Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। दिल्ली सर्राफा बाजार में मंगलवार, 1 सितंबर को सोना लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में सस्ता हुआ। सोने की कीमत में एक दिन में ₹2,700 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह ₹1,58,200 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह करीब दो सप्ताह में सोने का सबसे निचला स्तर है।
चांदी की कीमतों में भी मंगलवार को तेज गिरावट देखने को मिली। दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी ₹5,000 प्रति किलोग्राम टूटकर ₹2,40,500 प्रति किलोग्राम पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी पर दबाव देखने को मिला।
पांच सत्र में ₹8,900 सस्ता हुआ सोना
दिल्ली सर्राफा बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत करीब 5.3 फीसदी यानी ₹8,900 प्रति 10 ग्राम तक गिर चुकी है।
गौर करने वाली बात यह है कि 25 अगस्त को दिल्ली में सोना ₹1,67,100 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया था। यह पिछले करीब तीन महीनों का सबसे ऊंचा भाव था। हालांकि, इस स्तर पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है।
यानी महज कुछ कारोबारी सत्रों में सोने के भाव में बड़ी गिरावट आ चुकी है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि मौजूदा स्तर पर खरीदारी लौटती है या नहीं।
दिल्ली में एक दिन में ₹5,000 टूटी चांदी
सोने के साथ-साथ चांदी में भी मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी का भाव ₹5,000 गिरकर ₹2,40,500 प्रति किलोग्राम रह गया।
चांदी की कीमतों पर घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट की चाल का भी असर पड़ता है। इंडस्ट्रियल डिमांड, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां चांदी के भाव को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का बुलियन पर असर
कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। 1 सितंबर को ब्रेंट क्रूड का भाव 92 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो इसका असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है।
महंगाई का दबाव बढ़ने की स्थिति में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें भी बदल सकती हैं। ब्याज दरों और डॉलर में होने वाला बदलाव सोने की कीमतों पर सीधा असर डालता है।
क्रूड महंगा होने से बढ़ सकती है महंगाई
आनंदराठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज एंड करेंसीज) वेदिका नार्वेकर के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत में सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
उनके मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आ रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है। इसका असर आगे चलकर मौद्रिक नीति और ब्याज दरों की दिशा पर भी पड़ सकता है।
पीएम मोदी ने सोना खरीदने को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है। उन्होंने लोगों से आवश्यकता नहीं होने पर विदेश यात्रा से बचने की बात भी कही है।
भारत सोने का बड़ा आयातक है। घरेलू स्तर पर सोने की मांग बढ़ने पर देश का गोल्ड इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। इसका असर भारत के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, सोने की कीमत तय करने में केवल घरेलू मांग ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी कमजोर
वैश्विक बाजार में भी 1 सितंबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
- Spot Gold: 2.42% गिरकर करीब $4,334 प्रति औंस
- Spot Silver: 3.02% गिरकर करीब $64.52 प्रति औंस
इस गिरावट से संकेत मिलता है कि दबाव केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में भी कमजोरी देखने को मिल रही है।
आगे सोने-चांदी का क्या होगा?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल पर कई वैश्विक कारकों का असर रहेगा। इनमें अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, डॉलर इंडेक्स, क्रूड ऑयल की कीमतें, महंगाई के आंकड़े और भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख हैं।
अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है, तो ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आ सकता है। दूसरी तरफ, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग को सहारा मिल सकता है।
इसलिए फिलहाल निवेशकों के लिए सोने और चांदी में तेज उतार-चढ़ाव के दौर में सावधानी बरतना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट टर्म में बुलियन पर दबाव बना रह सकता है, हालांकि आगे की दिशा वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
डिस्क्लेमर: सोने और चांदी की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


