नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सोमवार शाम तक 955 लोगों की मौत और 4,471 लोगों के लापता होने की खबर है। नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों की है। सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए सेना और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।
नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई इलाकों में पानी, मलबे और भूस्खलन के कारण हालात बेहद खराब बने हुए हैं। सोमवार शाम तक 955 लोगों की मौत और 4,471 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई। नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े कर्मचारियों और अन्य लोगों की बताई जा रही है।
कई लोगों के सुरंगों और भारी मलबे के बीच फंसे होने की आशंका है। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नेपाल सेना समेत कई बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। हालांकि, बाढ़ में सड़कें और पुल बह जाने के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना बचाव टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में ड्रोन, थर्मल कैमरे और अन्य आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बचाव दल सुरंगों के भीतर जाकर भी संभावित स्थानों की जांच कर रहे हैं। वहीं, विदेशों में रहने वाले नेपाली नागरिक और मैपिंग वॉलंटियर्स भी प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाने और राहत अभियान को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं।
250 मीटर गहरी सुरंग में पहुंची रेस्क्यू टीम
नेपाल आर्मी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बसनेट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में दाखिल हुई। यहां करीब 14 लोगों के फंसे होने की आशंका थी।
टीम सर्चलाइट और ड्रोन जैसे उपकरणों के साथ सुरंग के अंदर पहुंची। बचाव दल करीब 250 मीटर गहरी सुरंग के आखिरी हिस्से तक गया और काफी देर तक संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश की। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद किसी व्यक्ति का सुराग नहीं मिल सका। इसके बाद टीम को वापस लौटना पड़ा।
चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 100 मीटर बाद रास्ता बंद
चिलिमे हाइड्रोपावर प्लांट में भी रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद मुश्किल बना हुआ है। विदेशी विशेषज्ञों के साथ संयुक्त बचाव टीम सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक पहुंची, लेकिन इसके बाद रास्ता कीचड़ और गाद से पूरी तरह बंद मिला।
भारी मलबे के कारण सुरंग के अंदर आगे बढ़ना संभव नहीं हो सका। बचाव दल को आशंका है कि अंदर तक पहुंचने के लिए मलबा हटाने का लंबा अभियान चलाना पड़ सकता है।
त्रिशूली-3A में रास्ता बनाने के लिए नियंत्रित विस्फोट
त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में भी बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। सुरंग तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू टीम को नियंत्रित विस्फोट का सहारा लेना पड़ा, ताकि एक नया प्रवेश मार्ग तैयार किया जा सके।
भारी मलबे, टूटी सड़कों और खराब मौसम के बीच बचाव दल के लिए प्रत्येक कदम जोखिम भरा बना हुआ है। इसके बावजूद सुरंगों के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश लगातार जारी है।
सड़कें और पुल टूटे तो ड्रोन बने रेस्क्यू का सहारा
बाढ़ के पानी ने कई इलाकों में सड़कें और पुल बहा दिए हैं। इसके चलते बचाव दलों के लिए जमीन के रास्ते प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
ऐसे में ड्रोन तकनीक रेस्क्यू अभियान में अहम भूमिका निभा रही है। ड्रोन के जरिए मलबे और दुर्गम इलाकों की निगरानी की जा रही है। वहीं, थर्मल कैमरों की मदद से संभावित रूप से फंसे लोगों या शवों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
ड्रोन का इस्तेमाल कुछ दुर्गम इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने में भी किया जा रहा है।
विदेशों में रहने वाले नेपाली और मैपिंग वॉलंटियर्स भी मदद में जुटे
रेस्क्यू अभियान में जमीन पर मौजूद टीमों के अलावा विदेशों में रहने वाले नेपाली नागरिक और दुनियाभर के मैपिंग वॉलंटियर्स भी योगदान दे रहे हैं।
वे सैटेलाइट तस्वीरों और उपलब्ध भौगोलिक जानकारी का विश्लेषण कर बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के नक्शे तैयार करने में मदद कर रहे हैं। इससे बचाव दलों को उन इलाकों की पहचान करने में सहायता मिल रही है, जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है।
हर सुरंग और मलबे में जिंदगी की तलाश
बाढ़ की इस भीषण त्रासदी ने नेपाल के हाइड्रोपावर क्षेत्रों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं सुरंगें मलबे से बंद हैं तो कहीं सड़क और पुल पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। इसके बावजूद सेना और बचाव दल एक-एक सुराग तलाशने में जुटे हैं।
अंधेरी सुरंगों के भीतर सर्च ऑपरेशन से लेकर आसमान में उड़ते ड्रोन तक, हर कोशिश का मकसद एक ही है—मलबे के बीच अगर कोई जिंदगी अब भी फंसी है तो उसे जल्द से जल्द बचाया जा सके।


