Zee Entertainment Share Price: जी एंटरटेनमेंट के शेयरों में सोमवार, 31 अगस्त को भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलने के बाद कंपनी का स्टॉक करीब 10 फीसदी तक फिसल गया। हालांकि, निचले स्तरों से शेयर में कुछ रिकवरी जरूर आई, लेकिन दोपहर तक इसमें करीब 8 फीसदी की गिरावट बनी हुई थी। लगातार चौथे कारोबारी दिन शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहा है।
31 अगस्त को दोपहर 12 बजे के आसपास Zee Entertainment का शेयर 7.71 फीसदी गिरकर 93.64 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। शेयर में इस तेज गिरावट के पीछे जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया से जुड़ा विवाद प्रमुख वजह माना जा रहा है।
NCLT के फैसले के बाद बढ़ा विवाद
सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने पिछले सप्ताह उनके द्वारा पेश किए गए रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी। इस प्लान को लेकर क्रेडिटर्स के बीच असहमति सामने आई है।
रीपेमेंट प्लान के तहत जी ग्रुप से जुड़े कर्जदाताओं को उनके कुल दावों की तुलना में बेहद कम रकम मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेडिटर्स ने करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के दावे किए थे, जबकि स्वीकृत प्लान के तहत उन्हें लगभग 6.5 करोड़ रुपये मिलने हैं।
यानी दावा की गई रकम की तुलना में भुगतान बेहद कम है। इसी वजह से कुछ कर्जदाताओं ने NCLT के फैसले को चुनौती देने का रास्ता अपनाने का फैसला किया है।
Union Bank, Canara Bank और LIC Housing Finance करेंगे अपील
सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को लेकर कुछ प्रमुख बैंक और NBFC अब NCLT के फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में हैं।
इनमें Union Bank of India, Canara Bank और LIC Housing Finance शामिल हैं। ये संस्थान नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) का रुख कर सकते हैं।
बाजार में इस घटनाक्रम को Zee Entertainment के लिए निगेटिव सेंटीमेंट के तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि सोमवार को कंपनी के शेयर में अचानक बिकवाली तेज होती नजर आई।
रीपेमेंट प्लान के खिलाफ क्यों थे कर्जदाता?
सुभाष चंद्रा की इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया में कुछ बड़े कर्जदाताओं ने रीपेमेंट प्लान का विरोध किया था। इनमें LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India भी शामिल थे।
इन तीनों संस्थानों की कुल वोटिंग हिस्सेदारी करीब 8.45 फीसदी बताई गई थी। उन्होंने प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया था।
हालांकि, प्लान को मंजूरी के लिए पर्याप्त समर्थन मिल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80.81 फीसदी वोटिंग प्लान के पक्ष में हुई, जिसके बाद NCLT ने इसे मंजूरी दे दी।
अब विरोध करने वाले कर्जदाताओं की ओर से संभावित अपील ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। निवेशक इसी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
लगातार चौथे दिन गिरा Zee Entertainment का शेयर
31 अगस्त की गिरावट से पहले भी Zee Entertainment के शेयर में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही थी। सोमवार की गिरावट के साथ स्टॉक लगातार चौथे कारोबारी सत्र में नीचे आया।
हालांकि, कंपनी के शेयर ने साल 2026 में अब तक सकारात्मक प्रदर्शन किया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक Zee Entertainment का शेयर करीब 3.26 फीसदी ऊपर है।
लेकिन लंबी अवधि में तस्वीर कमजोर रही है। बीते एक साल में कंपनी के शेयर की कीमत में करीब 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
इसका मतलब है कि हालिया चार कारोबारी सत्रों की कमजोरी को निवेशकों को कंपनी से जुड़े व्यापक जोखिमों और बाजार के मौजूदा सेंटीमेंट के संदर्भ में देखना होगा।
पूरे शेयर बाजार पर भी दबाव
सोमवार को केवल Zee Entertainment ही दबाव में नहीं था। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में भी कमजोरी देखने को मिली।
31 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे Nifty 0.50 फीसदी या लगभग 120 अंक गिरकर 24,056 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं Sensex करीब 320 अंक यानी 0.41 फीसदी की गिरावट के साथ 76,942 के स्तर पर था।
ऐसे कमजोर बाजार माहौल में किसी कंपनी से जुड़ी नकारात्मक खबर आने पर उसके शेयर में बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
Zee Entertainment के शेयर में मौजूदा गिरावट के पीछे सबसे बड़ा सेंटीमेंटल ट्रिगर सुभाष चंद्रा की पर्सनल इनसॉल्वेंसी से जुड़े रीपेमेंट प्लान पर विवाद है। NCLT की मंजूरी के बावजूद कुछ कर्जदाताओं द्वारा NCLAT में अपील की संभावित तैयारी से मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
ऐसे में निवेशकों के लिए आगे NCLAT में होने वाली कार्रवाई, कर्जदाताओं की अपील और कंपनी से जुड़े अन्य कॉरपोरेट घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे।
हालांकि, केवल एक दिन की तेज गिरावट के आधार पर शेयर की आगे की दिशा तय करना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन, वित्तीय नतीजों और कानूनी घटनाक्रमों पर भी नजर रखनी चाहिए।


