Gold-Silver Price Outlook: अगस्त में 9.7% का शानदार रिटर्न देने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है। अमेरिका-ईरान तनाव से जहां सेफ हेवन डिमांड को सहारा मिल रहा है, वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती उम्मीदें कीमती धातुओं पर दबाव डाल रही हैं। ऐसे में इस हफ्ते अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट समेत कई अहम फैक्टर सोने-चांदी की दिशा तय कर सकते हैं।
Gold-Silver Price Outlook: अगर आप इस हफ्ते सोने या चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो बाजार की मौजूदा स्थिति और कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख फैक्टर्स को समझना बेहद जरूरी है। मंगलवार, 1 सितंबर को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर रहने के बावजूद सोने और चांदी में हल्की तेजी देखने को मिली।
हमारी सहयोगी CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉमेक्स पर सोना 0.27% की बढ़त के साथ 4,493.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी 0.63% की तेजी के साथ 66.64 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
इससे पहले सोमवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार में बदलती उम्मीदों के बीच सोने पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला था। सोमवार को स्पॉट गोल्ड 0.4% गिरकर 4,433.19 डॉलर प्रति औंस और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1.1% की गिरावट के साथ 4,481.50 डॉलर पर आ गया था।
सोने और चांदी पर क्यों बन रहा है दबाव?
फिलहाल सोने की कीमतों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर करीब 4.78% पर पहुंच गई है, जो करीब 20 महीनों का ऊंचा स्तर है।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर सोना रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है, क्योंकि सोना निवेशकों को ब्याज आय नहीं देता। ऐसे में जब बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक होते हैं तो कुछ निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर इन विकल्पों का रुख कर सकते हैं।
इसके अलावा फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर भी बाजार की नजर बनी हुई है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की हालिया टिप्पणियों के बाद सितंबर में ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आया है। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इससे सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है।
कच्चे तेल में उछाल ने बढ़ाई बाजार की चिंता
कीमती धातुओं की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें भी अहम भूमिका निभाती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े तनाव और सैन्य कार्रवाई के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड 2.71% की बढ़त के साथ 90.49 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है। इससे दुनिया के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रुख अपना सकते हैं। इसका असर सोने पर पड़ सकता है।
हालांकि, यहां एक दिलचस्प स्थिति बन रही है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की खरीदारी करते हैं, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिलता है। लेकिन दूसरी तरफ महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की आशंका बॉन्ड यील्ड को बढ़ाती है, जिससे सोने पर दबाव बनता है।
फिर भी सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट क्यों नहीं?
तमाम चुनौतियों के बावजूद सोने को सुरक्षित निवेश की मांग से मजबूत सहारा मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे माहौल में निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने और जोखिम कम करने के लिए सोने का रुख कर सकते हैं।
अगस्त सोने के लिए बेहद मजबूत महीना रहा। महीने के दौरान स्पॉट गोल्ड में करीब 9.7% की तेजी दर्ज की गई। यह जनवरी के बाद सोने का सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन रहा।
इसी वजह से हालिया गिरावट को फिलहाल किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल के बजाय तेज तेजी के बाद आया करेक्शन भी माना जा रहा है। हालांकि, आगे की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेड की ब्याज दर नीति पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
इस हफ्ते किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर?
इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों के लिए मुख्य रूप से तीन फैक्टर महत्वपूर्ण रहेंगे:
1. अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद
फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति सोने की कीमतों के लिए सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर्स में से एक है। अगर बाजार में दरें लंबे समय तक ऊंची रहने या दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद मजबूत होती है तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके विपरीत, अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है तो सोने और चांदी को फायदा मिल सकता है।
2. कच्चे तेल की कीमत
ब्रेंट क्रूड में तेजी महंगाई की चिंता बढ़ा सकती है। अगर तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं तो केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद प्रभावित हो सकती है।
3. अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट
इस सप्ताह के अंत में जारी होने वाली अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट बाजार के लिए बेहद अहम होगी। अगर अमेरिकी लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से मजबूत आते हैं तो ब्याज दरों को ऊंचा रखने का पक्ष मजबूत हो सकता है। इससे सोने पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी।
वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े कमजोर आते हैं तो फेड द्वारा दरों में कटौती की उम्मीद फिर से मजबूत हो सकती है। ऐसी स्थिति में सोने और चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए रुपये की चाल भी अहम
भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर नहीं करती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती है।
अगर रुपया कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत स्थिर रहने के बावजूद भारत में सोना महंगा हो सकता है। वहीं रुपये में मजबूती आने पर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है।
इसलिए भारतीय निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस के साथ-साथ डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट पर भी नजर रखनी चाहिए।
एक्सपर्ट की क्या है सलाह?
रिद्धिसिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक बाजार में आगे भी अस्थिरता बनी रह सकती है। अमेरिकी पेरोल रिपोर्ट से पहले बाजार कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों के दौर में प्रवेश कर रहा है।
ऐसे माहौल में उन्होंने निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और ‘Buy on Dips’ यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति पर विचार करने की सलाह दी है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर गिरावट पर बिना किसी विश्लेषण के खरीदारी की जाए। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और पोर्टफोलियो में सोने-चांदी के उचित हिस्से को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है निष्कर्ष?
फिलहाल सोने और चांदी के बाजार में तेजी और दबाव, दोनों के कारण मौजूद हैं। भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग कीमतों को सहारा दे सकती है, जबकि ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों की उम्मीद और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।
ऐसे में इस सप्ताह अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट, फेड की ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें, कच्चे तेल की कीमत और रुपये की चाल पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
अगस्त में मजबूत तेजी के बाद अगर सोने-चांदी में गिरावट आती है तो इसे सीधे बड़े डाउनट्रेंड का संकेत मानना उचित नहीं होगा। बाजार की आगे की दिशा तय करने के लिए आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रम को देखना जरूरी होगा।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। कमोडिटी और अन्य बाजार निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता का आकलन करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की गारंटी या व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं देता है।


