PM Modi Swadeshi Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारतीयों से अपील की है कि जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचें, गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालें और शादी जैसे बड़े आयोजनों के लिए भारत में मौजूद जगहों को प्राथमिकता दें। पीएम मोदी ने इन खर्चों को देश की आत्मनिर्भरता, विदेशी मुद्रा और घरेलू अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए ‘वेड इन इंडिया’ और स्वदेशी को बढ़ावा देने का संदेश दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से ऐसे खर्चों को कम करने की अपील की है, जिनसे भारतीय पैसा विदेश चला जाता है। पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि अगर सोना खरीदना जरूरी नहीं है तो उसे टाला जा सकता है। इसी तरह गैर-जरूरी विदेश यात्राओं के बजाय भारत में घूमने और विदेश में शादी करने के बजाय देश में ही वेडिंग डेस्टिनेशन चुनने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को बिश्केक से जारी एक वीडियो संदेश में यह अपील की। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही है। मजबूत आर्थिक विकास के बावजूद प्रधानमंत्री ने वैश्विक अस्थिरता, युद्ध और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लोगों के व्यक्तिगत खर्च को देश की आर्थिक मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि गैर-जरूरी खर्चों को भारत के भीतर रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ मौज-मस्ती के लिए विदेश जा रहा है तो ऐसी यात्रा को टाला जा सकता है। इसी तरह विदेश में शादी करने के बजाय भारत में मौजूद खूबसूरत वेडिंग डेस्टिनेशन को चुना जा सकता है। उन्होंने जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की भी अपील की।
पीएम मोदी का संदेश मूल रूप से यही है कि भारतीयों की छोटी-बड़ी आर्थिक पसंद अगर घरेलू अर्थव्यवस्था के पक्ष में हों, तो इसका सामूहिक फायदा देश को मिल सकता है।
सोना खरीदने से क्यों रोक रहे हैं PM मोदी?
भारत में सोने की मांग लंबे समय से काफी ज्यादा रही है। शादी, त्योहार, पारंपरिक रीति-रिवाज और घरेलू बचत के लिए बड़ी संख्या में लोग सोना खरीदते हैं। लेकिन भारत अपनी घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।
यही वजह है कि सोने की मांग बढ़ने पर देश का आयात बिल भी बढ़ सकता है। इसके लिए विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल करना पड़ता है। जब कच्चे तेल जैसे जरूरी आयात पर भी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च हो रही हो, तब सोने का बढ़ता आयात बाहरी भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ा सकता है।
यानी पीएम मोदी का तर्क यह है कि जरूरत के बजाय केवल मांग या शौक के कारण सोने की खरीदारी बढ़ने से देश का पैसा बाहर जाता है।
इस साल सोने के आयात में भी तेजी
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद शुरुआती महीनों में भारत के सोने के आयात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले तेज बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, जुलाई में भारत का व्यापार घाटा भी करीब 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी इस समस्या को और बढ़ा सकती है। जब वैश्विक बाजार में सोना महंगा होता है, तो भारत को समान मात्रा में सोना खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। इसलिए घरेलू मांग में छोटा बदलाव भी देश के कुल आयात बिल पर बड़ा असर डाल सकता है।
विदेश यात्रा पर PM मोदी का फोकस क्यों?
प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ सोने तक सीमित नहीं है। उन्होंने गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को भी कम करने की बात कही है।
जब कोई भारतीय विदेश यात्रा करता है तो होटल, स्थानीय परिवहन, रेस्टोरेंट, मनोरंजन और दूसरी सेवाओं पर खर्च की गई रकम का बड़ा हिस्सा विदेशी अर्थव्यवस्थाओं में जाता है। विदेश में होने वाली शादियों में यह खर्च और बढ़ सकता है, क्योंकि वेन्यू, होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट और दूसरे इंतजामों पर बड़ी रकम खर्च होती है।
इसके उलट अगर यही खर्च भारत में किया जाता है, तो इसका लाभ देश के होटल, टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट, इवेंट मैनेजमेंट, कैटरिंग और दूसरे स्थानीय कारोबारों को मिल सकता है।
‘वेड इन इंडिया’ पर फिर जोर
पीएम मोदी लंबे समय से देश में ही शादी करने को प्रोत्साहित करते रहे हैं। उनका ‘वेड इन इंडिया’ अभियान इसी सोच पर आधारित है।
भारत में राजस्थान, गोवा, केरल, उत्तराखंड और कई अन्य राज्यों में बड़े स्तर पर डेस्टिनेशन वेडिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर भारतीय परिवार विदेश के बजाय देश में शादी आयोजित करते हैं, तो इससे घरेलू पर्यटन और इससे जुड़े कारोबारों को फायदा मिल सकता है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने लोगों से भारत में शादी के विकल्पों पर विचार करने की अपील की है।
GDP 7.8% बढ़ी, फिर भी सावधानी क्यों?
अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की 7.8 फीसदी वृद्धि निश्चित रूप से मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का संकेत है। लेकिन GDP की तेज ग्रोथ का मतलब यह नहीं है कि अर्थव्यवस्था बाहरी जोखिमों से पूरी तरह सुरक्षित हो गई है।
भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी ऊर्जा और कई अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं के आयात पर निर्भर है। खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भारत के आयात बिल को प्रभावित कर सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अगर तेल महंगा होता है, तो भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है।
ऐसे माहौल में गैर-जरूरी आयात और विदेश में होने वाले discretionary spending को सीमित रखने का तर्क सरकार की बाहरी आर्थिक स्थिति को मजबूत रखने से जुड़ा है।
पीएम मोदी की अपील नई नहीं है
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री ने इस तरह की अपील की है। इससे पहले भी वह भारतीयों से घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने, विदेश में होने वाले गैर-जरूरी खर्च को कम करने और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की बात कह चुके हैं।
मई में भी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता के बीच प्रधानमंत्री ने लोगों से सोने की खरीद और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को सीमित करने की अपील की थी। उन्होंने ईंधन की खपत घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया था।
महंगा सोना बना चुनौती
प्रधानमंत्री की सोना कम खरीदने की अपील ऐसे समय में आई है जब सोना निवेशकों और आम खरीदारों दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोने को अक्सर सुरक्षित निवेश माना जाता है। युद्ध, महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच इसकी मांग बढ़ सकती है। इसी वजह से सोने की कीमतों में तेजी रहने पर लोगों के लिए खरीदारी रोकना आसान नहीं होता।
एक तरफ महंगाई और अनिश्चितता के कारण लोग सोने को सुरक्षित संपत्ति मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के लिए बढ़ता सोना आयात विदेशी मुद्रा और व्यापार घाटे के लिहाज से चिंता का विषय बन सकता है।
‘स्वदेशी’ के जरिए घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
पीएम मोदी की ताजा अपील उनकी व्यापक ‘स्वदेशी’ और आत्मनिर्भरता की नीति का हिस्सा है। इसका मूल विचार यह है कि भारतीय उपभोक्ताओं का खर्च ज्यादा से ज्यादा घरेलू उत्पादों, सेवाओं, पर्यटन और कारोबारों पर हो।
अगर लोग भारत में घूमते हैं, देश में शादी करते हैं और गैर-जरूरी आयातित वस्तुओं की जगह घरेलू विकल्प चुनते हैं, तो खर्च का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों और स्थानीय कारोबारों के पास रह सकता है।
प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में कहा कि जितना ज्यादा भारत स्वदेशी पर जोर देगा, उतना ही आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
GDP ग्रोथ के बीच PM मोदी का संदेश क्या है?
सरल शब्दों में देखें तो प्रधानमंत्री का संदेश यह नहीं है कि भारतीय सोना बिल्कुल न खरीदें या कभी विदेश न जाएं। जोर गैर-जरूरी खर्च को लेकर है।
सरकार चाहती है कि जरूरी आयात और विदेशी खर्च के बीच गैर-जरूरी हिस्से को सीमित किया जाए और जहां संभव हो, वही खर्च भारत के भीतर किया जाए।
7.8 फीसदी GDP ग्रोथ भारत की मजबूत आर्थिक क्षमता को दिखाती है, लेकिन वैश्विक युद्ध, तेल की कीमतों, सप्लाई चेन और विदेशी मुद्रा से जुड़े जोखिम अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में सरकार घरेलू मांग, पर्यटन और कारोबार को मजबूत करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता घटाने का संदेश दे रही है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर ‘स्वदेशी’, ‘वेड इन इंडिया’ और जरूरत के मुताबिक खर्च करने का मंत्र दोहराया है।


