्किल
नेपाल में लगातार बारिश के कारण रसुवा और नुवाकोट समेत प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 12 घंटों में सबसे ज्यादा बारिश सिंधुपालचोक के नोस्याम पाटी स्थित मौसम केंद्र में दर्ज की गई, जहां 60.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।
बताया गया है कि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने अथवा हिमस्खलन के बाद अचानक बाढ़ की स्थिति बनी। इसके बाद उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।
ऐसे में नेपाल में राहत अभियान अभी भी जारी है और बचाव एजेंसियां लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।


