Stock Market Today: घरेलू शेयर बाजार के लिए सोमवार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। GIFT निफ्टी में गिरावट के साथ एशियाई बाजारों में भी दबाव है। US-ईरान संघर्ष दोबारा तेज होने, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हो सकता है।
हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण संकेतों के साथ हो रही है। GIFT निफ्टी करीब 100 अंक नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत की संभावना बन रही है। दूसरी ओर, एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इन सभी घटनाक्रमों के बीच निवेशक जोखिम लेने से बच सकते हैं। बाजार की नजर अब ग्लोबल संकेतों के साथ-साथ इस सप्ताह जारी होने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगी।
GIFT निफ्टी से कमजोर शुरुआत के संकेत
सोमवार सुबह GIFT निफ्टी में कमजोरी देखने को मिल रही है। GIFT निफ्टी 87 अंक या 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 24,225 के आसपास कारोबार कर रहा था। इससे संकेत मिल रहे हैं कि घरेलू बाजार की शुरुआत दबाव में हो सकती है।
इससे पहले शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने दो कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बावजूद IT शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए थे।
शुक्रवार को सेंसेक्स 330.92 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 84.80 अंक यानी 0.35 फीसदी की तेजी के साथ 24,175.65 पर रहा।
हालांकि, ग्लोबल बाजारों में बने दबाव के कारण सोमवार को घरेलू बाजार की शुरुआती तेजी पर ब्रेक लग सकता है।
US-ईरान तनाव से क्रूड में फिर उबाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष दोबारा तेज होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। क्रूड ऑयल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता बढ़ाती है। महंगा क्रूड देश के इंपोर्ट बिल और करेंट अकाउंट पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा ईंधन लागत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई की खबरों ने भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बीच निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
ऐसे माहौल में बाजार में क्रूड, डॉलर और बॉन्ड यील्ड तीनों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 4.7 फीसदी के पार
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की चिंता बढ़ी है। US फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने महंगाई लक्ष्य से ऊपर रहने की स्थिति में जरूरी कदम उठाने के संकेत दिए हैं। उनके बयान के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई और यह 4.7 फीसदी के पार चली गई।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर आमतौर पर इक्विटी बाजारों के सेंटीमेंट पर पड़ता है। ऊंची यील्ड के कारण निवेशकों के लिए बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसके अलावा ब्याज दरों में संभावित सख्ती की चिंता से शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
डॉलर इंडेक्स में भी मजबूती देखने को मिली है। वहीं सोने और चांदी में फिलहाल नरमी का रुख नजर आ रहा है।
एशियाई बाजारों में भारी दबाव
ग्लोबल संकेतों का असर सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2 फीसदी तक फिसल गए हैं। इससे एशियाई बाजारों में निवेशकों के कमजोर सेंटीमेंट का अंदाजा लगाया जा सकता है।
एशियाई करेंसी बाजार में भी मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया करीब 0.29 फीसदी और जापानी येन 0.09 फीसदी मजबूत हुए हैं। इसके उलट दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.04 फीसदी और फिलीपींस पेसो में 0.10 फीसदी की गिरावट आई है।
थाई बाहत में 0.19 फीसदी और ताइवान डॉलर में 0.17 फीसदी की कमजोरी रही। चीनी रेनमिनबी 0.14 फीसदी और मलेशियाई रिंगित करीब 0.20 फीसदी कमजोर हुआ। सिंगापुर डॉलर में भी मामूली 0.02 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
इस हफ्ते GDP और US Jobs Data पर नजर
भू-राजनीतिक घटनाक्रम के अलावा इस सप्ताह बाजार के लिए कई अहम आर्थिक आंकड़े भी सामने आने वाले हैं। भारत के FY27 की पहली तिमाही यानी Q1 के GDP आंकड़े और अमेरिका की Non-Farm Payrolls रिपोर्ट निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।
इन आंकड़ों से भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ की मजबूती और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी की आगे की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं। अगर अमेरिकी रोजगार आंकड़े मजबूत रहते हैं और महंगाई पर दबाव बना रहता है तो फेड की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ सकती है।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, इन मैक्रो आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी और इनसे घरेलू आर्थिक विकास तथा वैश्विक मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर नई दिशा मिल सकती है।
निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम
टेक्निकल नजरिए से भी बाजार में सावधानी बरतने की जरूरत है। एक्सपर्ट के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,300-24,400 का जोन अहम रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है।
वहीं नीचे की तरफ 24,100-24,000 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। अगर निफ्टी 24,000 के नीचे टिकता है तो बिकवाली बढ़ सकती है और इंडेक्स के 23,800 के स्तर की तरफ फिसलने का जोखिम बन सकता है।
इसलिए सोमवार को निवेशकों की नजर शुरुआती कारोबार में निफ्टी के 24,000-24,400 के दायरे पर रहेगी। ग्लोबल बाजारों में कमजोरी और क्रूड की तेजी के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
फिलहाल बाजार के सामने कई चुनौतियां एक साथ मौजूद हैं। एक तरफ अमेरिका-ईरान तनाव से क्रूड महंगा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और संभावित सख्त मौद्रिक नीति की चिंता है। एशियाई बाजारों में कमजोरी भी घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत नहीं है।
ऐसे में निवेशकों को सोमवार के कारोबार में क्रूड की कीमत, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और GIFT निफ्टी के रुख पर नजर रखनी चाहिए। इसके साथ ही निफ्टी के 24,000 के सपोर्ट और 24,300-24,400 के रेजिस्टेंस जोन को भी अहम माना जा रहा है।
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