Senior Citizens Health Insurance Tips: 60 साल की उम्र के बाद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में माता-पिता या बुजुर्गों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। हालांकि, सिर्फ पॉलिसी खरीद लेना पर्याप्त नहीं है। बीमा लेने से पहले वेटिंग पीरियड, सम इंश्योर्ड, एक्सक्लूजन, को-पेमेंट और हॉस्पिटल नेटवर्क जैसी शर्तों को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है।
नई दिल्ली: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर 60 वर्ष की उम्र के बाद नियमित इलाज, अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर बीमारियों के इलाज पर होने वाला खर्च परिवार के बजट पर बड़ा असर डाल सकता है। ऐसे में माता-पिता या परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के लिए Health Insurance लेना आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
आज बाजार में सीनियर सिटीजन के लिए अलग-अलग तरह की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां उपलब्ध हैं। कंपनियां इनके साथ अलग-अलग कवरेज, प्रीमियम और शर्तें देती हैं। इसलिए किसी पॉलिसी को सिर्फ कम प्रीमियम देखकर चुनना सही रणनीति नहीं है।
अगर आप अपने माता-पिता या किसी बुजुर्ग के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो पॉलिसी खरीदने से पहले इन महत्वपूर्ण बातों की जांच जरूर कर लें।
1. कम वेटिंग पीरियड वाली पॉलिसी पर दें ध्यान
सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय Waiting Period सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है। खासकर तब, जब जिस व्यक्ति का बीमा कराया जा रहा है, उसे पहले से कोई बीमारी है।
कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में पहले से मौजूद बीमारियों यानी Pre-existing Diseases (PED) के लिए एक निश्चित वेटिंग पीरियड रखा जाता है। इस अवधि के दौरान संबंधित बीमारी के इलाज का खर्च पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कवर नहीं हो सकता।
इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले यह जरूर देखें कि पहले से मौजूद बीमारियों के लिए कितने समय का वेटिंग पीरियड है। सामान्य तौर पर कम वेटिंग पीरियड वाली पॉलिसी अधिक सुविधाजनक हो सकती है, लेकिन अंतिम फैसला केवल इसी आधार पर न लें। कवरेज और अन्य नियमों को भी साथ में देखें।
2. पर्याप्त Sum Insured चुनना जरूरी
सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय Sum Insured यानी बीमित राशि पर विशेष ध्यान दें।
सम इंश्योर्ड वह अधिकतम राशि होती है, जिसके भीतर पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक बीमा कंपनी इलाज से जुड़े कवर किए गए खर्चों का भुगतान करती है। अगर आपने बहुत कम बीमित राशि वाली पॉलिसी ले ली और अस्पताल का खर्च उससे अधिक हो गया, तो बाकी रकम आपको अपनी जेब से देनी पड़ सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी या गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है। इसलिए सिर्फ कम प्रीमियम के लिए बहुत कम कवर वाली पॉलिसी चुनने से बचना चाहिए।
पॉलिसी लेते समय अपने माता-पिता की उम्र, मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, शहर में इलाज की लागत और संभावित मेडिकल खर्च को ध्यान में रखकर पर्याप्त बीमा राशि चुनें।
3. Exclusions को नजरअंदाज न करें
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली शर्तों में Exclusions भी शामिल हैं।
एक्सक्लूजन का मतलब उन बीमारियों, इलाज या परिस्थितियों से है जिन्हें पॉलिसी के तहत कवर नहीं किया जाता। हर पॉलिसी में कुछ ऐसे खर्च हो सकते हैं, जिनका भुगतान बीमा कंपनी नहीं करती।
इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले केवल यह न देखें कि उसमें क्या-क्या कवर किया जा रहा है। यह भी जरूर पता करें कि क्या कवर नहीं किया जा रहा है।
पॉलिसी डॉक्यूमेंट में एक्सक्लूजन की पूरी सूची पढ़ें। अगर किसी शर्त को समझने में परेशानी हो रही है, तो बीमा कंपनी या संबंधित सलाहकार से उसका स्पष्ट जवाब लें। इससे बाद में क्लेम के समय अप्रत्याशित परेशानी से बचने में मदद मिल सकती है।
4. Co-payment Clause को जरूर समझें
सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस में कई बार Co-payment की शर्त भी लागू होती है। इसे समझना बेहद जरूरी है।
को-पेमेंट का मतलब है कि किसी पात्र मेडिकल क्लेम का एक निश्चित हिस्सा बीमाधारक को खुद अपनी जेब से देना पड़ सकता है और बाकी हिस्सा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा कंपनी वहन करती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी पॉलिसी में 20 फीसदी को-पेमेंट की शर्त है और पात्र अस्पताल खर्च 1 लाख रुपये है, तो शर्तों के अनुसार 20,000 रुपये का हिस्सा आपको खुद देना पड़ सकता है और बाकी राशि बीमा कंपनी द्वारा कवर की जा सकती है।
इसलिए पॉलिसी लेते समय यह जांचना जरूरी है कि उसमें को-पेमेंट लागू है या नहीं और अगर है तो उसकी दर कितनी है। कम को-पेमेंट वाली पॉलिसी के लिए प्रीमियम अलग हो सकता है, इसलिए कुल लागत और कवरेज की तुलना करके फैसला लें।
5. Hospital Network की पहले ही जांच करें
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले यह जरूर देखें कि बीमा कंपनी के Network Hospitals कौन-कौन से हैं।
खासकर अपने शहर के उन अस्पतालों की सूची पहले जांच लें, जहां आप माता-पिता का इलाज करवाना पसंद करेंगे। अगर संबंधित अस्पताल बीमा कंपनी के नेटवर्क में शामिल है, तो पॉलिसी की शर्तों के तहत कैशलेस सुविधा का लाभ मिल सकता है।
दूसरी ओर, अगर जरूरत के समय अस्पताल नेटवर्क में शामिल नहीं है, तो कैशलेस सुविधा उपलब्ध न होने की स्थिति बन सकती है और आपको पहले भुगतान करना पड़ सकता है, जिसके बाद पॉलिसी के नियमों के अनुसार रिइम्बर्समेंट की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।
इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले अपने आसपास के प्रमुख अस्पतालों की नेटवर्क सूची जरूर चेक करें।
सिर्फ प्रीमियम देखकर न खरीदें पॉलिसी
सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सबसे सस्ती पॉलिसी चुनना हमेशा सही फैसला नहीं होता। कम प्रीमियम के साथ अगर कवरेज कम है, वेटिंग पीरियड लंबा है, को-पेमेंट ज्यादा है या कई जरूरी इलाज एक्सक्लूड हैं, तो जरूरत के समय पॉलिसी उतनी उपयोगी साबित नहीं हो सकती।
पॉलिसी की तुलना करते समय इन सभी पहलुओं को एक साथ देखें:
- Sum Insured कितना है
- Pre-existing Diseases का Waiting Period कितना है
- Co-payment कितना है
- कौन-कौन से Exclusions हैं
- Network Hospitals कितने और कौन से हैं
- Room Rent और अन्य Sub-limits हैं या नहीं
- Claim से जुड़े नियम और शर्तें क्या हैं
- Renewal की शर्तें क्या हैं
माता-पिता के लिए पॉलिसी लेते समय रखें अतिरिक्त सावधानी
सीनियर सिटीजन की जरूरतें युवा लोगों से अलग हो सकती हैं। इसलिए उनके लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, नियमित दवाइयों, पहले से मौजूद बीमारियों और भविष्य में संभावित मेडिकल खर्च को ध्यान में रखना जरूरी है।
साथ ही, पॉलिसी खरीदते समय माता-पिता की सभी मौजूदा बीमारियों और मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी देना चाहिए। किसी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को छिपाने से भविष्य में क्लेम के समय परेशानी हो सकती है।
निष्कर्ष: 60 साल के बाद हेल्थ इंश्योरेंस बुजुर्गों के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। लेकिन सही पॉलिसी का चुनाव केवल प्रीमियम देखकर नहीं करना चाहिए। वेटिंग पीरियड, पर्याप्त सम इंश्योर्ड, एक्सक्लूजन, को-पेमेंट और नेटवर्क अस्पताल जैसी शर्तों को अच्छी तरह समझने के बाद ही पॉलिसी का चुनाव करें। जरूरत पड़ने पर बीमा दस्तावेजों की शर्तों को समझने के लिए योग्य बीमा सलाहकार से मदद लेना भी उपयोगी हो सकता है।


