India Vs China Economy: भारत और चीन एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, लेकिन हालिया आर्थिक आंकड़े दोनों की अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। दूसरी ओर, चीन में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में मामूली सुधार के बावजूद PMI अभी भी 50 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के आर्थिक प्रदर्शन को लेकर एक बार फिर तुलना तेज हो गई है।
नई दिल्ली: एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं भारत और चीन के हालिया आर्थिक संकेतक अलग-अलग कहानी बयां कर रहे हैं। एक तरफ भारत की GDP ग्रोथ ने बाजार और अर्थशास्त्रियों को उम्मीद से बेहतर आंकड़े देकर चौंकाया है, वहीं चीन की अर्थव्यवस्था को कमजोर घरेलू मांग, प्रॉपर्टी सेक्टर की सुस्ती और धीमी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी की जोरदार GDP ग्रोथ दर्ज की। इसके मुकाबले चीन की अप्रैल-जून तिमाही की आर्थिक वृद्धि दर 4.3 फीसदी रही। चीन के लिए यह तीन साल से ज्यादा समय में दर्ज की गई सबसे धीमी तिमाही वृद्धि दर बताई गई है।
चीन का PMI बढ़ा, लेकिन 50 के नीचे
चीन के आर्थिक हालात को समझने के लिए उसके मैन्युफैक्चरिंग PMI पर नजर डालना अहम है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, आधिकारिक मैन्युफैक्चरिंग PMI जुलाई के 49.2 से बढ़कर अगस्त में 49.8 हो गया।
हालांकि, PMI में सुधार जरूर हुआ, लेकिन यह अभी भी 50 के स्तर से नीचे है। यही वजह है कि आंकड़े पूरी तरह मजबूत आर्थिक विस्तार का संकेत नहीं देते।
PMI में 50 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 50 से ऊपर का आंकड़ा मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में विस्तार, जबकि 50 से नीचे की रीडिंग गतिविधियों में संकुचन का संकेत देती है।
अगस्त में चीन के PMI में सुधार का एक कारण विदेशी बाजारों से मांग में बढ़ोतरी भी माना जा रहा है। कैपिटल इकोनॉमिक्स के चीनी अर्थशास्त्री गुयेन होआंग नम के मुताबिक, मजबूत निर्यात मांग ने मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को कुछ सहारा दिया।
घरेलू मांग अभी भी चीन के लिए बड़ी चुनौती
चीन की फैक्ट्री गतिविधियों में मामूली सुधार ऐसे समय हुआ है जब घरेलू अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। खासकर प्रॉपर्टी सेक्टर में लंबे समय से चली आ रही कमजोरी ने घरेलू मांग पर दबाव डाला है।
चीन की अर्थव्यवस्था लंबे समय से रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती से प्रभावित रही है। प्रॉपर्टी बाजार में कमजोरी का असर कंस्ट्रक्शन, निवेश, उपभोक्ता भरोसे और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है।
यही वजह है कि मजबूत निर्यात के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था के सामने घरेलू मांग को लेकर चिंता बनी हुई है।
चीन की GDP ग्रोथ 4.3 फीसदी रही
अप्रैल-जून तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था सालाना आधार पर 4.3 फीसदी की दर से बढ़ी। यह तीन साल से अधिक समय में दर्ज की गई उसकी सबसे धीमी वृद्धि दर रही।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चीन के लिए केवल निर्यात की मजबूती पर्याप्त होगी या घरेलू खपत और निवेश में भी ठोस सुधार की जरूरत पड़ेगी।
चीन लंबे समय से दुनिया की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट इकोनॉमी रहा है। लेकिन कमजोर घरेलू मांग और प्रॉपर्टी सेक्टर की परेशानियां उसकी आर्थिक रिकवरी की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं।
भारत की GDP ग्रोथ ने चौंकाया
दूसरी तरफ भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की आर्थिक वृद्धि दर्ज कर मजबूत प्रदर्शन किया है।
भारत का यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ग्लोबल ट्रेड को लेकर चिंता, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक जोखिम दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती बने हुए हैं।
इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान भी पीछे छूटा
भारत की GDP ग्रोथ का आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि अर्थशास्त्रियों ने इससे कम वृद्धि का अनुमान लगाया था।
रॉयटर्स के 58 अर्थशास्त्रियों के पोल में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ करीब 7.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। वास्तविक वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही, यानी अर्थव्यवस्था ने अनुमानों को पीछे छोड़ दिया।
अर्थशास्त्रियों ने अपने अनुमान में कमजोर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों को प्रमुख चिंता के तौर पर देखा था।
भारत और चीन के आंकड़ों में बड़ा अंतर
अगर दोनों देशों के हालिया आंकड़ों को एक साथ देखा जाए तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आती है।
| आर्थिक संकेतक | भारत | चीन |
|---|---|---|
| अप्रैल-जून GDP ग्रोथ | 7.8% | 4.3% |
| मैन्युफैक्चरिंग PMI | मजबूत आर्थिक गतिविधि | 49.8 |
| PMI का 50 स्तर | — | अभी भी नीचे |
| प्रमुख चुनौती | ग्लोबल अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतें | कमजोर घरेलू मांग और प्रॉपर्टी सेक्टर |
इन आंकड़ों से साफ है कि फिलहाल भारत की आर्थिक रफ्तार चीन की तुलना में ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि, किसी भी अर्थव्यवस्था की लंबी अवधि की स्थिति का आकलन केवल एक तिमाही या एक आर्थिक संकेतक से करना उचित नहीं होगा।
भारत के लिए भी वैश्विक व्यापार, तेल की कीमतें, निजी निवेश और भू-राजनीतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। वहीं चीन के लिए घरेलू मांग को मजबूत करना और प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी से बाहर निकलना बड़ी चुनौती है।
आगे क्या?
भारत की 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ ने यह संकेत जरूर दिया है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में फिलहाल मजबूती बनी हुई है। दूसरी ओर, चीन के PMI का 50 से नीचे रहना बताता है कि वहां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अभी पूरी तरह विस्तार की स्थिति नहीं आई है।
इसलिए आने वाले महीनों में दोनों देशों के निजी निवेश, घरेलू खपत, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और सरकारी नीतियों पर नजर रहेगी। यही संकेत बताएंगे कि भारत की तेज रफ्तार कितनी टिकाऊ है और चीन अपनी मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से कितनी तेजी से बाहर निकल पाता है।


