नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में स्पेस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को आम लोगों की जिंदगी से जोड़ने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग केवल रॉकेट और सैटेलाइट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि खेती, पशुपालन, डेयरी, पर्यावरण और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े क्षेत्रों में भी इसका व्यापक इस्तेमाल होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को 20 स्पेस स्टार्टअप्स के सीईओ और फाउंडर्स से मुलाकात की।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। मोदी का मानना है कि देश का तेजी से विकसित हो रहा प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है।
20 स्पेस स्टार्टअप्स के प्रमुखों से की मुलाकात
It was wonderful to meet the Yuva Urja of India’s space sector…young entrepreneurs and innovators who have shown remarkable courage by entering a new and demanding domain. They have taken risks, trusted the reform process and remained consistent in their efforts. Due to this,… pic.twitter.com/RV1Nd4dUKm
— Narendra Modi (@narendramodi) August 21, 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्रमुख स्पेस कंपनियों और स्टार्टअप्स के संस्थापकों तथा प्रमुख अधिकारियों के साथ बातचीत की। इनमें स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, गैलेक्सआई, पियरसाइट, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस और दिगंतरा समेत करीब 20 कंपनियां शामिल थीं।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर में युवाओं और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई तकनीक को समाज के व्यापक हित में इस्तेमाल करने की जरूरत है।
खेती से लेकर पर्यावरण तक स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मौसम की निगरानी, फसल की स्थिति का आकलन, जमीन और जल संसाधनों की निगरानी तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसके अलावा पशुपालन, डेयरी और पर्यावरण संरक्षण में भी सैटेलाइट आधारित तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्पेस सेक्टर में होने वाले इनोवेशन का फायदा आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए। इससे सरकारी योजनाओं की निगरानी, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
युवाओं में बढ़ेगा स्पेस के प्रति उत्साह
मोदी ने स्पेस इंडस्ट्री और सामाजिक विकास से जुड़े दूसरे क्षेत्रों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने युवाओं में स्पेस और टेक्नोलॉजी के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ मिलकर काम करने को भी प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी मुलाकात को लेकर कहा कि देश के स्पेस सेक्टर की युवा ऊर्जा से मिलना शानदार अनुभव रहा। उन्होंने युवा उद्यमियों और इनोवेटर्स की उस हिम्मत की तारीफ की, जिन्होंने एक नए और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखा, जोखिम उठाया और सुधार की प्रक्रिया पर भरोसा करते हुए लगातार प्रयास जारी रखा।
भारत के स्पेस सेक्टर में कमर्शियल विस्तार की तैयारी
स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका के बीच भारत अब कमर्शियल विस्तार के एक नए चरण की ओर बढ़ रहा है। स्पेस रेगुलेटर और प्रमोटर IN-SPACe के चेयरमैन विवेक गोयनका ने एक बिजनेस कॉन्क्लेव में भारत के स्पेस सेक्टर की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उनके मुताबिक भारत के स्पेस सेक्टर का आकार 2033 तक करीब 8 अरब डॉलर से बढ़कर 44 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें करीब 11 अरब डॉलर का कारोबार विदेशी ग्राहकों से आने की उम्मीद जताई गई है।
450 स्टार्टअप्स में 20 कंपनियां कमर्शियल स्केलिंग के लिए तैयार
भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। गोयनका के अनुसार देश में करीब 450 स्पेस स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से लगभग 20 कंपनियां अपने कारोबार को बड़े कमर्शियल स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हो चुकी हैं।
स्काईरूट एयरोस्पेस की ऑर्डर बुक अगले दो से तीन वर्षों के लिए मजबूत बताई गई है। वहीं, अग्निकुल कॉसमॉस रियूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। पिक्सेल IN-SPACe के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स का एक ग्रुप विकसित कर रही है।
डिफेंस सेक्टर बना बड़ा ग्राहक
भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स के लिए डिफेंस सेक्टर भी एक महत्वपूर्ण बाजार बनकर उभर रहा है। दिगंतरा स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस और स्पेस डोमेन अवेयरनेस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां सैटेलाइट रीफ्यूलिंग जैसी नई तकनीकों पर भी काम कर रही हैं।
स्पेस स्टार्टअप्स का मौजूदा कारोबार करीब 10-20 करोड़ रुपये के स्तर पर बताया गया है और कई कंपनियां इसे सालाना दो से तीन गुना की रफ्तार से बढ़ा रही हैं। डिफेंस सेक्टर घरेलू प्राइवेट कंपनियों से 31 मिलिट्री सर्विलांस सैटेलाइट्स बनवाने का ऑर्डर भी दे चुका है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है प्राइवेट स्पेस सेक्टर?
भारत का निजी स्पेस सेक्टर सिर्फ रॉकेट लॉन्चिंग तक सीमित नहीं है। सैटेलाइट इमेजिंग, अर्थ ऑब्जर्वेशन, नेविगेशन, मौसम पूर्वानुमान, कम्युनिकेशन, स्पेस डोमेन अवेयरनेस और डिफेंस जैसी कई तकनीकों में निजी कंपनियां सक्रिय हो रही हैं।
अगर इन तकनीकों को आम नागरिकों की जरूरतों से जोड़ा जाता है, तो इसका असर खेती, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है।
भारत के लिए अगला बड़ा लक्ष्य स्पेस टेक्नोलॉजी को व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ सामाजिक विकास का माध्यम बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी का स्पेस स्टार्टअप्स के साथ संवाद इसी दिशा में निजी इनोवेशन और सरकारी प्राथमिकताओं के बीच बेहतर तालमेल का संकेत देता है।


