Ayodhya Ram Temple CEO Update: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन को और व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बुधवार को मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम पर फैसला कर सकता है। इस पद के लिए देशभर से करीब 5,500 आवेदन मिले थे, जिनकी कई चरणों में स्क्रीनिंग के बाद अब तीन उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया है।
मंदिर के पहले CEO की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राम मंदिर का संचालन लगातार बड़े पैमाने पर हो रहा है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और दान, सुरक्षा, सुविधाओं, कर्मचारियों तथा अन्य प्रशासनिक गतिविधियों का प्रबंधन करना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
बुधवार को हो सकता है अंतिम फैसला
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर के नए CEO का चयन बुधवार को मणिरामदास छावनी स्थित ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास पर होने वाली बैठक में किया जा सकता है। ट्रस्ट की बैठक दोपहर करीब 2 बजे प्रस्तावित है।
तीन सदस्यीय चयन समिति अयोध्या पहुंच चुकी है और उसने CEO पद के लिए उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी कर ली है। समिति की ओर से तैयार किए गए तीन नामों के पैनल पर अब ट्रस्ट अंतिम निर्णय लेगा।
5,500 आवेदनों से तीन नामों तक पहुंची प्रक्रिया
राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि के मुताबिक, CEO पद के लिए देशभर से लगभग 5,500 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें IAS और IPS अधिकारियों के अलावा वरिष्ठ सैन्य अधिकारी तथा NGO और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले अनुभवी प्रोफेशनल भी शामिल थे।
उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग कई चरणों में की गई। पहले चरण में करीब 3,500 आवेदन छांटे गए। इसके बाद संख्या घटाकर करीब 1,500 और फिर 300 उम्मीदवारों तक लाई गई।
इसके बाद चयन प्रक्रिया को और आगे बढ़ाते हुए 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया। इन साक्षात्कारों और मूल्यांकन के बाद चयन समिति ने अंतिम रूप से तीन उम्मीदवारों के नाम का पैनल तैयार किया है।
कौन-कौन हैं चयन समिति में?
CEO की नियुक्ति के लिए गठित तीन सदस्यीय चयन समिति में अनुभवी प्रशासनिक और सैन्य पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल हैं। समिति में:
- रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली
- रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी
- उद्योगपति सुरेश हावरे
शामिल हैं।
गोविंद देव गिरि ने बताया कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए ट्रस्ट एक योग्य और अनुभवी CEO की तलाश कर रहा था। चयन समिति ने उम्मीदवारों के इंटरव्यू और स्क्रीनिंग के लिए लंबी प्रक्रिया अपनाई।
रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट का नाम सबसे आगे?
CEO पद के लिए तैयार किए गए तीन नामों में से एक रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट को सबसे मजबूत दावेदार बताया जा रहा है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी अंतिम उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम फैसला ट्रस्ट के बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा।
इस पद पर नियुक्त होने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन और संचालन को व्यवस्थित करना होगी। इसमें विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं, कर्मचारियों का प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल हो सकते हैं।
दान प्रबंधन पर उठे सवालों के बाद CEO की जरूरत महसूस हुई
राम मंदिर में CEO की नियुक्ति का फैसला ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर के दान और वित्तीय प्रबंधन को लेकर पहले सवाल उठ चुके हैं। दान की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों ने ट्रस्ट के सामने मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत को उजागर किया।
इसी पृष्ठभूमि में 6 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के दैनिक संचालन और प्रशासनिक गतिविधियों की निगरानी के लिए एक पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने का निर्णय लिया था।
ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर जैसे बड़े धार्मिक संस्थान के संचालन में पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना बताया गया है।
सचिव समेत अन्य पदों पर भी हो सकता है ऐलान
बुधवार की बैठक केवल CEO की नियुक्ति तक सीमित नहीं रह सकती। ट्रस्ट की बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियों या नामों की घोषणा संभव है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महासचिव/सचिव पद को लेकर भी आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है। जगदीश आफले को मंदिर ट्रस्ट का पहला सचिव बनाए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, CEO के नाम को लेकर अंतिम निर्णय ट्रस्टी बोर्ड ही करेगा। गोविंद देव गिरि ने भी कहा है कि नियुक्ति की घोषणा कब करनी है, इसका फैसला ट्रस्ट पर निर्भर करेगा। उन्हें उम्मीद है कि बुधवार की बैठक में CEO के नाम की घोषणा हो सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है राम मंदिर का पहला CEO?
राम मंदिर का निर्माण और संचालन सामान्य मंदिरों की तुलना में कहीं बड़े स्तर पर हो रहा है। यहां लगातार देश-विदेश से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में मंदिर प्रशासन को संभालने के लिए एक अनुभवी पूर्णकालिक अधिकारी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
पहले CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में जिम्मेदारियां अधिक स्पष्ट हो सकती हैं और रोजमर्रा के संचालन में निर्णय लेने की प्रक्रिया भी व्यवस्थित हो सकती है। अब सबकी नजर बुधवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर है, जहां 5,500 आवेदनों से शुरू हुई चयन प्रक्रिया का अंतिम नतीजा सामने आ सकता है।


