KPSC Exam Scam: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में कर्नाटक CID ने बड़ा एक्शन लिया है। 2016 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को दो दिनों तक पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया है। गंगवार उस अवधि में KPSC में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे, जिस दौरान कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोप सामने आए।
गिरफ्तारी के बाद IAS अधिकारी को फर्स्ट एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उन्हें परप्पना अग्रहारा जेल ले जाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने गंगवार को सोमवार, 31 अगस्त को फिर से पेश करने का निर्देश दिया है।
दो दिन की पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी
KPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद वह जांच अधिकारी के सामने पेश हुए। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार और शनिवार को उनसे लगातार पूछताछ की गई।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के दौरान उनकी क्या भूमिका रही। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में सहयोग नहीं करने के आरोप के बाद CID ने उन्हें गिरफ्तार किया।
हालांकि, किसी भी अधिकारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
KPSC में परीक्षा नियंत्रक थे ज्ञानेंद्र गंगवार
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं। वह फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग में Controller of Examinations यानी परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे।
परीक्षा नियंत्रक के तौर पर परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं में इस पद की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि KPSC भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान CID की पूछताछ के दायरे में गंगवार भी आए।
फिलहाल वह कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के निदेशक के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।
किस परीक्षा में सामने आई कथित गड़बड़ी?
CID कर्नाटक लोक सेवा आयोग की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है। जांच का फोकस परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड, OMR शीट के रखरखाव और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों एवं अन्य लोगों की भूमिका पर है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों और OMR शीट को संभालने में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
इस मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है।
ED की छापेमारी के बाद भी चर्चा में आए थे गंगवार
KPSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला उस समय भी चर्चा में आया था, जब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इससे जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इसी दौरान ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के ठिकाने को लेकर भी सवाल उठे थे।
राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने उस समय कहा था कि गंगवार ने उन्हें बताया था कि वह अपने पिता की तबीयत से जुड़ी आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव गए थे।
इसके बाद ED की कार्रवाई में भी अधिकारी से जुड़े परिसरों की तलाशी लिए जाने की बात सामने आई। KPSC मामले में CID और ED अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रहे हैं।
CID और ED की जांच में क्या है अंतर?
KPSC भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर CID और ED की जांच अलग-अलग स्तर पर चल रही है। CID मुख्य रूप से कथित परीक्षा अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
वहीं ED की कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित हो सकती है। दोनों एजेंसियों की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और साक्ष्य मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की गिरफ्तारी के बाद CID उनसे जुड़े मामले में आगे की पूछताछ और दस्तावेजों की जांच कर सकती है। जांच एजेंसी अदालत से उनकी हिरासत की मांग भी कर सकती है, ताकि कथित अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत पूछताछ की जा सके।
फिलहाल IAS अधिकारी न्यायिक हिरासत में हैं और KPSC भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।


